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गीता जन्मस्थली ग्रामीण युवा कल्याण समिति ने किया रावण दहन का विरोध

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किसान के फाने, पराली जलाने पर रोक तो रावण में कैसे जलाई जा रही लाखों टन पराली
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- गीता जन्मस्थली ग्रामीण युवा कल्याण समिति ने किया रावण दहन का विरोध
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। गीता जन्मस्थली ग्रामीण युवा कल्याण समिति ने रावण दहन का विरोध किया है। उनका तर्क है कि जब किसानों के फाने, पराली जलाने पर रोक है तो रावण में लाखों टन पराली कैसे जलाई जा रही है। इससे भी वायु प्रदूषण हो रहा है। इस पर भी रोक लगानी चाहिए।
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गीता जन्मस्थली का ऐतिहासिक महत्व रखने वाले गांव ज्योतिसर में किसानों एवं ब्राह्मण समाज के लोगों ने सतपाल शर्मा की अगुवाई में बैठक की। ग्रामीण युवा कल्याण समिति ज्योतिसर के अध्यक्ष सतपाल ने कहा कि हरियाणा में हर साल एक लाख टन के करीब पराली जलाने से काफी प्रदूषण फैलता है। जहरीली गैस के कारण सांस लेने में दिक्कत और आंखों में जलन की समस्या भी बढ़ती है। उन्होंने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की रिपोर्ट का हवाला देते हुए रावण दहन से 20 प्रतिशत प्रदूषण एक दिन में बढ़ने की जानकारी दी। बताया कि जो किसान फसलों के अवशेष जलाते हैं, उन पर सरकार ने जुर्माना लगाने के लिए कानून बनाया है। वहीं उन्होंने हर वर्ष रावण के पुतले का दहन करने के लिए भारी मात्रा में जलाई जाने वाली पराली को लेकर भी सरकार पर तंज कसा। कहा कि सरकार विधायक या मंत्री हर साल रावण दहन कार्यक्रमों का हिस्सा बनते हैं, लेकिन इसके चलते बनी प्रदूषण की समस्या पर कुछ नहीं बोलते। उन्होंने पराली जलाना किसानों की मजबूरी बताया। वहीं विधायक, मंत्री एवं सरकार के प्रतिनिधियों पर कटाक्ष किया कि ये लोग अपनी राजनीति चमकाने के लिए ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से जनता को एकत्रित करके भाषण सुनाने का जरिया बनाते हैं। उन्होंने रावण को ज्ञानी, विद्वान, तपस्वी और सहनशील व्यक्ति कहते हुए सरकार से पुतला दहन बंद करने की मांग की। कहा कि रावण दहन ब्राह्मण समाज की भावनाओं से जुड़ा एक मुद्दा है, जिसको लेकर पिछले साल भी विरोध किया था। लिहाजा, इसका दहन बंद करके प्रदूषण रहित समाज की दिशा में कदम बढ़ाना चाहिए। चेतावनी दी कि यदि अबकी बार दहन हुआ तो ब्राह्मण समाज ऐसी अड़ियल सरकार को कभी वोट और सपोर्ट नहीं देगा। किसानों ने एकसुर में महंगाई की मार झेलने की बात कहते हुए अन्नदाता के कर्जे तले दबे होने की बात कही। महंगी दवाई, खाद, बीज और फसल के उचित दाम न मिलने के कारण आत्महत्या करने को मजबूरी बताया। सभी ने आवाज बुलंद करके कहा कि वर्तमान सरकार ने उनके साथ धोखा किया है और ऐसी सरकार को उखाड़ फेंकेंगे। वहीं अवशेष जलाने संबंधी मामले में उन्होंने सरकार को अपने खर्चे पर किसानों के खेतों से समय रहते उठाने की मांग की।
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