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बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर न स्कूल प्रबंधन व शिक्षा विभाग को परवाह और न ही जनस्वास्थ्य विभाग गंभीर

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फोटो 32
बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर न स्कूल प्रबंधन लापरवाह, जनस्वास्थ्य विभाग भी गंभीर नहीं
- आदेश के बावजूद नहीं कराई जा रही पीने के पानी की जांच, तीन माह में महज सात स्कूलों ने जमा कराए सैंपल

सेवा सिंह
कुरुक्षेत्र। जिला भर में स्थित सरकारी व निजी स्कूलों में भले ही हजारों बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे है, लेकिन इनके स्वास्थ्य को लेकर न तो अधिकतर स्कूल प्रबंधन व शिक्षा विभाग गंभीर है और न ही जनस्वास्थ्य विभाग को ही कोई परवाह है। सरकार के आदेशों को भी गंभीरता से नहीं लिया जा रहा । शायद यही कारण है कि इन स्कूलों में बच्चे जो पानी पी रहे है उसकी जांच कराए जाने की जहमत नहीं उठाई जा रही है।
जिला मुख्यालय पर भी यही हालात बने है, जिसके चलते पिछले तीन माह के दौरान महज सात स्कूलों के पानी की ही जांच कराई गई। हालांकि ये सैंपल सही पाए जाने के दावे किए जा रहे है, लेकिन समय-समय पर पानी जांच न कराए जाने के मामले को सरकारी विभाग गंभीरता से लेने की बजाए एक-दूसरे को जिम्मेदार बताते हुए पल्ला झाड़ रहे है। जहां अधिकतर सरकारी स्कूलों में जनस्वास्थ्य विभाग की ओर से सप्लाई किए जाने वाले पानी को बच्चे पी रहे है तो वहीं अनेकों सरकारी व निजी स्कूलों में अपने स्तर पर भी टयूबवेल लगाए हुए है। सरकार के आदेशानुसार स्कूलों के पानी की समय-समय पर जांच कराई जानी आवश्यक है। इसमें शिक्षा विभाग से लेकर जनस्वास्थ्य विभाग की भी जिम्मेदारी है, लेकिन दोनों ही विभाग एक-दूसरे पर इसका जिम्मा छोड़ बच्चों के स्वास्थ्य को दरकिनार कर रहे है। बता दें कि सरकारी विभाग की ओर से जहां निशुल्क पानी जांच की जाती है तो वहीं निजी तौर पर भी उक्त लैब में टीडीएस जांच के लिए महज 250 रुपये की फीस तय की हुई है।
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आम लोग भी जागरूक नहीं,
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चिकित्सक भले ही पानी से इंफेक्शन की संभावना अधिक जताते हो, लेकिन आम लोग पानी जांच को लेकर अधिक जागरूक व गंभीर नहीं है। यही कारण है कि जनवरी माह में शहर भर से महज 30 सैंपल ही लैब में पहुंचे है, इनमें से 6 सैंपल बैक्ट्रोलोजिकल तौर पर फेल पाए गए है। इनमें पांच सैंपल ग्रामीण व एक शहरी क्षेत्र से लिया गया सैंपल शामिल है।
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पीएचसी सहित 10 फीसदी सैंपल मिले फेल
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जनस्वास्थ्य विभाग कार्यालय परिसर में ही स्थित लैब में करीब डेढ़ वर्ष के दौरान 779 सैंपल कैमिकल जांच व 272 सैंपल बैक्टिरिया जांच के लिए पहुंचे है। इनमें से 10 फीसदी सैंपल फेल पाए गए है। लैब इंचार्ज प्रियंका सैनी के अनुसार इनमें से अधिक सैंपल जनस्वास्थ्य विभाग की ओर से ही लाए गए थे और मोहन नगर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का सैंपल भी फेल निकला था। लैब में अभी तक आए पानी के सैंपल की जांच में स्पष्ट हुआ है कि शहर के पानी में टीडीएस की मात्रा सही है। यहां तक कि आरओ के पानी की भी अभी जरूरत नहीं मानी जा रही।
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पानी के सैंपल लेना जनस्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी : डीईओ
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जिला शिक्षा अधिकारी अरूण आश्री का कहना है कि सरकारी स्कूलों में सप्लाई हो रहे पानी के सैंपल लेने की जिम्मेदारी जनस्वास्थ्य विभाग व अन्य संबंधित विभागों की है, लेकिन कहीं से सैंपल लिए जाने की कोई सूचना नहीं मिलती। वे भी स्कूल मुखियाओं को अपने स्तर पर पानी जांच के लिए निर्देश देंगे। उनके सामने पानी की समस्या से किसी बच्चे को परेशानी होने का अभी तक कोई मामला नहीं आया है। स्कूलों में टंकी की सफाई समय पर करवाया जाना स्कूल प्रबंधन व विभाग का काम है, जो समय-समय पर किया जाता है।
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स्कूलों की ओर से सैंपल आएंगे तो अवश्य होगी जांच : एक्सईएन
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एक्सईएन अरविंद रोहिल्ला का कहना है कि उनके विभाग की ओर से पानी सैंपल की जांच के लिए लैब की व्यवस्था है। स्कूल प्रबंधन की ओर से पानी के सैंपल लैब में लाए जाएं तो अवश्य की जांच की जाएगी। सरकारी व निजी स्कूल इसमें अधिक रूची नहीं ले रहे, लेकिन अब वे जहां अपने विभाग के अधिकारियों को भी स्कूलों से सैंपल लेने के निर्देश देंगे वहीं स्कूलों को भी पत्र लिखकर पानी जांच कराने को लेकर अवगत कराएंगे।
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