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मंच पर दिखी विरह और प्रेम की झलक

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मंच पर दिखी विरह और प्रेम की झलक
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अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
चार कहानियां, तीन कलाकार, दो लेखक और एक निर्देशक के आपसी सामंजस्य के कारण मैक की भरतमुनि रंगशाला में दर्शक विरह और प्रेम के अलग-अलग अनुभवों से आत्मसात हुए। मौका था हरियाणा कला परिषद् मल्टी आर्ट कल्चरल सेंटर की साप्ताहिक संध्या का। कार्यक्रम के दौरान चंडीगढ़ के अभिनेत नाट्य संस्था के कलाकारों ने साहित्य अकादमी अवार्डी विजय कपूर के निर्देशन में नाटक मंच किया। डॉ. कैलाश आहलूवालिया और विजय कपूर के लेखन से सजी चार कहानियां पंखों वाली चीटियां, विस्थापित, पानी ही पानी और सोर्से माच्च में रिश्तों में आई दरारों के साथ ही संबंधों की खटास को पेश किया गया। मंच संचालन विकास शर्मा ने किया।
पहली कहानी पंखों वाली चीटियां एक प्रेमी और प्रेमिका के बीच के मधुर संबंध में आए एकाएक विच्छेद को बयां कर गई। विस्थापित कहानी में मां से दूर बेटे की दिनचर्या और अकेलापन को कलाकारों ने बेहतरीन तरीके से पेश किया। इसमें कलाकारों के अभिनय ने दर्शकों को भावुक कर दिया। दोनों कहानियों में अभिनय कर रहे गौरव आहुजा ने बड़े ही सहज भाव से प्रेमी और पुत्र के पात्र को निभाया। मां के किरदार में डॉ. मीना शर्मा और प्रेमिका के किरदार में बबीता कपूर ने जीवंत अभिनय किया। पंखों वाली चीटियां में जब नायिका गुनगुनाती हुई मंच पर प्रवेश करती तो दर्शकदीर्घा में बैठे लोग यकीन नहीं कर सके कि गीत वास्तव में गाया जा रहा है यह बजाया जा रहा है।
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तीसरी कहानी पानी ही पानी में राजस्थान के रेगिस्तान में पानी की कमी को दिखाते हुए मां और बेटे के बीच के संवादों को बड़ी ही मार्मिकता के साथ पेश किया गया। अंतिम कहानी सोर्से माच्च रही। यह एक बंगाली डिश है, जिसका हिंदी में अर्थ सरसों के तेल में पकी मछली है। इस कहानी में एक बैंकर और ग्राहक के बीच में अंकुरित हो रहे प्रेम के बीज को बड़े ही रोमांचक ढंग से प्रस्तुत किया गया। कस्टमर जो बैंक अधिकारी को पंसद करता है, उससे बात करने और मिलने के लिए आए दिन बैंक पहुंच जाता है। वहां जब उसे पता चलता है कि बैंक अधिकारी बंगाली महिला है तो उसे अपनी पसंद-नापसंद बताना शुरू कर देता है। हास्य के रंग में डूबी कहानी में अंत में नायिका सोर्से माच्च खाने के लिए नायक को घर पर आमंत्रित कर लेती है।
इस प्रकार चारों कहानियां एक दूसरे से जुड़कर दर्शकों का मनोरंजन करने में कामयाब रहीं। प्रत्येक कहानी मंचन के बीच के अंतराल को संचालक विकास शर्मा ने कहानी की पूर्व जानकारी देकर भरा। कार्यक्रम के अंत में कुवि के पूर्व रजिस्ट्रार डीएम ग्रोवर और पंजाब नेशनल बैंक के पूर्व प्रबंधक रमेश सुखिजा ने नाटक निर्देशक को श्रीफल भेंटकर सम्मानित किया।
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मणिपुर के कलाकारों ने देखी चित्रकला प्रदर्शनी
हरियाणा कला परिषद् और यूनिक सोसायटी ऑफ आर्टिस्ट पंचकूला के संयुक्त तत्वावधान में मैक की कलादीर्घा में तीन दिवसीय चित्रकला प्रदर्शनी आयोजित की गई है। पंचकूला के लगभग 20 से अधिक चित्रकारों के चित्रों का शहर के निवासी अवलोकन कर रहे हैं। गत दिवस मणिपुर, दिल्ली, उत्तर प्रदेश के कलाकारों ने चित्रकला प्रदर्शनी का अवलोकन किया। मणिपुर से आए रंगकर्मी जॉय मैनसम ने बताया कि एक कलाकार अपने मन में चल रहे अंतर द्वंद्व को अपनी तुलिका के माध्यम से उकेरता है। चित्रों को समझ पाना सबके सामर्थ्य में नहीं होता, केवल कला का पारखी और कला का कद्रदान ही चित्रकार के मन के भावों को समझ सकता है।
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