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मदनमोहन मालवीय हिंदी, हिंदु और हिंदुस्तान के उपासक : डॉ. मिश्र

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मदनमोहन मालवीय हिंदी, हिंदू और हिंदुस्तान के उपासक : डॉ. मिश्र
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अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के संस्थापक, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, हिंदू सभा के अध्यक्ष और महान शिक्षाविद् भारतरत्न पंडित मदनमोहन मालवीय का व्यक्तित्व अद्वितीय के साथ बहुआयामी था। पंडित मालवीय देश से जातिगत बंधनों को तोड़ना चाहते थे। उन्होंने दलितों के मंदिरों में प्रवेश निषेध की बुराई के खिलाफ देश भर में आंदोलन चलाया था। उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान उदारवादियों और राष्ट्रवादियों के बीच सेतु का काम किया।
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यह विचार मातृभूमि सेवा मिशन के संयोजक डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र महामना पंडित मदनमोहन मालवीय की जयंती के अवसर पर व्यक्त किए। कार्यक्रम का शुभारंभ पंडित मालवीय के चित्र पर माल्यार्पण और पुष्पार्चना से हुआ। उन्होंने कहा मालवीय ने एक समाज सुधारक के नाते महिलाओं की शिक्षा, विधवा और पुनर्विवाह का समर्थन किया। बालविवाह का विरोध किया। उनका स्वप्न था कि हिंदी भारत की राष्ट्रभाषा बने। उनका मानना था कि भारतीय विद्यार्थियों के मार्ग में आने वाली समस्त कठिनाइयों का कोई अंत नहीं है। सबसे बड़ी कठिनाई ये है कि शिक्षा का माध्यम हमारी मातृभाषा न होकर एक अत्यंत दुरुह विदेशी भाषा अंग्रेजी है। संसार के किसी भी अन्य भाग में जन समुदाय की शिक्षा का माध्यम विदेशी भाषा नहीं है। भारत अपनी मातृभाषा के समस्त क्षेत्रों में प्रयोग से ही विश्व का एक सशक्त राष्ट्र बन सकता है। कार्यक्रम में मिशन के सदस्य तथा विद्यार्थी मौजूद रहे।
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