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संस्कारों एवं संस्कृति के बिना हर प्रकार की शिक्षा अधूरी : महंत राजेंद्र पुरी

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कुरुक्षेत्र। विश्वभर में अपनी संस्कृति एवं संस्कारों से ही सम्मान मिलता है। इसके बिना कोई भी शिक्षा हो वह अधूरी है। यह कहना है जग ज्योति दरबार के महंत राजेंद्र पुरी का, जो भारतीय संस्कृति, संस्कारों एवं सनातन धर्म का प्रचार अभियान निरंतर चलाए हुए हैं।
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इस अभियान के अंतर्गत उन्होंने बच्चों की शिक्षा पर चर्चा करते हुए कहा कि अच्छे संस्कारों से ही शिक्षा का आधार भी मजबूत होता है। संस्कारों एवं संस्कृति के ज्ञान के बिना कोई भी शिक्षा अधूरी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में यह महसूस किया जा रहा है कि जैसे-जैसे शिक्षित नागरिकों का प्रतिशत बढ़ रहा है, वैसे-वैसे समाज में जीवन मूल्यों में गिरावट आ रही है। हमें इस विषय पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
महंत ने कहा कि विद्यार्थी जो देश का भविष्य हैं वे तनाव, अवसाद, बाह्य आकर्षण और अनुशासनहीनता के शिकार हैं। इसका कारण पाश्चात्य संस्कृति, विद्यालय या समाज ही नहीं, बल्कि संस्कारों के प्रति हमारी उदासीनता है। परिवार बालक की प्रथम पाठशाला है तो माता-पिता प्रथम शिक्षक हैं।
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