पिपली। राजघाट दिल्ली से 12 अगस्त को चली अंदाज-ए-दोस्ती यात्रा रविवार को पिपली पहुंची, जहां डॉ सुभाष सैनी के नेतृत्व में जोरदार स्वागत किया गया। सोमवार को यह यात्रा बाघा बॉर्डर पर पहुंचेगी। यात्रा दोस्ती और अमन का संदेश लेकर निकाली जा रही है। विभिन्न संगठनों के बुद्धिजीवी लोग यात्रा से जुड़े हुए हैं। 14-15 मार्च को कैंडल मार्च निकाला जाएगा।
यात्रा में चल रहे शिक्षक विनोद कुमार ने बताया कि विभिन्न स्थानों पर यात्रा के पड़ाव हुए हैं और जगह जगह लोगों द्वारा यात्रा का स्वागत किया गया। यह यात्रा फगवाड़ा में रुकेगी। इसी क्रम में खालसा कॉलेज में सेमिनार आयोजित किया गया है। वहां पर बुद्धिजीवी अपने अपने विचार रखेंगे। उन्होंने बताया कि यात्रा का मुख्य मकसद शांति संदेश देना है क्योंकि समाज में आज के समय मे अशांति का वातावरण बना हुआ है और भाई चारा खत्म होता जा रहा है। उसी संदेश को लेकर यह यात्रा हर वर्ष निकाली जाती है। सरहद पर दीप जलाने के अभियान की शुरुआत सन 1980 के दशक में शांतिकर्मी कुलदीप नैय्यर और विख्यात गांधीवादी निर्मला देशपांडे ने किया था, जिसमें शांति कर्मी गोली नहीं ंबोली चाहिए, जंग नही अमन चाहिए, युद्ध नहीं बुद्ध चाहिए के नारों के साथ सहभागी रहे।
उनके बाद भी यह यात्रा चल रही है। इसके अलावा अन्य यात्राएं भी बाघा बार्डर तक अमन व शांति का संदेश लेकर आती हैं। यात्रा में शामिल संगठनों में आगाज-ए-दोस्ती, अनग-मदद फाउंडेशन बिहार, एसोसिशन ऑफ पीपल ऑफ इंडिया, भगत सिंह से दोस्ती मंच, बीबी अमर कौर मेमोरियल फाउंडेशन, देश हरियाणा, ड्रॉप डेड फाउंडेशन, गांधी ग्लोबल फेमिली और अन्य संगठन शामिल हैं।