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दो दिवसीय आर्य महासम्मेलन में अमित शाह होंगे मुख्य अतिथि

Sun, 16 Oct 2016 12:38 AM IST
ब्यूरो/कुरुक्षेत्र,अमर उजाला
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हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल व गुरुकुल के संरक्षक आचार्य देवव्रत - फोटो : अमर उजाला
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गुरुकुल कुरुक्षेत्र का 104वां वार्षिक महोत्सव 21 अक्तूबर से धूमधाम से मनाया जाएगा। इसके साथ ही 22 अक्तूबर को आर्य युवा महासम्मेलन आयोजित किया जाएगा। जिसमें भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह मुख्य अतिथि होंगे। जबकि मुख्यमंत्री मनोहर लाल विशिष्ट अतिथि के रुप में शिरकत करेंगे।  यह जानकारी हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल व गुरुकुल के संरक्षक आचार्य देवव्रत ने गुरुकुल कुरुक्षेत्र के ऑडिटोरियम हॉल में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान दी।
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इस दौरान गुरुकुल प्रबंध समिति के प्रधान कुलवंत सिंह सैनी, सह प्राचार्य शमशेर सिंह व डॉ. राजेंद्र विद्यालंकार भी उपस्थित रहे। आचार्य देवव्रत ने बताया कि 21 अक्तूबर को वार्षिक महोत्सव का शुभारंभ कुरुक्षेत्र की उपायुक्त सुमेधा कटारिया ध्वजारोहण द्वारा करेंगी तथा विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्धियां हासिल करने वाले गुरुकुल कुरुक्षेत्र के प्रतिभाशाली छात्रों को पुरस्कृत करेंगी। इसी दिन भजनोपदेशक व आर्य समाज के विद्वजन अपने ओजस्वी प्रवचन द्वारा लोगों का मार्गदर्शन भी करेंगे। आचार्य ने बताया कि 22 अक्तूबर को प्रात: सात बजे यजुर्वेद एवं सामवेद पारायण महायज्ञ की पूर्णाहुति होगी। इसके पश्चात आर्य युवा महासम्मेलन में डीएवी प्रबंधक समिति के प्रधान पूनम  सूरी अध्यक्षता करेंगे।

आचार्य ने बताया कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह गुरुकुल के नवनिर्मित नेताजी सुभाष चंद्र बोस भारतीय रक्षा अकादमी (एनडीए) विंग का उद्घाटन भी करेंगे। वे गुरुकुल में चलाए जा रहे विभिन्न प्रकल्पों का अवलोकन भी करेंगे। आचार्य ने बताया कि समारोह में गुरुकुल के ब्रह्मचारियों द्वारा योगासन, मल्लखम्भ, स्तूप-निर्माण, जिम्नास्टिक, सूर्य नमस्कार, कोरियोग्राफी आदि का प्रदर्शन भी किया जाएगा।
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आर्य युवा महासम्मेलन देगा युवाओं को नई दिशा
आर्य युवा महासम्मेलन की सार्थकता पर आचार्य देवव्रत ने कहा कि इससे युवाओं को एक नई दिशा मिलेगी। आज युवा वर्ग नशे का शिकार है जिन्हें नशे से मुक्त करने हेतु सही दिशा व मार्गदर्शन की आवश्यकता है। आज कन्या भ्रूण हत्या के कारण लिंगानुपात घटता  रहा है जिसे पटरी पर लाने की आवश्यकता है। युवाओं में देश-प्रेम, आपसी भाईचारे व समरसता की भावना घटती जा रही है। इसलिए महर्षि दयानंद के विचारों व आर्य समाज के सिद्धांतों पर चलने की आवश्यकता है।
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