किसान भाइयों, अपने खेतों में अवशेष न जलाएं। इससे पर्यावरण दूषित होता है तो कई दुर्घटनाएं भी होती है। अवशेष जलाने वाले किसानों के खिलाफ कृषि विभाग व एनजीटी भी कड़ी कार्रवाई कर सकता है। यह अपील व चेतावनी अब हर किसान को रेडियो जिंगल से सुनाई देगी। धान कटाई के सीजन के साथ ही कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने एक बार फिर धान के अवशेष जलाने से रोकने के लिए कमर कस ली है।
जिसके लिए विभाग ने एक विशेष प्लान तैयार किया है। इसके तहत ही रेडियो जिंगल के माध्यम से पहली बार किसानों को यह संदेश दिया जाएगा। यही नहीं यह अपील एवं चेतावनी से किसानों को अवगत करवाने के लिए विभाग गांव-गांव दस्तक देनी शुरू कर दी है। किसानों की जागरूकता के लिए विभाग सार्वजनिक स्थानों व कार्यालयों सहित अन्य सामग्री के जरिए प्रचार किया जा रहा है। अगर इसके बाद भी किसान फसल अवशेष जलाएंगे तो विभाग उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगा।
गेंहू के सीजन में 52 किसानों पर दर्ज किए गए थे मामले
अप्रैल-मई माह में गेहूं के सीजन के दौरान भी विभाग ने किसानों को फसलों के अवशेष न जलाने की सलाह दी थी। इसके बावजूद किसान धड़ल्ले से यह अवशेष जलाते रहे। इसी के चलते ही विभाग ने भी जिले भर के 54 किसानों के खिलाफ मुकदमे दर्ज करवाए थे तो वहीं लगभग 75 किसानों के अवशेष जले खेत नोटिस किए थे। कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डॉ जेएन भाटिया के मुताबिक फसल अवशेष जलाने से जमीन की उर्वरा शक्ति घटती है तो पर्यावरण पर दुष्प्रभाव पड़ता है।
विभाग व एनजीटी भी करेगा कारवाई : उपनिदेशक
कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ कर्मचंद का कहना है कि इस बार जहां विभाग पूरी सख्ती बरतेगा वहीं नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल भी विशेष निगरानी रखेगा। दोनों ओर से आरोपी किसानों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, साथ ही मामला दर्ज कर जुर्माना भी लगाया जाएगा।
अवशेष आग लगाने पर लगाया प्रतिबंध
उपायुक्त सुमेधा कटारिया ने धान की फसल की कटाई के पश्चात खड़े फानों, पराली व अवशेष जलाने पर धारा 144 लगाकर पूर्णत: प्रतिबंध लगाने के आदेश जारी किए है। उन्होंने जारी आदेशों में कहा है कि जिला प्रशासन के संज्ञान में आया है कि जिले की सीमा के अंदर धान की फसल की कटाई करने के उपरांत बची हुई पराली, अवशेषों को जला दिया जाता है।