संवाद न्यूज एजेंसी
लाडवा। यूक्रेन से वतन लौटने के बाद छात्रों को अपनी पढ़ाई की फिक्र हो रही है। युद्ध के बीच भारत सरकार यूक्रेन से अपने नागरिकों को निकालने के लिए प्रयासरत है, मगर अभी भी सैकड़ों छात्र यूक्रेन में फंसे हुए हैं। वीआईपी कॉलोनी की छात्रा मुस्कान चार दिन बाद देर शाम वतन लौटी। मुस्कान का पूरी गर्मजोशी के साथ कॉलोनी तथा परिवार के लोगों ने ढोल-नगाड़ों के साथ फूल माला पहनाकर स्वागत किया।
यूक्रेन से लौटी मुस्कान ने कहा कि वह ढाई साल पहले यूक्रेन (खारकीव) एमबीबीएस करने गई थी। भयंकर युद्ध के कारण सब लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए हिदायत दी थी। उन्होंने भी खारकीव छोड़ने और ट्रेन के रास्ते बॉर्डर पहुंचने का निर्णय लिया। खारकीव से रेलवे स्टेशन की दूरी 10 किलोमीटर थी। रास्ते का मंजर बड़ा ही भयावह था।
20 घंटे का सफर तय करने के बाद खारकीव से लवीव शहर पहुंचे, जहां पर कर्फ्यू लगा हुआ था। लवीव शहर से पोलैंड बॉर्डर पहुंचे। यहां भारत सरकार के मंत्री वीके सिंह ने उनको रिसीव किया और सभी भारतीयों की हर संभव मदद की। कॉलोनी के लोगों ने गुलाल, फूल मालाओं व ढोल-नगाड़ों के साथ मुस्कान का कॉलोनी में पहुंचने पर जोरदार स्वागत किया। इस मौके पर परिवार के सदस्यों सहित राजेश गर्ग, शिखा गर्ग, निर्मल खुराना सहित अन्य मौजूद रहे।
मुस्कान की मां काजल ने कहा कि मुस्कान मेडिकल की पढ़ाई करने के लिए ढाई साल पहले खारकीव गई थी। युद्ध चलने के कारण उसको पढ़ाई बीच में ही छोड़ कर वापस आना पड़ा। अब तो सरकार के हाथ में ही है कि जिन बच्चों का भविष्य मेडिकल को लेकर अधर में लटक गया है उनके लिए सरकार क्या करती है।