कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में स्व-वित्तपोषण योजना (एसएफएस) के अंतर्गत कार्यरत शिक्षकों के साथ भेदभाव का मामला सामने आया है। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (कुटा) ने इस संबंध में सरकार और उच्च शिक्षा विभाग को शिकायत के आधार पर हस्तक्षेप की मांग की है।
कुटा का कहना है कि विश्वविद्यालय के विभिन्न शिक्षण विभागों और संस्थानों में करीब 85 शिक्षक एसएफएस के तहत नियमित रूप से सेवाएं दे रहे हैं। ये शिक्षक शिक्षा और शोध कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। वहीं विश्वविद्यालय की वित्तीय स्थिति को सुदृढ़ करने में भी इनका अहम योगदान है।
वर्तमान में विश्वविद्यालय के 13 विभागों में एसएफएस पाठ्यक्रम संचालित हैं जिनमें लगभग पांच हजार विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। ये पाठ्यक्रम रोजगारोन्मुखी और कौशल आधारित हैं।
शिक्षक संघ ने आरोप लगाया कि एसएफएस शिक्षकों का चयन पूरी तरह योग्यता और निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत हुआ है, फिर भी उन्हें बजट से मान्यता प्राप्त शिक्षकों के समान अधिकार और सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं। पदोन्नति, बकाया वेतन और प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दे लंबे समय से लंबित हैं। नीति निर्धारण से जुड़े प्रमुख निकायों में उन्हें शामिल नहीं किया जाता जिससे उनका मनोबल प्रभावित हो रहा है। संघ ने शिकायत में यह भी उल्लेख किया कि प्रदेश सरकार की विश्वविद्यालय समीक्षा समिति पहले ही पांच वर्ष से अधिक समय से संचालित पाठ्यक्रमों को बजट में लाने की सिफारिश कर चुकी है।