कुरुक्षेत्र। धर्मनगरी में पहली बार शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के उपलक्ष्य में ब्रह्मसरोवर के उत्तरी द्वार से शुरू हुई गीता सद्भावना यात्रा ने आध्यात्मिकता और भारतीय संस्कृति का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के इंतजार के बाद स्वामी ज्ञानानंद ने मंत्रोच्चारण के साथ हरी झंडी दिखाकर यात्रा को रवाना किया और कहा कि कुरुक्षेत्र की सभी धार्मिक-सामाजिक संस्थाएं और संतजन सद्भाव, भारतीयता और सनातन गौरव का संदेश लेकर एकजुट हुए हैं।
उन्होंने कहा कि श्रीमद्भगवद गीता वह विश्व का एकमात्र ग्रंथ है जिसकी जयंती अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाई जाती है। यह यात्रा अनेक संस्थाओं के सौजन्य से नागरिकों तक राष्ट्रीयता, भारतीय संस्कृति और गीता के सार्थक संदेश को पहुंचा रही है। यात्रा में गौ-भावना और संतजनों का शुभ आशीर्वाद भी शामिल रहा।
यात्रा का सबसे बड़ा आकर्षण पवित्र गीता पालकी रही जिसे देखने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। इसके साथ ही भव्य रथ और कई थीम पर आधारित झांकियों ने यात्रा की शोभा बढ़ाई। विशेष रूप से मां काली, श्रीकृष्ण-राधा, भगवान राम, हनुमान जी और अन्य धार्मिक प्रसंगों की झांकियां भक्तों के आकर्षण का केंद्र रहीं और पूरे मार्ग में भक्ति का वातावरण बनाती रहीं।
सद्भावना यात्रा ब्रह्मसरोवर से शुरू होकर गीता स्थली ज्योतिसर, पिपली, सेक्टर-पांच, सेक्टर-सात, सेक्टर-13 से होते हुए पुनः ब्रह्मसरोवर पर संपन्न हुई। पूरे मार्ग में संस्थाओं, संगठनों और श्रद्धालुओं ने यात्रा का जोश और उत्साह के साथ स्वागत किया। स्वामी ज्ञानानंद ने कहा कि यह यात्रा गीता जयंती उत्सव के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बनी है और सभी के सामूहिक प्रयासों से यात्रा ने अपनी अनूठी छाप छोड़ी है। इस मौके पर पूर्व राज्य मंत्री सुभाष सुधा, कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के मानद सचिव उपेंद्र सिंघल, केडीबी के सीईओ पंकज सेतिया सहित अन्य धार्मिक, सामाजिक संस्थाओं सहित संत मौजूद रहे।
कुरुक्षेत्र। सद्भावना यात्र को हरी झंडी दिखा रवाना करने के दौरान स्वामी ज्ञानानंद। संवाद- फोटो : mathura
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कुरुक्षेत्र। सद्भावना यात्र को हरी झंडी दिखा रवाना करने के दौरान स्वामी ज्ञानानंद। संवाद- फोटो : mathura
कुरुक्षेत्र। सद्भावना यात्र को हरी झंडी दिखा रवाना करने के दौरान स्वामी ज्ञानानंद। संवाद- फोटो : mathura
कुरुक्षेत्र। सद्भावना यात्र को हरी झंडी दिखा रवाना करने के दौरान स्वामी ज्ञानानंद। संवाद- फोटो : mathura