फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Haryana: धान के स्टॉक में गड़बड़ी पर एएफएसओ व इंस्पेक्टर सस्पेंड, अब मामला दर्ज करने की मांग

Thu, 11 Jun 2026 08:14 PM IST
शाहिल शर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, पिहोवा

सार

स्टॉक में कमी सामने आने के बाद डीएफएससी नरेश कुमार ने 20 मार्च को इंस्पेक्टर रिंकू जांगड़ा और एएफएसओ जसबीर सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी किया था।
विज्ञापन
निलंबित - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

नीमवाला स्थित एक राइस मिल में लगाए गए धान के स्टॉक में गड़बड़ी को लेकर खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के दो अधिकारियों को भारी पड़ गया। विभाग के एफएसओ जसबीर सिंह व इंस्पेक्टर रिंकू को सस्पेंड कर दिया गया है। इससे पहले सस्पेंड होने वाले इंस्पेक्टर की शिकायत पर ही एक अन्य राइस मिल के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज कराया गया था। अब कार्रवाई से विभाग में खलबली मची हुई है। वहीं, अब सस्पेंड किए गए दोनों अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज करने व उन्हें नौकरी से पूरी तरह हटाए जाने के अलावा मामले की और भी गहनता से जांच की मांग भाकियू ने उठाई है। इसके लिए एक प्रतिनिधिमंडल ने खाद्य एवं पूर्ति मंत्री राजेश नागर से मुलाकात भी की।

विज्ञापन


विभाग के अधिकारियों के मुताबिक पीवी के दौरान स्टॉक में 24,318.75 क्विंटल धान कम मिला था, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 5.81 लाख थी। पिछले सीजन में विभाग की ओर से चौधरी राइस मिल को कस्टम मिलिंग के लिए करीब 39 हजार क्विंटल धान दिया था। सीएमआर की आपूर्ति मिलर को भारतीय खाद्य निगम को करनी थी। 25 नवंबर को विभागीय टीम ने मिल की फिजीकल वैरिफिकेशन की थी। उस समय रिकॉर्ड और स्टॉक में कोई कमी नहीं पाई गई थी लेकिन इसी वर्ष 17 मार्च को डीएफएससी कार्यालय के निर्देश पर एएफएसओ शाहाबाद राजीव सैनी और आईएफएस गौरव अरोड़ा की टीम ने दोबारा जांच की तो करीब 24 हजार क्विंटल धान कम मिला।

विज्ञापन

जांच रिपोर्ट के बाद डीएफएससी कार्यालय के आदेश पर पिहोवा इंचार्ज इंस्पेक्टर रिंकू जांगड़ा ने 17 मार्च को चौधरी राइस मिल के खिलाफ केस दर्ज कराया था। हालांकि बाद में विभागीय जांच में सवाल उठे कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में धान गायब होने का पहले क्यों नहीं पता चल सका। विभागीय नियमों के अनुसार कस्टम मिलिंग के लिए दिए गए धान स्टॉक की निगरानी संबंधित इंचार्ज अधिकारी की जिम्मेदारी होती है। इसके तहत हर 15 दिन में स्टॉक की फिजिकल वेरिफिकेशन कर रिपोर्ट विभाग को भेजनी होती है लेकिन बताया जा रहा है कि चौधरी राइस मिल के मामले में यह पाक्षिक रिपोर्ट नियमित रूप से जमा नहीं कराई गई।

स्टॉक में कमी सामने आने के बाद डीएफएससी नरेश कुमार ने 20 मार्च को इंस्पेक्टर रिंकू जांगड़ा और एएफएसओ जसबीर सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। नोटिस में पूछा गया कि निर्धारित समय पर फिजिकल वेरिफिकेशन रिपोर्ट क्यों जमा नहीं कराई गई। इसके बाद दो अप्रैल को डीएफएससी ने दोनों अधिकारियों के खिलाफ विभाग के डायरेक्टर को शिकायत भेजी गई। उधर जसबीर सिंह व रिंकू जांगड़ा का कहना है कि समय पर पूरी जांच की तो रिपोर्ट भी समय पर दे दी गई थी।

दोनों अधिकारियों ने सरकार को किया नौ करोड़ का नुकसान : वड़ैच

भाकियू पिहोवा के प्रवक्ता प्रिंस वड़ैच का कहना है कि दोनों अधिकारियों के सस्पेंड कर देने के साथ उन पर मामला भी दर्ज होना चाहिए। इसके लिए वे अपने प्रयास जारी रखेंगे। उन्होंने बताया कि वे एक दिन पहले ही खाद्य एवं पूर्ति मंत्री राजेश नागर से मिले थे और पूरे मामले से अवगत कराया था, जिस पर यह कार्रवाई की गई है। उन्होंने बताया कि उक्त दोनों अधिकारियों ने फर्जी गेट पास तैयार कर सरकार को करीब नौ करोड़ का नुकसान किया है। दोनों अधिकारियों को नौकरी से बर्खास्त करने व मामला दर्ज करने की मांग भी वीरवार को मंत्री से मिलकर की है, जिस पर भरोसा मिला है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें