कुरुक्षेत्र। राधा अष्टमी पर रंग बिरंगी रोशनी से चमकता गीता ज्ञान संस्थानम । विज्ञप्ति
कुरुक्षेत्र। गीता ज्ञान संस्थानम में राधाष्टमी और श्री कृपा बिहारी जी का वार्षिक पाटोत्सव गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद के सानिध्य में श्रद्धा से मनाया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने राधा जी को पालने में झुलाया। लाड़ली जी का अभिषेक किया गया और गीता पाठ भी किया।
राधा और कृष्ण भाव के भजनों से सारा वातावरण भक्तिमय हो गया। राधा भाव के भजनों पर श्रद्धालु विशेषकर महिलाएं जमकर झूमीं। श्रद्धालुओं ने श्री कृपा बिहारी जी के दर्शन किए और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
स्वामी ज्ञानानंद ने अपने आशीर्वचन में कहा कि राधा करुणा और निष्काम प्रेम का अवतार है। भाद्रपद का महीना बड़ा ही पवित्र महीना है। जहां कृष्ण पक्ष की अष्टमी को भगवान श्री कृष्ण का अवतार हुआ, वहीं शुक्ल पक्ष की अष्टमी को राधा जी का अवतरण हुआ। राधा करुणामयी सरकार दिव्य प्रेम का स्वरूप है। इसीलिए ब्रज में राधा नाम से ब्रजधरा को प्रेम धरा कहा जाता है। राधा जी का अवतार कान्हा के अवतार से 350 दिन पहले हुआ। उन्होंने कहा कि इस धरा पर करुणा और प्रेम पहले आया उसके बाद कान्हा के रूप में आनंद अवतरित हुआ।
स्वामी ज्ञानानंद ने कहा कि राधाष्टमी के दिन ही गीता ज्ञान संस्थानम में श्री कृपा बिहारी जी की प्राण प्रतिष्ठा हुई थी। इसलिए राधाष्टमी के दिन कृपा बिहारी जी का पाटोत्सव भी धूमधाम से मनाया जाता है।