संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। धान कटाई के सीजन में धर्मनगरी की हवा की गुणवत्ता बिगड़ने लगी है। जिले में अभी तक पराली जलाने का कोई मामला सामने नहीं आया है, इसके बावजूद वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 167 तक पहुंच गया है। दशहरे के दिन एक्यूआई 183 दर्ज किया गया था। हवा में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है।
वहीं, कृषि विभाग ने पराली जलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए निगरानी बढ़ा दी है। फसल अवशेष प्रबंधन गतिविधियों में लापरवाही न हो, इसके लिए संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियां भी रद्द कर दी गई हैं। कृषि उपनिदेशक डॉ. गिरीश नागपाल ने बताया कि रविवार तक वायु गुणवत्ता में सुधार होने की संभावना है। उनके अनुसार, वीरवार को एक्यूआई 157, शुक्रवार को 162 और शनिवार को 152 रहने का अनुमान है जबकि रविवार को इसके 130 तक पहुंचने की संभावना है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ एवं जिला उप सिविल सर्जन डॉ. जगमहेंद्र मलिक ने कहा कि धान कटाई के सीजन और दशहरा-दिवाली जैसे त्योहारों के दौरान वायु गुणवत्ता अक्सर स्वास्थ्य के अनुकूल नहीं रहती। ऐसे में लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए और प्रदूषण अधिक होने पर अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचना चाहिए।
पराली प्रबंधन के लिए बढ़ाई निगरानी, छुट्टियां रद्द
जिले में पराली जलाने का कोई मामला सामने नहीं आने के बावजूद प्रशासन सतर्क है। कृषि विभाग ने फसल अवशेष प्रबंधन गतिविधियों की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं, ताकि धान कटाई के दौरान खेतों में निगरानी और जरूरी कार्रवाई प्रभावित न हो। डॉ. गिरीश नागपाल ने अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश दिए कि त्योहारों के दौरान भी वे अपने क्षेत्रों में पूरी सतर्कता के साथ ड्यूटी निभाएं। फील्ड स्टाफ गांवों का नियमित दौरा करे, किसानों को पराली प्रबंधन के प्रति जागरूक करे और संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखे।
पराली जलने की सूचना पर तुरंत पहुंचे टीम
डॉ. नागपाल ने निर्देश दिए कि पराली जलाने की सूचना मिलते ही संबंधित अधिकारी और कर्मचारी तुरंत मौके पर पहुंचकर नियमानुसार कार्रवाई करें। उन्होंने कहा कि पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ने के साथ लोगों के स्वास्थ्य, मिट्टी की उर्वरता और लाभकारी सूक्ष्मजीवों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। किसानों को पराली जलाने के बजाय सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, स्ट्रॉ चॉपर और बेलर जैसे कृषि यंत्रों की मदद से फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करना चाहिए।