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90 प्रतिशत रोग प्राकृतिक तरीके से किए जा सकते हैं ठीक : डाॅ. धर्मेंद्र

Wed, 19 Nov 2025 11:46 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
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कुरुक्षेत्र। प्रतिभागियों को संबो​धित करते मुख्याति​थि। स्वयं
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कुरुक्षेत्र। श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय में प्राकृतिक चिकित्सा दिवस के अवसर पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें प्राकृतिक चिकित्सा के सिद्धांतों और जीवनशैली आधारित उपचार की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा हुई। कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि आयुष विश्वविद्यालय के कार्यकारिणी परिषद सदस्य डॉ. धर्मेंद्र वशिष्ठ और विशिष्ट अतिथि स्वामी श्रद्धानंद आयुर्वेद एवं प्राकृतिक चिकित्सालय, गुरुकुल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. देव आनंद रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान ने की।
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मुख्य अतिथि डॉ. धर्मेंद्र वशिष्ठ ने कहा कि मानव शरीर पांच तत्वों से निर्मित है और इनसे दूर होना बीमारी का कारण बन रहा है। आधुनिक जीवनशैली ने मनुष्य को प्रकृति से दूर कर दिया है। देर रात भोजन को उन्होंने अपनी मौत को निमंत्रण देने जैसा बताते हुए कहा कि 90 प्रतिशत रोग प्राकृतिक तरीके से ठीक किए जा सकते हैं। उन्होंने महात्मा गांधी की प्रतिपादित प्राकृतिक चिकित्सा की अवधारणाओं सूर्य चिकित्सा, मिट्टी चिकित्सा, जल चिकित्सा, उपवास और आहार चिकित्सा को स्वास्थ्य की मजबूत आधारशिला बताया। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि हर आठवीं महिला थायराइड और पीसीओडी से पीड़ित है तथा भारत तेजी से मधुमेह का केंद्र बन रहा है। उन्होंने कहा कि केवल फीकी चाय से शुगर नियंत्रित नहीं होती, बल्कि भोजन और जीवनशैली में सुधार अनिवार्य है।

विशिष्ट अतिथि डॉ. देव आनंद ने कहा कि रोगी को रोगी नहीं बल्कि स्वास्थ्य साधक कहा जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि गुरुकुल कुरुक्षेत्र में देश-विदेश से लोग प्राकृतिक चिकित्सा का लाभ लेने आते हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर अभी जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। प्राकृतिक चिकित्सा दवा नहीं, बल्कि जीवनशैली आधारित उपचार है, जिसके परिणाम स्थायी होते हैं। संगोष्ठी में कुलसचिव प्रो. ब्रिजेंद्र सिंह तोमर, प्राचार्य प्रो. आशीष मेहता, चिकित्सा अधीक्षक प्रो. राजा सिंगला, डॉ. चक्रपाणि आर्य सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।
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आयुर्वेद का आधार प्राकृतिक चिकित्सा : प्रो. धीमान
कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान ने कहा कि आयुर्वेद का बड़ा आधार प्राकृतिक चिकित्सा है। विद्यार्थियों को प्राकृतिक आहार और जीवनशैली अपनाने की सलाह देते हुए कहा कि श्रेष्ठ चिकित्सक वही है जो दवाइयों से पहले आहार के आधार पर उपचार कर सके। उन्होंने प्राकृतिक चिकित्सा को आयुर्वेद का अभिन्न अंग मानते हुए इसके सिद्धांतों के गहन अध्ययन और जन-जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया।

कुरुक्षेत्र। प्रतिभागियों को संबोधित करते मुख्यातिथि। स्वयं

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