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Kurukshetra News: कला कीर्ति भवन में हरियाणवी सांग संरक्षण के लिए हुई प्रदेश स्तरीय बैठक

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कुरुक्षेत्र।  कला कीर्ति भवन में  सांग कलाकारों के साथ चर्चा करते  निदेशक नागेंद्र शर्मा । संवा
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कुरुक्षेत्र। सांग लोक नाट्य की एक महत्वपूर्ण विधा है, जो भारत के विभिन्न हिस्सों में लोकप्रिय है। मध्यप्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश के साथ-साथ हरियाणा में सांग का अत्यधिक प्रचलन है लेकिन वर्तमान में सांग विधा लुप्त होने की कगार पर खड़ी नजर आ रही है। युवा पाश्चात्य संस्कृति की ओर अग्रसर होने के कारण लोक संस्कृति से अनभिज्ञ है, जिसके कारण सांग विधा में युवा पीढ़ी रुचि नहीं लेती।
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ऐसे में सांग के संरक्षण और संवर्धन के लिए हरियाणा कला परिषद द्वारा कुरुक्षेत्र के कला कीर्ति भवन में प्रदेश स्तरीय बैठक का आयोजन वीरवार को किया गया, जिसमें प्रदेश के विभिन्न सांगियों ने हिस्सा लिया। हरियाणा कला परिषद के निदेशक नागेंद्र शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में सांग कलाकारों ने सांग विधा को बचाने तथा युवा पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए अपने-अपने विचार रखे। बैठक में चर्चा की गई कि सांग विधा को बचाने के लिए प्रदेश के विभिन्न विद्यालयों, महाविद्यालयों तथा विश्वविद्यालयों में सांग की कार्यशालाएं आयोजित की जाएं, जिससे युवा वर्ग को सांग से जुड़ने का अवसर प्राप्त हो। इसके अलावा गुरु शिष्य परंपरा प्रारंभ की जाए, जिससे सांग कलाकार, संगीतज्ञों तथा अन्य कलाकारों के साथ-साथ सीखने वाले कलाकार को भी आजीविका का साधन मिल सके। नागेंद्र शर्मा ने आश्वासन दिया कि हरियाणा कला परिषद के माध्यम से गुरु-शिष्य परंपरा प्रारंभ करने के लिए मुख्यमंत्री तथा हरियाणा कला परिषद के अध्यक्ष को निवेदन किया जाएगा।
नागेंद्र शर्मा ने सांग दिवस पर विचार करने की मांग रखी। इस पर सांग कलाकारों ने सहमति जताते हुए कहा कि हरियाणा में दादा शंकर दास की प्रणाली के सांगी हैं। इसलिए दादा शंकर दास की जयंती अथवा पुण्यतिथि को सांग दिवस घोषित कर देना चाहिए। जिस पर सहमति प्रकट करते हुए उन्होंने जल्द ही इस सुझाव पर विचार कर सांग उत्सव का आयोजन करने का आश्वासन दिया।
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साल के 365 दिन सांग कलाकारों को मिलेगा काम

नागेंद्र शर्मा ने कहा कि प्रदेश सरकार के सहयोग से हरियाणा कला परिषद नियम बनाएगी, जिसमें साल के 365 दिन प्रदेश में सांग कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। सूर्य कवि पंडित लख्मीचंद के पौत्र विष्णु दत्त सांगी ने अपने विचार रखते हुए कहा कि सांग विधा से अश्लीलता को भी दूर करना चाहिए। कुछ सांग कलाकार लोगों के मनोरंजन को ध्यान में रखते हुए मर्यादा को खो देते हैं तथा अश्लील नृत्य करवाना प्रारंभ कर देते हैं। ऐसे में प्रत्येक सांग कलाकार को प्रण करना चाहिए कि अपने सांग में अश्लीलता का कोई स्थान न हो। वहीं हिसार से धर्मबीर सांगी ने कहा कि सांग कलाकार आजीवन सांग विधा के प्रचार-प्रसार में लगे रहते हैं। लेकिन संस्कृति बचाने के लिए उन्हें कोई मान-सम्मान नहीं मिलता। ऐसे में प्रदेश सरकार सांग कलाकारों तथा अन्य साजिंदों व नृतकों आदि को न केवल सम्मानित भी करें, बल्कि बुढ़ापा पेंशन की तरह कलाकारों की पेंशन भी प्रारंभ करें। इसी के साथ अन्य कलाकारों ने अपने विचार रखे।
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