हेलमेट ही नहीं बाइक पर जाते समय जूते पहनने के लिए भी कहता था, लेकिन एक दिन वही हुआ....
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
‘मैं अपने बेटे को बाइक चलाते समय हेलमेट ही नहीं, जूते भी हर समय पहनने के लिए कई वर्षों से कहता रहा, लेकिन वही हुआ जिसका मुझे डर बना रहता था। सड़क हादसे में अपने बेटे को खो देने का जो गम मुझे मिला है, वह शब्दों में बता नहीं सकता।’ यह दर्द गांव ढकाला निवासी करीब 65 वर्षीय पाला राम का है। करीब 12 दिन पहले दो फरवरी को एक सड़क हादसे में जीवन भर का उनका सहारा इस दुनिया से चला गया। इसके बाद वह दूसरे युवाओं को संदेश देने लगे।
बता दें कि उनके करीब 24 वर्षीय बेटे हरंबस, उसके साथी 20 वर्षीय विक्रम और 18 वर्षीय देवेंद्र की गांव मदनपुर के समीप हादसे में मौत हो गई थी। उस वक्त वे एक बाइक पर सवार होकर शाहाबाद में मजदूरी करने बाद रात करीब 11 बजे अपने घर लौट रहे थे। इस हादसे में पाला राम नेे अपने जवान बेटे को खो दिया। वह इसका गम गम चाहते हुए भी भूला नहीं पा रहे। अमर उजाला से बातचीत में छलकी आंखों से बताया कि वह अक्सर ही अपने बेटे को समझाते थे कि वह कभी भी बिना हेलमेट और जूते पहने बाइक पर सवार न हो, लेकिन दूसरे युवाओं की तरह उसने भी उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया। उनका कहना है कि वे अपने बेटे की परवाह करते हुए ही उन्हें शाहाबाद में मजदूरी करने जाने से भी रोकते थे तो वहीं रात को बाइक पर न चलने की भी सलाह देते रहे। हादसे के दौरान उनका बेटा बाइक नहीं चला रहा था, लेकिन लापरवाही भारी पड़ती ही है।
हरबंस से ही थी बड़ी उम्मीद
पाला राम का कहना है कि वह खुद बीमार चल रहे हैं। वह अपनी पत्नी के साथ अपने बेटे हरबंस के साथ ही रह रहे थे, जबकि दूसरे दोनों बेटे अलग रह रहे हैं। उन्हें जीवन भर मजदूरी कर पाले गए अपने बेटे हरबंस से ही उम्मीद थी, लेकिन जो उनके साथ हुआ वह किसी भी माता-पिता के साथ न हो। उनका कहना है कि महज पुलिस के डर से नहीं, बल्कि अपने जीवन ओर अपने ऊपर आस लगाए बैठे पूरे परिवार को देखते हुए हेलमेट अवश्य पहनें।
पिता का साया पांच साल पहले सिर से उठ जाने के बाद विक्रम ही था सहारा
गांव मदनपुर के पास दो फरवरी देर रात को हुए सड़क हादसे में जान गंवाने वालों में एक युवक विक्रम भी था। करीब पांच वर्ष पहले सिर से पिता का साया उठ जाने के बाद अपनी बुजुर्ग मां और अपने एक दिव्यांग भाई का वही एक सहारा था, लेकिन सड़क हादसे में उनके चले जाने के बाद पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
सिर में चोट लगने से ही हुई तीनों युवकों की मौत : सरपंच
गांव ढकाला के सरपंच मलकीत सिंह का कहना है कि हेलमेट हर दो पहिया वाहन सवार के लिए जीवन संरक्षक होता है। यह सिर में चोट नहीं लगने देता। इससे जान जाने की संभावना कम हो जाती है। गांव ढकाला के तीनों युवकों की सड़क हादसे में सिर में चोट लगने से ही मौत हुई है। यदि किसी ने भी हेलमेट पहना होता तो शायद उसकी जिंदगी बच जाती। आजकल अधिकतर युवक हेलमेट पहनना अपनी प्रतिष्ठा के विपरीत मानते है, जो जानलेवा साबित होती है।
हेलमेट के बारे में ट्रैफिक एसएचओ दे रहे जानकारी
दो पहिया वाहन चलाते समय हेलमेट कितना जरूरी है, यह जानकारी जिला ट्रैफिक एसएचओ देवेंद्र कुमार कदम-कदम पर इसकी जानकारी दोपहिया वाहन चालकों को देते हैं। वह सभी को हेलमेट पहनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। यदि कोई हेलमेट खरीदने में सक्षम नहीं होता तो उसे अपने पास से हेलमेट देने की पेशकश करते है। वह ट्रैफिक एसएचओ के तौर पर कम, ऐसे वाहन चालकों के शुभचिंतक के रूप में अधिक दिखाई देते है। उनका कहना है कि हर युवा देश एवं समाज की पूंजी है और एक भी युवा हादसे का शिकार होता है तो पूरे देश को नुकसान होता है।