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Kurukshetra News: वर्टिकल गार्डन में कार्य से पहले ही बिल जमा कराए जाने के आरोप, घोटाले की आशंका

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शाहाबाद। वर्टिकल गार्डन मामले को लेकर जानकारी देते मृत्युंजय शास्त्री। - फोटो : Archive
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शाहाबाद। लाडवा व बराड़ा रोड अंडरपास पर बनाए गए वर्टिकल गार्डन के कार्य में लाखों रुपये के घोटाले की आशंका है। करीब 21 लाख 62 हजार रुपये की लागत से यह वर्टिकल गार्डन बनना है। ठेकेदार की ओर से इसके बिल गत 20 जुलाई 2025 को पोर्टल पर जमा करवा दिए जाने के आरोप लगे हैं जबकि शिकायतकर्ता का दावा है कि उस समय तक कार्य शुरू भी नहीं हुआ था।
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समाजसेवी मृत्युंजय शास्त्री ने आरोप लगाते हुए बताया कि 22 जुलाई 2025 को नगर पालिका के जेई राकेश रंगा ने पालिका अभियंता मंगू राम को लिखित में सूचित किया कि जब वर्टिकल गार्डन का काम शुरू ही नहीं हुआ तो बिल कैसे जमा हो गए। जेई ने बिलों को रद्द करने की सिफारिश भी की थी। इसके बावजूद 30 जून 2025 की निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर बिल को पोर्टल पर अप्रूवल के लिए भेज दिया। मृत्युंजय शास्त्री ने सवाल उठाया कि जब 21 जुलाई 2025 तक काम शुरू नहीं हुआ था, तो फिर 30 जून की निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर बिल कैसे पास कर दिए गए।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नगर पालिका की मॉनिटरिंग रिपोर्ट में एनआईटी कुरुक्षेत्र की ओर से सैंपल लेने की बात कही गई है, जबकि कोई सैंपल नहीं लिया गया। एल्यूमीनियम ट्यूब के स्थान पर लोहे की ट्यूब लगाई गई। इसके अलावा ड्रिप इरिगेशन सिस्टम प्रावधान के बावजूद नहीं लगाया गया। मामले की शिकायत एसडीएम को की गई।
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मृत्युंजय शास्त्री के मुताबिक शिकायत पर संज्ञान लेते हुए एसडीएम शाहाबाद ने मामले की जांच पीडब्ल्यूडी और सिंचाई विभाग के एसडीओ को सौंपी। जांच रिपोर्ट में इस कार्य में अनियमितताओं के साथ-साथ मॉनिटरिंग रिपोर्ट पर भी सवाल उठे हैं। शिकायतकर्ता ने चेतावनी दी कि 20 मार्च तक कोई कार्रवाई नहीं की गई तो वे प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने ये भी आरोप लगाए कि मॉनिटरिंग रिपोर्ट पर नगर पालिका प्रधान और एक अधिकारी के भी फर्जी हस्ताक्षर किए गए हैं।


मॉनिटरिंग रिपोर्ट पर उनके हस्ताक्षर नहीं : प्रधान

नगर पालिका प्रधान गुलशन कवातरा ने कहा कि वे पिछले चार महीनों से इस मुद्दे को उठा रहे हैं और मामला विजिलेंस के संज्ञान में भी लाया जा चुका है। उन्होंने कहा कि मॉनिटरिंग रिपोर्ट पर उनके हस्ताक्षर नहीं हैं। शायद किसी ने उनके हस्ताक्षर की नकल की हो।
ऑडिट के बाद ही नियम अनुसार भुगतान किया : सचिव

नगर पालिका सचिव बंबूल सिंह ने एसडीएम को भेजे जवाब में कहा कि सभी विकास कार्य तकनीकी शाखा की देखरेख में होते हैं। ठेकेदार की ओर से प्रस्तुत बिल पहले तकनीकी शाखा की ओर से सत्यापित किए जाते हैं और उसके बाद ही उनकी यूजर आईडी पर आते हैं। संबंधित बिल पालिका अभियंता की ओर से सत्यापित होने के बाद उनकी आईडी पर आया था, जिसे आगे लेखाकार और फिर रेजिडेंट ऑडिट अधिकारी के पास भेजा गया। ऑडिट के बाद ही नियम अनुसार भुगतान किया गया।
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