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Kurukshetra News: चार दिन हरियाणवी खुशबू फैलाकर रत्नावली महोत्सव अगले साल के लिए विदा

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कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में चार दिनों तक हरियाणवी लोककलाओं के रंगों की खुशबू बिखेरने के बाद रत्नावली महोत्सव अगले साल फिर आने के वादे के साथ विदा हो गया। इन चार दिनों में हरियाणवी कला, बोली, लोकगीत, नृत्य, फैशन, हस्तशिल्प और लोक परंपराओं की प्रस्तुतियां देख युवाओं ने जहां संस्कृति पर गर्व महसूस किया, वहीं आधुनिकता के दबाव में विलुप्त हो रही लोक कलाओं को मंच पर जीवंत देख बुजुर्गों को विश्वास हो गया कि भविष्य सुरक्षित हाथों में है।
सांसद नवीन जिंदल और मुख्यमंत्री के ओएसडी डॉ. राज नेहरू समापन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस आयोजन में कैथल के आरके एसडी कॉलेज ओवरऑल विजेता किया गया घोषित, जबकि मेजबान कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय को दूसरा स्थान मिला है।
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34 विधाओं में करीब 3500 कलाकारों ने प्रस्तुति देकर नई ऊंचाइयों को छुआ और दर्शकों का दिल जीत लिया। इस दौरान रसिया नृत्य, चौपाल पर व्यंग्य और लोकचर्चा ने मन मोह लिया। मंचों पर लोकगीतों की मिठास, फैशन शो में हरियाणा की झलक, लोक इंस्ट्रूमेंटल की धुनें और समूह नृत्य में युवाओं की ऊर्जा ने हरियाणवी संस्कृति का भव्य चित्र पेश किया।

40 से अधिक स्टॉलों पर विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के विद्यार्थियों की ओर से स्वनिर्मित उत्पाद लगाए गए, जहां लाखों रुपये की बिक्री हुई। मेले ने युवाओं को आत्मनिर्भरता, उद्यमशीलता और कौशल विकास का वास्तविक अनुभव कराया।






हरियाणवी बोली को भाषा का दर्जा दिलाने का प्रयास प्रशंसनीय : नवीन जिंदल



रत्नावली के अंतिम दिन मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे सांसद नवीन जिंदल ने कहा कि पूरे देश मैं हरियाणा नै नंबर एक बणावैंगे। हरियाणवी बोलण, सुनण मैं जो मजा सै ओ और कोनी। उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की ओर से हरियाणवी बोली को भाषा का दर्जा दिलाने के प्रयास की खुलकर प्रशंसा की और कहा कि यह सांस्कृतिक विरासत को संजोने की दिशा में बड़ा कदम है। हस्तशिल्प मेले का दौरा कर छात्रों के प्रयासों की सराहना की और नगाड़ा बजाकर कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।







स्वावलंबी, आत्मनिर्भर भारत की नींव रत्नावली से : डॉ. राज नेहरू



समापन समारोह में सह मुख्यातिथि प्रदेश के मुख्यमंत्री के ओएसडी डॉ. राज नेहरू ने कहा कि रत्नावली सिर्फ सांस्कृतिक आयोजन नहीं बल्कि युवाओं की प्रतिभा, मेहनत और उद्यमशीलता का जीवंत मंच है। भारत में हुनर की कोई कमी नहीं, केवल सही मार्गदर्शन की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जो समाज अपनी भाषा और संस्कारों से दूर होता है, उसकी पहचान मिट जाती है।
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ऐसे आयोजन स्वदेशी की भावना को देते हैं मूर्तरूपः प्रो.सचदेवा



कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि यह आयोजन नई शिक्षा नीति के लक्ष्यों, इंटर्नशिप, कौशल विकास और स्वदेशी की भावना को मूर्त रूप देता है। युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग के निदेशक प्रो. विवेक चावला ने कहा कि रत्नावली ऐसा सांस्कृतिक पर्व है जिसका इंतजार प्रदेश के कलाकार पूरे वर्ष करते हैं। इस बार की थीम डिजिटल, ग्रीन और अनुशासनशील रत्नावली रही। इस मौके पर कुलसचिव डॉ. वीरेंद्र पाल, छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. एआर चौधरी सहित अन्य सदस्य एवं कलाकार मौजूद रहे।
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