कोरोना के चलते हुए लॉकडाउन के बाद आखिरकार सात माह बाद स्कूल खुले। स्कूलों में विद्यार्थियों को एंट्री उनके अभिभावकों से सहमती पत्र लेने के बाद दी गई। हालांकि कोरोना के भय के कारण पहले दिन तीन घंटे की क्लास लगाने मात्र 10 से 15 प्रतिशत विद्यार्थी ही स्कूल में आए। अगर बात करें निजी स्कूलों की तो अभी भी संचालकों द्वारा कई स्कूलों को खोला नहीं गया है और जो निजी स्कूल सोमवार को खुले उनमें सरकारी स्कूल के मुकाबले विद्यार्थी की संख्या न के बराबर ही रही।
सुबह-सुबह स्कूल में इस बार कोई प्रार्थना सभा नहीं हुई, विद्यार्थी सुबह नौ बजे सीधे अपने क्लास रूम में पहुंचे। कई दिनों बाद अपने शिक्षकों से रूबरू होकर कुछ विद्यार्थी तो भावुक हो गए और कइयों ने उनके साथ लॉकडाउन का अनुभव साझा किया। कई दिनों बाद सहपाठियों से मिलने पर लॉकडाउन के मुरझाए चेहरे भी फिर से खिल उठे। राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय थानेसर में पहले दिन कक्षा नौंवीं से लेकर बारहवीं तक के 1050 विद्यार्थियों में से मात्र 160 ही स्कूल पहुंचे।
छात्राओं से जाना लॉकडाउन का अनुुभव : प्राचार्या
राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय थानेसर की प्राचार्या रमा शर्मा ने कहा कि पहले दिन छात्राओं से लॉकडाउन के दौरान का अनुभव जाना गया। वहीं, कई छात्राओं की काउंसलिंग भी की गई। हालांकि स्कूल में 12 प्रतिशत छात्राएं ही आईं। कक्षा में प्रवेश से पूर्व सभी की थर्मल स्क्रीनिंग की गई और बिना मास्क किसी को प्रवेश नहीं करने दिया गया।
लॉकडाउन में शिक्षा हुई प्रभावित : कोमल
11वीं कक्षा की छात्रा कोमल ने बताया कि सात माह से वह घर बैठे पढ़ रही है। जिस कारण शिक्षा बहुत ज्यादा प्रभावित हुई। अब स्कूल खुले तो पहले दिन उसने शिक्षकों से मिलकर वह सब सवाल पूछे तो ऑनलाइन कक्षा में क्लीयर नहीं हो पाते थे।
दिवाली के बाद बढ़ेगी संख्या : डीईओ
जिला शिक्षा अधिकारी अरूण आश्री ने कहा कि पहले दिन बहुत कम विद्यार्थी स्कूलों में कक्षा लगाने के लिए पहुंचे। वहीं, निजी स्कूलों में यह आंकड़ा और भी ज्यादा कम रहा। बच्चों के स्कूल न आने का एक कारण इस समय चल रहे त्योहार भी हैं। आम दिनों में भी इन दिनों स्कूल में बच्चों की संख्या कर ही रहा करती थी। अब दिवाली के बाद स्कूलों में संख्या बढ़ने की संभावना है। वहीं बच्चों को इस बार शिक्षा के साथ-साथ कोरोना के प्रति भी शिक्षकों द्वारा जागरूक भी किया जा रहा है। बच्चों को कहा गया है कि वह खाना घर ही खाकर आएं स्कूल में लेकर न आए। स्कूल अच्छे से सैनिटाइज कर बच्चों के सुरक्षित कर दिए गए हैं।