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एलएनजेपी में टूटे शीशे, बिजली के खुले तार देख भड़के अमित झा, डीजी और सीएमओ को फटकारा

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एलएनजेपी में टूटे शीशे, बिजली के खुले तार देख भड़के अमित झा, डीजी और सीएमओ को फटकारा
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अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। लोकनायक जयप्रकाश सिविल अस्पताल के भवन से लेकर हर व्यवस्था बदहाल है। न व्यवस्थित रूप से अधिकारियों के कार्यालय हैं, न पार्किंग है। भवन के शीशे टूटे हुए हैं, बिजली के तार कभी भी हादसे का सबब बन सकते हैं। अस्पताल परिसर में सफाई व्यवस्था भी दम तोड़ चुकी है। कंडम वाहन अस्पताल की सुंदरता को ग्रहण लगा रहे हैं। इन हालात को देख सोमवार को अस्पताल के निरीक्षण पर आए स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव अमित झा भड़क उठे। उन्होंने अपने करीब पौन घंटे तक निरीक्षण के दौरान विभाग के महानिदेशक सतीश अग्रवाल से लेकर सीएमओ तक सभी अधिकारियों को जमकर फटकारा। कहा कि कुरुक्षेत्र का सिविल अस्पताल प्रदेश में सबसे अधिक बदहाल है। उन्हें ऐसे ही हालात की उम्मीद थी।
प्रधान सचिव ने सबसे पहले अस्पताल परिसर में बन रहे नए भवन के निर्माण और उसके नक्शे को देखा। इसके बाद उन्होंने अस्पताल का निरीक्षण शुरू किया तो विभाग के अधिकारियों के पसीने छूटने लगे। वह अस्पताल के बाहर ही अव्यवस्थित पार्किंग, बदहाल पार्क और सड़कें देख नाराज हो गए। अस्पताल के मुख्य भवन में लटकते तार, बंद पड़े कई दरवाजों और शीशों पर जमी धूल देखकर उनका पारा हाई हो गया। वह क्षय रोग केंद्र की बाहरी दशा देखकर आपे से बहार हो गए। उन्होंने तत्काल ही सीएमओ से पूछा कि केंद्र के भवन पर कब पेंट करवाया गया तो सीएमओ जवाब नहीं दे पाए।
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इसी बीच विभाग के महानिदेशक सफाई देने लगे तो प्रधान सचिव ने उनसे स्पष्ट पूछ लिया कि आप यहां निरीक्षण करने आते हैं तो क्या करके जाते हैं। यहां लगता ही नहीं कि कोई निरीक्षण होता है। यहां कुछ भी सही नहीं है। इस दौरान उन्होंने क्षय रोग केंद्र से लेकर विभाग के कई प्रकार के बजट के बारे में सीएमओ से जानकारी मांगी, लेकिन वह नहीं दे पाए। न ही कोई स्पष्ट जवाब विभाग के महानिदेशक से मिला। बाद में उन्होंने कहा कि पुराने एलएनजेपी अस्पताल नए लुक में नजर आना चाहिए। इसके लिए एलएनजेपी अस्पताल की इमारत के साथ जिला क्षय एवं कुष्ठ रोग केंद्र मरम्मत का प्रस्ताव तैयार करें। एलएनजेपी अस्पताल के प्रवेश और बाहर जाने के दरवाजे को खोला जाए और इमारत के प्रवेश द्वार को भी खुला रखा जाए।

निरीक्षण के दौरान उन्होंने एलएनजेपी के अंदर बने सभी केबिन और परिसर में खड़े कंडम वाहनों को हटाने के आदेश दिए। इस दौरान प्रधान सचिव ने स्वास्थ्य विभाग व लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों से नए अस्पताल में बनाए जाने वाले तमाम कक्षों ओपीडी, आईपीडी, ऑपरेशन थियेटर, रसोई घर, कैंटीन, सेंट्रल एसी प्रोजेक्ट, गैस लाइन, डॉक्टरों और नर्सों के कक्ष के साथ आपातकालीन वार्ड आदि की जानकारी हासिल की। उन्होंने कहा कि अस्पताल में कैथ लैब का प्रावधान होना जरूरी है। पार्किंग की व्यवस्था के भी पुख्ता इंतजाम किए जाने हैं, चिकित्सकों के रहने के लिए नए आवास बनाए जाने का प्रावधान करना जरूरी है। इसके लिए प्रस्ताव तैयार करके सरकार के पास भेजा जाए। उन्होंने लोक निमार्ण विभाग के अधिकारियों को आदेश दिए कि अस्पताल का निर्माण दिसंबर 2018 तक पूरा होना चाहिए। इसलिए कार्य को तेजी के साथ पूरा किया जाए। इस परियोजना पर राज्य सरकार 39 करोड़ 44 लाख का बजट खर्च कर रही है। सिविल वर्क के लिए 14 करोड़ 20 लाख का प्रावधान है।
10 दिन में भेज दिया जाएगा प्रपोजल : डीसी
उपायुक्त सुमेधा कटारिया ने कहा कि अस्पताल के प्रोजेक्ट को लेकर स्वास्थ्य और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों से चर्चा करने के बाद 10 दिनों में प्रपोजल सरकार के पास भेज दिया जाएगा। इस मौके पर सीएमओ डॉ. एसके नैन, लोक निर्माण विभाग के एसई एसपी सरोहा, कार्यकारी अभियंता जेपी कंबोज, डिप्टी सीएमओ एनपी सिंह, डॉ. एस अरोड़ा आदि मौजूद थे।
अंबाला की तर्ज पर मरीजों को उपलब्ध करवाई जाए डाईट
प्रधान सचिव अमित झा ने एलएनजेपी अस्पताल में खाने की व्यवस्था के इंतजामों को देखकर अधिकारियों को अंबाला अस्पताल की तर्ज पर डाइट उपलब्ध कराने के निर्देश स्थानीय अधिकारियों को दिए। कहा कि अस्पताल में अच्छी कैंटीन और अच्छी रसोई का निर्माण होना चाहिए। प्रधान सचिव ने स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक को आदेश दिए कि मरीजों की सुविधाओं को देखते हुए एलएनजेपी अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग में लिफ्ट का प्रावधान किया जाए।
डीईआईसी कक्ष को ग्राउंड लेवल पर शिफ्ट करने के आदेश
मरीजों की सुविधाओं को जहन में रखते हुए प्रधान सचिव ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को शीघ्र एलएनजेपी के तीसरी मंजिल पर स्थित डीईआईसी कक्ष को ग्राउंड लेवल पर शिफ्ट करने के आदेश दिए। प्रधान सचिव ने स्वास्थ्य विभाग और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को आदेश दिए कि एलएनजेपी अस्पताल के प्रवेश और बाहर जाने वाले द्वार को खुला रखा जाए। साथ ही आपातकालीन कक्ष को भी खुला रखा जाए। इसके आगे से पार्क हटवाया जाए। इतना ही नहीं स्पताल में कोई भी तार खुले नजर न आएं। यह कार्य एक सप्ताह में शुरू कर दें।

स्ट्रेचर पर भी बिछाई चदरें नहीं आई काम
प्रधान सचिव और महानिदेशक के निरीक्षण के चलते विभाग के अधिकारियों ने सफाई दिखाने का प्रयास किया। इसके चलते अस्पताल के मुख्य द्वार के बाहर ही रखीं तीन स्ट्रेचर पर धुली हुई हरी चादरें बिछाई गई थीं, लेकिन प्रधान सचिव ने इनकी ओर ध्यान नहीं दिया।
महानिदेशक निकलने लगे तो पहुंच गए प्रधान सचिव
अस्पताल परिसर में पहले विभाग के महानिदेशक पहुंचे और उन्होंने निर्माणधीन भवन के साथ पुराने भवन का जायजा लिया। आधा घंटे से अधिक समय तक निरीक्षण के बाद वे अधिकारियों को निर्देश देकर जाने लगे तो तभी प्रधान सचिव भी निरीक्षण पर पहुंच गए। उन्हें देख अधिकारियों में खलबली सी मच गई। प्रधान सचिव ने अपने निरीक्षण में जितनी खामियां गिनवाई, उन्हें जान महानिदेशक भी अचंभित रह गए।
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चेहरा नहीं, काम देखना है
सीएमओ डॉ. एसके नैन ने जब प्रधान सचिव को कहा कि वे पूरा प्रपोजल लेकर मुख्यालय पहुंच जाएंगे। इस पर प्रधान सचिव ने कड़े तेवर दिखाते हुए कहा कि उनका चेहरा नहीं काम देखना है। वहां आने की जरूरत नहीं, काम करिए।
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