फोटो नंबर-5 से 13 और 57, 58
- ब्रह्मसरोवर में स्वच्छ जल प्रोजेक्ट पर खर्च हुए 17 करोड़, फिसलन से बचाव की नहीं कोई योजना
- अमावस्या पर स्नान के दौरान दर्जनों फिसले, चोटिल, पिहोवा में यात्री लगे सिर में टांके
- चार दिन पहले आप के प्रदेशाध्यक्ष फिसले थे ब्रह्मसरोवर में दो बार, की थी सरकार पर टिप्पणी
राजेश शांडिल्य
कुरुक्षेत्र। हाल ही में राज्य सरकार ने 17 करोड़ रुपये से अधिक ब्रह्मसरोवर में चल रहे स्वच्छ जल प्रोजेक्ट पर तो खर्च कर दिए। मगर इस सरोवर की सीढ़ियों से काई-फिसलन कैसे दूर होगी ? इस बारे में कुछ नहीं सोचा। नतीजतन खास अवसरों के अलावा रोजाना यहां पहुंचने वाले यात्री, खासकर बुजुर्ग और महिलाएं ब्रह्मसरोवर पर गिर कर जख्मी हो रहे हैं। शनिवार को सावन की अमावस्या पर धर्मनगरी के ब्रह्मसरोवर, सन्निहित सरोवर के अलावा पिहोवा तीर्थ पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे, इनमें दर्जनों श्रद्धालु फिसलकर जख्मी हुए। घायल हुए यात्रियों में दिल्ली वासी एक श्रद्धालु गंभीर रूप से जख्मी हो गया। यह यात्री अपने पिता का पिंडदान कराने पिहोवा के सरस्वती तीर्थ पर आया था, लेकिन घाट पर फिसलने की वजह से उसके सिर में कई टांके लगे। इस श्रद्धालु को लोगों की मदद से तत्काल पिहोवा के सरकारी अस्पताल में दाखिल कराया गया। इस यात्री को हेड इंजरी बताई गई है,जोकि उसके लिए जानलेवा भी साबित हो सकती थी। इस यात्री के अलावा पिहोवा का एक तीर्थ पुरोहित भी जख्मी हुआ। पता चला है कि फिसलकर चोटिल होने वाले यात्रियों में ज्यादातर महिलाएं और बुजुर्ग शामिल थे। यात्रियों की माने तो सरोवर की सीढ़ियों पर इतनी ज्यादा काई है कि काफी संभल कर स्नान करना भी जोखिम भरा साबित हो सकता है। बता दें कि चार दिन पहले आम आदमी पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष नवीन जयहिंद भी ब्रह्मसरोवर में स्नान के दौरान दो बार फिसले थे और तब उन्होंने मीडिया के समक्ष तीर्थ के घाटों पर हुई फिसलन मुद्दा भी उठाते हुए सरकार पर टिप्पणी की थी। बहरहाल ब्रह्मसरोवर में चल रहे जल प्रोजेक्ट पर 17 करोड़ खर्च से सरोवर में स्वच्छ जल तो मिला,मगर सीढ़ियों पर जमी काई और फिसलन को दूर करने के लिये अभी तक कोई प्रबंध नहीं हो सका। लंबे समय से धर्मनगरी के प्रमुख तीर्थो पर इन हालात में सुधार नहीं हो सका। हालांकि घटनाओं के बाद फिसलन को दूर करने के लिये कई तरह की योजनाओं के दावे भी हुए,मगर इन घोषणाओं पर कोई काम नहीं हुआ। बता दें कि पिछले वर्षो में ब्रह्मसरोवर और सन्निहित सरोवर पर मैटिंग करने जैसे प्लान भी बन चुके हैं।
पिहोवा के पापांतक घाट पर हुई हेड इंजरी
दिल्ली के रोहिणी से आए तीर्थ यात्री अशोक शर्मा ने बताया वह अपने पिता सुदेश शर्मा के पिंडदान कराने पिहोवा तीर्थ पर आया था। पूजन के लिए वह पापांतक घाट के पास से जल लेने के गया था। इसी दौरान वह घाट पर फिसल गया और हेड इंजरी हो गई। उसे तुरंत पिहोवा के सरकारी अस्पताल पहुंचाया गया। जहां उसके सिर में तीन टांके आए।
प्रत्यक्षदर्शी बोले सिर से काफी खून निकला
अशोक शर्मा को सिर में चोट लगने के दौरान मौके पर खड़े लोगों ने बताया कि उसके सिर काफी खून बहने लगा था, उसकी जान पर भी बन सकती थी। इन्होंने बताया कि इस घाट पर फिसल कर अब तक दर्जनों लोग चोटिल हो चुके है। अमावस्या पर फिसलने से चोटिल हुए लोगों में तीर्थ पुरोहित अरुण कौशिक भी शामिल बताए गए हैं। उनकी कोहनी पर चोट लगी है।
ब्रह्मसरोवर का महत्व उसमें स्नान करने का है
केडीबी को यह समझना होगा कि ब्रह्मसरोवर में सिर्फ स्वच्छ जल दिखे सिर्फ यही जरुरी नहीं है, बल्कि इस सरोवर का विशेष महत्व स्नान और उसमें डुबकी लगाने का है। मगर यात्रियों की इस पीड़ा को समझकर इस समस्या को दूर करने की बजाये संबंधित अधिकारी कई तरह तर्क दे रहे हैं।
अमावस्या पर विभिन्न राज्यों के श्रद्धालु पहुंचे यहां
शनिश्चरी अमावस्या पर देश के विभिन्न हिस्सों से हजारों की संख्या में श्रद्दालुओं के जत्थे ब्रह्मसरोवर तट पर अल सुबह पहुंचे। इनमें हरियाणा के अलावा राजस्थान, पंजाब, दिल्ली, उत्तरप्रदेश व पश्चिमी बंगाल सहित विभिन्न राज्यों के श्रद्वालु पहुंचे। अनेकों श्रद्वालु देर रात को ही यहां पहुंच गए तो वहीं सुबह तक ब्रह्मसरोवर तट पर भीड़ होने लगी थी। दोपहर तक श्रद्वालुओं का आना जारी रहा और उन्होंने श्रद्वापूर्वक स्नान किया तो पूजा अर्चना भी की।
गिरते-गिरते बच गया- अमृत लाल
अमावस्या पर स्नान करने कैथल की सरगोदा कॉलोनी वासी अमृत लाल का कहना था कि शनिश्चरी अमावस्या पर यहां स्नान आए थे। इस दौरान जैसे ही ब्रह्मसरोवर तट पर पानी में उतरने लगा तो फिसल गया। सौभाग्यवश सरोवर में दो अन्य श्रद्धालु ने उसे पकड़ लिया,वरना उसे गंभीर चोट भी लग सकती थी। उन्होंने बताया कि इस दौरान उसने कई लोगों को फिसलन से बचने के लिये भी कहा,लेकिन इसके बावजूद कई लोग पानी में फिसल कर चोटिल हुए।
अमावस्या से पहले प्रशासन को करानी चाहिए थी घाटों व तटों की सफाई- सुरेश
लाडवा से पहुंचे श्रद्वालु सुरेश कुमार का कहना था कि कुरुक्षेत्र तीर्थ पर अमावस्या जैसे खास अवसरों पर देश-दुनिया से श्रद्धालु यहां स्नान करने और मोक्ष की डुबकी लगाने पहुंचते हैं। प्रशासन को ऐसे अवसर से पहले पुख्ता प्रबंध करना चाहिए। घाटों व तटों पर बुजुर्ग श्रद्वालुओं का स्नान करना किसी खतरे से कम नहीं है।
काई दूर करने वाली मशीनें को लाने के किए जा रहे है प्रयास- छाबड़ा
केडीबी के मानद सचिव मदन मोहन छाबड़ा का कहना है कि सरोवरों के पानी की सफाई होनी चाहिए। केडीबी की टीम इसके लिए हर समय प्रयासरत भी रहती है और यह कार्य रूटिन में किया भी जाता है, लेकिन पानी पर जहां धूप पड़ती है, इसकी वजह से वहां काई बन जाती है। ऐसी मशीनें खोजने का प्रयास किया जा रहा है, जो पानी से काई को हटा दें। उम्मीद है जल्द ही ये मशीनें मिल जाएंगी, जिसके बाद ब्रह्मसरोवर सहित अन्य सरोवरों पर भी श्रद्वालुओं को फिसलन आदि की समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा। यात्रियों को बेहतर सुविधा दिए जाने के लिए केडीबी हर समय तत्पर है।
पिहोवा के तीर्थ पुरोहितों में रोष
पिहोवा के तीर्थ पुरोहितों की माने तो पालिका की ओर से तीर्थ पर सफाई के लिए 10 कर्मी नियुक्त किये है, लेकिन वास्तव में ये कभी कभार सफाई करते दिखते है। इस वजह से सफाई व्यवस्था चौपट है। पुरोहित वर्ग ने अपने स्तर पर तीर्थ की सफाई के लिए एक कर्मचारी को रखा हुआ है, लेकिन तीर्थ का ऐरिया ज्यादा होने के कारण उससे सफाई व्यवस्था संभल नहीं पाती। उन्होंने बताया कि प्रशासन ने तीर्थ में बिना सफाई किए ही जल छोड़ा था,इसका खामियाजा अब श्रद्धालुओं को भुगतना पड़ रहा है।
पिहोवा पालिका सचिव का तर्क
पिहोवा पालिका सचिव सुशील कुमार ने बताया कि तीर्थ पर दो सफाई कर्मी सफाई के लिए नियुक्त हैं। हमारे पास सफाई कर्मचारियों की कमी है। तीर्थ पर कमियों की दुरुस्त किया जाएगा।