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गोबर गैस प्लांट में दम घुटने से पंच,पिता,सगे भाई और चाचा की मौत

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गोबर गैस प्लांट में दम घुटने से पंच, पिता, सगे भाई और चाचा की मौतए
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- कुरुक्षेत्र के गांव अमीन स्थित डेरा रामपुरा में हुई दर्दनाक घटना स
- कनाडा और अमेरिका से भाई और चाचा के लौटने के बाद होगा अंतिम संस्कार
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। डेरा रामपुरा में गोबर गैस प्लांट में दम घुटने से गांव अमीन के पंच, उसके पिता, सगे भाई और चाचा की मौत हो गई। प्लांट के टैंक की मरम्मत करने उतरा पंच का बड़ा भाई जब बाहर न निकला तो परिवार के सदस्य एक-एक कर टैंक में अपने परिजनों को बचाने उतरे और बाहर न निकल सके।
मृतक बलदेव सिंह के भतीजे इकबाल सिंह ने बताया कि अमीन रोड स्थित रामपुरा डेरा में चाचा बलदेव सिंह के घर के पीछे गोबर गैस का करीब 15 फुट गहरा प्लांट बनाया हुआ है। पिछले कई दिनों से लीकेज के चलते बारिश के पानी से टैंक भर जाता था। गैस प्लांट की लीकेज दुरुस्त करने के लिए बुधवार दोपहर 12 बजे बलदेव सिंह का बड़ा बेटा रुपिंदर सिंह (31) गड्ढे में उतरा था। दिमाग में जहरीली गैस चढ़ने पर उसने शोर मचाया तो उसे बचाने उसका छोटा भाई व पंच देवेंदर सिंह (25) गड्ढे में उतरा। जहरीली गैस से उसका भी दम घुट गया और गड्ढे में बेहोश होकर गिर गया। दोनों बेटों को बचाने बलदेव सिंह (58) टैंक में उतरने लगा। कुछ सीढ़ियां उतरते ही जहरीली गैस के कारण बेहोश होकर वह भी टैंक में गिर गए। इस पर बलदेव सिंह के चचेरे भाई जोगिंदर सिंह (42) उनकी जान बचाने पहुंचा और गैस की चपेट में आ गया।
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परिजन व पास में काम कर रहे राजमिस्त्री शोरगुल सुनकर बचाव के लिए घटनास्थल की ओर दौड़े। मिस्त्री महिंद्र भी टैंक में उतरा तो गैस चढ़ने से छटपटाने लगा। लोगों ने उसे तुरंत बाहर खींच लिया। मृतकों के परिजन इकबाल सिंह, अमीरक सिंह, कुलदीप सिंह, राजू, रविंदर सिंह ने आसपास काम कर रहे 8 मजदूरों की मदद से चारों को गड्ढे से बाहर निकाला। एडीसी अनीष यादव दलबदल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद चारों शव परिजनों को सौंप दिए। मृतक पंच देवेंदर सिंह का सबसे बड़ा भाई कनाडा में है। उसके चाचा अमेरिका गए हैं। उनके लौटने पर अंतिम संस्कार किया जाएगा।

एक माह पहले ही लगवाया था गोबर गैस प्लांट
घटना का शिकार हुए परिवार ने एक माह पहले ही अपने पशुओं के बाड़े के ठीक पीछे गोबर गैस प्लांट लगवाया था। लेकिन तब शायद यह किसी ने नहीं सोचा होगा कि यह प्लांट एक ही झटके में परिवार के चार लोगों के जीवन को छीन लेगा। इस घटना से परिवार सदमे में है।
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छह मिनट में गई चार की जान, पांचवां बाल बाल बचा
सबसे पहले रुपिंदर गोबर गैस प्लांट में उतरा तो तीन मजदूर उपेंद्र, संदीप और मनोज इसका ढक्कन रस्सी से पकड़ कर खड़े थे। इन्होंने बताया कि छह मिनट में एक बाद एक चार लोग इस प्लांट में उतरे और जीवित बाहर नहीं निकल सके। आखिर में एक मिस्त्री ने इन्हें भीतर जाकर देखने का प्रयास किया था, लेकिन उसे तुरंत लोगों की मदद से बाहर निकाला और वह बाल-बाल बचा।
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