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वीसी की गुगली पर कुंटिया नेता और विधायक क्लीन बोल्ड

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न होगा कोर्ट केस वापस, न वापस मिलेगी काटी गई सैलरी, शैक्षणिक योग्यता पूरी तो ही प्रोमोशन
- केयू प्रशासन-कुंटिया विवाद में विधायक के हस्तक्षेप से छिड़ी बहस
- राजनीतिक हस्तक्षेप से ए प्लस ग्रेड यूनिवर्सिटी की स्वायत्तता पर उठे सवाल
- वीसी बोले- प्रमोशन हड़ताल के दबाव से नहीं, यूजीसी की गाइडलाइन से होगी
राजेश शांडिल्य
कुरुक्षेत्र। केयू प्रशासन ने शुक्रवार को विधायक की मध्यस्थता के बीच शुक्रवार को चली बैठक में कुंटिया नेताओं को जोरदार झटका दिया है। वीसी ने साफ किया है कि न तो यूनिवर्सिटी नो वर्क नो पे के तहत सैलरी से काटी राशि वापस दी जाएगी, न ही कोर्ट केस वापस होंगे। इसके साथ ही बिना शैक्षणिक योग्यता पूरी किए बिना चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को प्रोमोशन दी जाएगी।
वहीं, केयू प्रशासन और कुंटिया के विवाद के बीच विधायक के सीधे हस्तक्षेप से देश की ए प्लस ग्रेड यूनिवर्सिटी की स्वायत्तता पर सवाल खड़े हो गए हैं। केयू के प्रशासन के कई अधिकारी व शिक्षकगण इसे यूनिवर्सिटी की स्वायत्तता पर खतरा मान रहे हैं। इनका कहना है कि हरियाणा की मदर यूनिवर्सिटी केयू को अब तक इतिहास में इससे पहले कभी किसी नेता का सीधा हस्तक्षेप इस तरह नहीं दिखा, जिस तरह केयू और कुंटिया के विवाद के दौरान थानेसर के विधायक सुभाष सुधा का दिखाई दिया है। केयू प्रशासन की भौंहें इसलिए भी तनी हैं क्योंकि कुंटिया के ऑफिस में आकर उनका संबोधन और मध्यस्थता करते हुए उन मांगों को भी पूरा कराने का आश्वासन दिया जा रहा है, जिन्हें पूरा करना केयू प्रशासन सीधे तौर पर यूजीसी की गाइड लाइन का उल्लंघन मानता है। इनमें वरिष्ठता के आधार पर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का बगैर टाइपिंग टेस्ट पास किए प्रमोशन और असिस्टेंट रजिस्ट्रार और डिप्टी रजिस्ट्रार के पद पर बगैर एमए प्रमोशन जैसे मुद्दे शामिल हैं। केयू प्रशासन पहले ही दिन से बगैर टेस्ट और बगैर एएम पास केयू कर्मियों को वरिष्ठता के आधार प्रमोशन देने से साफ इंकार कर चुका है। शुक्रवार को वीसी ऑफिस में केयू प्रशासन और कुंटिया की मध्यस्थता के लिए विधायक सुभाष सुधा पहुंचे थे। केयू प्रशासन के कुछ अधिकारी और प्रोफेसरों का कहना है कि यदि विधायक को कुछ करना ही है तो वह सरकार द्वारा दी जाने वाली ग्रांट को जल्द दिलाने में भूमिका निभाते तो शायद यह विवाद खड़ा भी नहीं होता, क्योंकि पूरे आंदोलन में सातवें वेतन आयोग का एरियर न मिलने की वजह यही रही है।
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एक घंटे की अनौपचारिक बैठक में वीसी के अडिग
मगर यहां कुंटिया और विधायक के लिये तगड़ा झटका उन मुद्दों पर केयू प्रशासन अडिग रहने से लगा, जिन मुद्दों को हल कराने का आश्वासन देकर विधायक ने 22वें दिन हड़ताल को खुलवाया था। अनिश्चितकालीन हड़ताल खत्म कराने के साथ ही शुक्रवार को वीसी और कुंटिया के बीच विधायक ने मध्यस्थता कर तमाम मांगों को पूरा कराने का आश्वासन दिया था। इसी के मद्देजनर शुक्रवार को विधायक की मौजूदगी में कुंटिया के अध्यक्ष रामकुमार गुर्जर सहित सात पदाधिकारियों की बैठक वीसी आफिस में शाम 4 बजकर 35 मिनट से 5 बजकर 25 तक चली।पता चला है कि इस बैठक में वीसी डा.कैलाश शर्मा कर्मचारियों की जायज मांगों पर सहमत दिखे,लेकिन नजायज मांगों के लिये दबाव बनाने की रणनीति पर ठीक ठाक सुनाई भी।

वीसी की दो टूक, कुछ पर सहमत और इन मुद्दों पर लगे झटके
1- नो वर्क नो पे के आदेश का उल्लंघन पर जो राशि सैलरी से काटी है, उसका पैसा नहीं मिलेगा
2- प्रमोशन के लिए यूजीसी द्वारा तय किए गए मानदंड लागू रहेंगे।
3- विधायक की मौजूदगी में वीसी ने साफ कह दिया कि बगैर टेस्ट पास किये ना तो प्रमोशन होगी
4- न ही एमए की शैक्षणिक योग्यता के बिना एआर और डीआर के पद पर पदोन्नति मिलेगी
5- वीसी बोले, 10वीं या 12वीं पास को केयू का असिस्टेंट रजिस्ट्रार और डिप्टी रजिस्ट्रार नहीं लगाया जा सकता
6- वीसी का तर्क - ऐसा करना केयू जैसे प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों के लिए घातक होगा
7- केयू कर्मियों को इन महत्वपूर्ण पदों पर प्रमोशन चाहिए तो वे पहले अपनी योग्यता को पूरा करें
8- साल 2018 में तीसरी अनिश्चितकालीन हड़ताल के दौरान केयू प्रशासन द्वारा डाले गए कोर्ट के नहीं होंगे वापस
10- कोर्ट की अवमानना के केस वापस लेने की मांग को कुलपति ने किया स्वीकार
11- स्टाफ रेशों का पैसा जल्द कर्मचारियों के खाते में डाला जाएगा
12- सातवें वेतन आयोग का एरियर सरकार से मिलते ही दे दिया जाएगा

20 सितंबर को दिया था दो घंटे अतिरिक्त का नोटिस, अब एक घंटा रहेगा
अनिश्चितकालीन हड़ताल के दौरान 22 दिन तक केयू का कामकाज प्रभावित रहा था। हड़ताल खत्म होने के अगले दिन केयू प्रशासन ने 20 सितंबर को नोटिस जारी किया था कि अटके हुए कामकाज को निपटाने के लिए उन्हें रोजाना दो घंटे अतिरिक्त ड्यूटी सुबह आठ से शाम छह बजे तक करना होगा। लेकिन शुक्रवार की बैठक में कुंटिया नेताओं ने मांग रखी थी कि दो घंटे की बजाय एक घंटे अतिरिक्त काम लिया जाए। इसे वीसी ने स्वीकार कर तीन सप्ताह की जगह छह सप्ताह तक सुबह 9 से छह बजे तक अतिरिक्त एक घंटा कामकाज निपटाने को कहा है।

कुंटिया दफ्तर के बाहर रहा चुनाव परिणाम आने जैसा माहौल
विधायक की मौजूदगी में कुंटिया के सात पदाधिकारियों की पूरे एक घंटा तक चली बैठक के दौरान कुंटिया आफिस के बाहर चुनाव परिणाम की प्रतीक्षा जैसा माहौल रहा। कुंटिया आफिस के बाहर काफी संख्या में खड़े कुंटिया कर्मचारियों में इस बात को लेकर कौतूहल था कि आज किन पर वीसी मानेंगे और किन मुद्दों पर अडिग रहेंगे,लेकिन जैसे ही विधायक और कुंटिया के सातों पदाधिकारियों ने वीसी ऑफिस से बाहर जो सूचना दी उससे कर्मचारियों के चेहरों पर मायूसी छा गई।

विधायक इन दो नेताओं को गाड़ी में ले गए, फिर सात बजे तक चली मंत्रणा
विधायक ने कुंटिया नेताओं और कर्मचारियों को आश्वासन दिया कि वह उनको पांच रुपये का भी नुकसान नहीं होने देंगे। उनकी मांगों को पूरा कराने का प्रयास किया जाएगा। इसके बाद विधायक कुंटिया प्रधान रामकुमार गुर्जर को वहीं छोड़कर महासचिव नीलकंठ शर्मा और सह सचिव रविंद्र तोमर को अपने साथ गाड़ी में बैठाकर ले गये। पता चला है कि शाम सात बजे तक विधायक और इन दोनों नेताओं के साथ काफी देर तक मंत्रणा चली।
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वीसी ने दिया कड़ा संदेश
एक कर्मचारी नेता के मुताबिक हड़ताल कई दिनों पहले खत्म हो चुकी थी,लेकिन एक राज नेता इस हड़ताल को खत्म कराने का श्रेय लेना चाहते थे। बताया गया है कि 18 सितंबर को केयू प्रशासन और कुंटिया के बीच जिन मांगों पर सहमति बनी थी। वीसी आज भी 18 सितंबर को यूनिवर्सिटी का स्टैंड था, उसी पर कायम है। यानी विधायक ने जो आश्वासन दिए थे, उसे केयू प्रशासन अपने स्टैंड पर अडिग रहते हुए मानने से साफ इंकार चुका है।
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