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केयू परीक्षा शाखा के दो कर्मचारी सस्पेंड,गड़बड़ी का आरोप

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अमर उजाला ब्यूरो
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कुरुक्षेत्र। केयू की परीक्षा शाखा के दो कर्मचारियों को गड़बड़ी के आरोप में सस्पेंड किया गया है। यह कार्रवाई वीसी डॉ. कैलाश चंद्र शर्मा के आदेश पर की गई है।
केयू की परीक्षा शाखा में कार्यरत दोनों कर्मचारियों के खिलाफ लगातार शिकायतें मिल रही थीं। लिखित शिकायतें पहुंचने पर मामला कुलपति डॉ. कैलाश चंद्र शर्मा के पास पहुंचा। दोनों कर्मचारियों को सस्पेंड करने पुष्टि केयू के परीक्षा नियंत्रक डॉ. हुकम सिंह रंगा ने दी। डॉ. रंगा के मुताबिक उन्हें इस बारे अभी जानकारी नहीं है कि दोनों कर्मचारियों को किस आरोप में सस्पेंड किया गया है। इधर केयू प्रवक्ता ने बताया कि परीक्षा शाखा में कार्यरत कर्मचारी जयपाल बिंदल और प्रवेश कुमार के खिलाफ शिकायत मिली थी। दोनों को सस्पेंड कर वीसी के आदेश पर एक जांच कमेटी गठित कर दी है। जांच कमेटी कर्मचारियों पर लगे आरोपों के बारे में तथ्य जुटाएगी। रिपोर्ट कुलपति को सौंपी जाएगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर दोनों कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाएगी। पता यह भी चला है कि दो कर्मचारियों के अलावा उन संदिग्ध कर्मचारियों पर भी नजर रखी जा रही है, जिनके खिलाफ इस तरह की मौखिक शिकायतें पहले भी मिलती रही हैं।
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कुछ वर्षों से लगा था विराम, अब फिर आया मामला सामने
एक दौर में केयू की परीक्षा शाखा अनेक बार बड़ी गड़बड़ियों के चलते विवादों में रही। हालांकि इस दौर में इन गड़बड़ियों के मामलों को उजागर करके सुधार के लिए कदम उठाने के बजाय ज्यादा जोर इन पर पर्दा डालने पर लगता था। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में जहां केयू में ऐसी घटनाओं पर विराम लगा, वहीं कार्रवाई का डंडा भी पुरजोर चला है।

2015 से पहले हो चुकी हैं ये बड़ी घटनाएं
वर्ष 2015 से पहले केयू की रिजल्ट ब्रांच में परीक्षार्थियों के नंबरों से छेड़छाड़, केयू के हॉस्टलों में बड़ी मात्रा में खाली डीएमसी मिलने, परीक्षा शाखा ही नहीं, बल्कि केयू परिसर से बाहर सड़क पर उत्तर पुस्तिकाओं के बंडल मिलने जैसी कई घटनाओं से केयू की प्रतिष्ठा पर दाग लग चुके हैं।
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तब इन कारनामों बदौलत केयू का दामन हुआ था दागदार
केयू परीक्षा शाखा में नंबर बढ़ाने के मामले में कई बार धरपकड़ हो चुकी है। केयू के अधिकारियों के पारिवारिक सदस्य भी ऐसे मामलों में फंस चुके हैं। यहां तक कि पीएचडी कराने के नाम पर विद्यार्थियों से घूस लेने के मामले भी सामने आ चुके हैं। परीक्षा केंद्र में तैनात एक अधिकारी पर अपनी रिश्तेदार परीक्षार्थी को लाभ पहुंचाने जैसे मामले भी सामने आए थे।
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