कुरुक्षेत्र। स्वच्छता की दृष्टि से देश के ऑइकोनिक स्थलों में शुमार पवित्र ब्रह्मसरोवर की कायाकल्प होने वाली है। इसके दोनों घाटों पर परिक्रमा (फर्श ) के पत्थर बदले जाएंगे, जिसके बाद न केवल ब्रह्मसरोवर नए स्वरूप में दिखाई देने लगेगा बल्कि यहां श्रद्धालुओं व पर्यटकों को होने वाली परेशानी भी दूर होगी। पत्थर बदले जाने का यह कार्य करीब 40 साल बाद होगा, जिसके अगले कुछ माह में शुरू होने की उम्मीद है।
बताया जा रहा है कि 3600 फीट लंबे व 1500 फीट चौड़े ब्रह्मसरोवर के पूर्वी घाट के जीर्णोद्धार के साथ ही वर्ष 1975 में व पश्चिमी घाट के पत्थर 1985-86 में लगाए गए थे। यह लाल पत्थर लगाए जाने के बाद ब्रह्मसरोवर का फर्श बेहद आकर्षित करने लगा था तो ब्रह्मसरोवर को नया स्वरूप भी मिल गया था लेकिन पिछले कुछ वर्षों से यह फर्श टूटने लगा। हालांकि अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव व अन्य आयोजन के दौरान यहां टूटे पत्थरों को बदले जाने या फिर उन्हें ढांपने का कार्य किया जाता रहा। इसके बावजूद आज तक भी यहां श्रद्धालु टूटे पत्थरों के बीच परेशानी झेलते रहे तो विपक्ष भी इस मुद्दे को कई बार उठा चुका है। ऐसे में कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड ने अब घाटों के चारों ओर के फर्श को बदलने का निर्णय लिया है, जिसके लिए प्रस्ताव तैयार किया गया इसके पिछले माह राज्यपाल व मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में भी रखा गया, जिस दौरान इस पर सहमति जताई गई, इसके बाद केडीबी ने इस संबंध में अगली प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी कर ली है।
दो चरणों में पूरा होगा कार्य : सेतिया
केडीबी के सीईओ पंकज सेतिया का कहना है कि ब्रह्मसरोवर के दोनों घाटों के पत्थर बदले जाने का कार्य दो चरणों में पूरा किया जाएगा, जिस पर करीब 15 करोड़ खर्च का अनुमान है। मुख्यमंत्री सहमति जता चुके हैं और अब अगली प्रक्रिया शुरू की जाएगी जल्द डीपीआर तैयार कर ली जाएगी जबकि ड्रांइग को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
सदरियों में दो साल पहले ही बदला गया फर्श
केडीबी के सदस्य अशोक रोशा बताते हैं कि करीब दो साल पहले ब्रह्मसरोवर की सदरियों के अंदर का फर्श बदल दिया गया था। अब बाहर की ओर घाटों के चारों ओर के फर्श पर लगा पत्थर बदला जाना है। उन्होंने माना कि ये पत्थर गीता जयंती व अन्य आयोजन के दौरान वाहनों के प्रवेश के चलते ही टूटे हैं लेकिन आगे इस पर पूरी तरह से पाबंदी रखे जाने की योजना है ताकि नया फर्श भी क्षतिग्रस्त न हो। गीता महोत्सव के दौरान भी स्टॉल लगाने वाले लोगों व संस्थाओं को सामान लेकर आने वाली वाहनों को बाहर ही खड़ा करना होगा।
हर साल पहुंचते हैं लाखों लोग
पवित्र ब्रह्मसरोवर पर जहां हर रोज करीब आठ हजार श्रद्धालु व पर्यटक पहुंचते हैं तो अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव व सूर्य ग्रहण के दौरान यहां लाखों श्रद्धालु व पर्यटक आते हैं। माना जाता है कि ब्रह्मांड के निर्माता भगवान ब्रह्मा से यह सरोवर जुड़ा हुआ है। सूर्य ग्रहण के दौरान इस सरोवर में स्नान करना हजारों अश्वमेधा यज्ञों के बराबर माना जाता है। किंवदंतियों के अनुसार इस सरोवर की पहली बार कौरव और पांडवों के पूर्वजों राजा कुरु ने खोदाई की थी।