कुरुक्षेत्र। जिलेभर के कॉलेजों में दाखिलों के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रकिया शुरु हो चुकी हैं। विद्यार्थी विभिन्न पाठ्यक्रमों में 25 जून तक आवेदन कर सकते हैं। कॉलेजों में भी विद्यार्थियों को विषय व कोर्सों की जानकारी देने के लिए हेल्प डेस्क लगाए गए हैं। जहां पर रोजाना विद्यार्थी पहुंचकर पसंदीदा विषयों के बारे में जानकारी ले रहे हैं।
राजकीय कन्या महाविद्यालय पलवल में यूजी कोर्सों में 640 सीटों पर दाखिला के लिए आवेदन शुरु हो गए हैं। प्राचार्य ने बताया कि बीए में 320, बीकॉम में 160, बीएससी में 100 और बीसीए में 60 सीटों पर छात्राएं आवेदन कर सकती हैं। कॉलेज परिसर में छात्राओं को शिक्षा के साथ-साथ अन्य गतिविधियां भी कराई जाती हैं ताकि मानसिक तौर पर विद्यार्थी स्वस्थ रहकर अच्छे माहौल में शिक्षा ले सकें।
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सावधानी पूर्वक विषयों का चयन करें विद्यार्थी : डॉ. गगनदीप
प्रधानाचार्य डॉ. गगनदीप कौर का कहना है कि यूजी कोर्सों में दाखिले के लिए ऑनलाइन आवेदन शुरु हो चुके हैं। वेबसाइट पर फॉर्म भरने के लिए स्टेप टू स्टेप कॉलम दिए गए हैं, जिन्हें सावधानीपूर्वक चेक करके विद्यार्थी जानकारी भरें ताकि किसी तरह की कोई गलती न हो जाए। विद्यार्थियों के लिए कॉलेज में भी फॉर्म भरने की सुविधा रखी गई है तथा हेल्प डेस्क लगाया गया है। वे किसी भी विषय कोर्स की जानकारी लेकर अपने भविष्य को देखते हुए विषयों का चयन करें और ध्यान से अपना आवेदन पत्र भरें।
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संस्कृत विषय पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए अपार संभावनाएं
भगवान परशुराम महाविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुरेश कुमार ने बताया कि संस्कृत के क्षेत्र में शिक्षा ग्रहण करने वाले विद्यार्थियों के कार्यक्षेत्र में अपार संभावनाएं है। संस्कृत में उच्च शिक्षा तक का सफर तय करने के लिए 10वीं कक्षा में संस्कृत विषय होना आवश्यक है, जिसके बाद विद्यार्थी बीए में संस्कृत विषय लेकर और बीएड करने के पश्चात शिक्षक के तौर पर सेवाएं निभा सकता है और संस्कृत विषय में एमए कर नेट क्वालिफाई कर विद्यार्थी कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर पर प्रोफेसर के तौर पर अपनी सेवाएं दे सकता है और इसके बाद पीएचडी भी कर सकता है। इसी के साथ कर्मकांड में शिक्षा ग्रहण कर कर्मकांड के क्षेत्र में कार्य कर सकते हैं और सेना में भी एजुकेशन हवलदार के पद पर नियुक्ति प्राप्त कर सकते हैं। विद्यार्थी अपने रुझान के मुताबिक ज्योतिष-शास्त्र तथा आयुर्वेद की पारंपरिक विधा व योग-साधना के क्षेत्र में भी कार्य कर सकता है। इसी के साथ संस्कृत की अनेक विधाओं में शिक्षित होकर उन्हें आजीविका के रूप चुन सकता है।