कुरुक्षेत्र। श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती प्रक्रिया में कई गंभीर अनियमितताएं हुई हैं, जिसकी निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच की जानी चाहिए। ये आरोप आयुष सर्व अध्यापक कल्याण समिति के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अशोक राणा ने लगाए। वे शनिवार को रेलवे रोड स्थित एक होटल में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने बताया कि उन्होंने संबंधित दस्तावेज एवं तथ्यों के साथ शिकायत दर्ज कराई है तो वहीं उच्च स्तरीय जांच की मांग के लिए मुख्यमंत्री व राज्यपाल को भी शिकायत भेजी है।
मामले की जांच एंटी करप्शन ब्यूरो ने भी शुरू कर दी है। आगामी कार्रवाई के लिए स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव तक शिकायत पहुंच चुकी है। उन्होंने आरोप लगाए कि इस मामले में कुलपति जांच के दायरे में आ गए है और उनकी मुश्किलें बढ़ने वाली है।
डॉ. राणा ने कहा कि भर्ती के लिए तीन वर्ष का असिस्टेंट प्रोफेसर का अनुभव अनिवार्य करने से हरियाणा के अनेक योग्य अभ्यर्थी आवेदन से वंचित रह गए। उनका दावा है कि श्री कृष्ण आयुष यूनिवर्सिटी से एमडी करने वाले कई विद्यार्थी केवल इस शर्त के कारण आवेदन नहीं कर सके, जिससे प्रदेश के युवाओं को नुकसान हुआ।
डॉ. राणा ने भर्ती परीक्षा की गोपनीयता पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यदि परीक्षार्थियों से प्रश्नपत्र परीक्षा के दौरान वापस ले लिया गया था, तो वह बाहर कैसे पहुंचा। उन्होंने इस पूरे मामले की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि अधिकारियों और चयनित अभ्यर्थियों की मोबाइल लोकेशन जांची जानी चाहिए।
आयुष विश्वविद्यालय की छवि धूमिल करने के प्रयास, आरोप निराधार : कुलपति
कुरुक्षेत्र। विश्वविद्यालय कुलपति वैध प्रो. करतार सिंह धीमान ने बयान जारी कर बताया कि आयुष सर्व अध्यापक कल्याण समिति के कथित अध्यक्ष डॉ. अशोक राणा विश्वविद्यालय और उनकी छवि को धूमिल करने के उद्देश्य से तथ्यहीन आरोप लगा रहे हैं। उनके खिलाफ पुलिस अधीक्षक को भी शिकायत सौंपी हुई है। सभी मामलों में तथ्यों की जांच होने पर आरोप निराधार साबित हुए हैं।
कुलपति के अनुसार सहायक प्रोफेसरों की नियमित भर्ती प्रक्रिया को बाधित करने के लिए डॉ. अशोक राणा ने कई प्रयास किए। कभी प्रश्नपत्र आउट होने की अफवाह फैलाई गई तो कभी भर्ती नियमों की अनदेखी कर नियुक्तियां किए जाने का दुष्प्रचार किया। विश्वविद्यालय प्रशासन को भर्ती प्रक्रिया से संबंधित किसी भी अभ्यर्थी की ओर से कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई। सभी प्रक्रियाएं निर्धारित नियमों और पारदर्शिता के साथ कराई गईं थी। कुलपति ने कहा कि उनका पहला कार्यकाल पूर्ण होने वाला है। इसी कारण उनकी व्यक्तिगत तथा विश्वविद्यालय की संस्थागत छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
शिक्षक बोले- समिति से कोई सरोकार नहीं
कुलपति की ओर से जारी बयान में किए दावे के अनुसार श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के आयुर्वेद अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान के 50 से अधिक शिक्षकों ने लिखित रूप से विश्वविद्यालय प्रशासन को बताया कि उनका उक्त आयुष सर्व अध्यापक कल्याण समिति से कोई संबंध नहीं है। विश्वविद्यालय ने समिति के पंजीकरण एवं वैधता की जांच शुरू कर दी है। जिला रजिस्ट्रार ऑफ सोसाइटी को पत्र भेजकर समिति के पंजीकरण प्रमाणपत्र, पंजीकरण तिथि, वैधता, एमओए, नियम एवं उपनियम, वर्तमान कार्यकारिणी और सदस्य सूची उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।