--- नेट पेपर में नकल मामले में नया खुलासा ---
देश की ए प्लस ग्रेड यूनिवर्सिटी में नेट के पेपर से पहले संस्थान ने नहीं ली थी प्रशासनिक अप्रूवल
- हद हो गई- यूसीके में यह राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा का केंद्र था मुन्ना भाई एग्जाम सेंटर
- नेट के पेपर से पहले लेनी थी वीसी और रजिस्ट्रार से प्रशासनिक अप्रूवल
- सीनियर प्रोफेसर ने केंद्रीय मंत्रालय व सीबीएसई को भेजी अमर उजाला में उजागर प्रकरण की कटिंग
राजेश शांडिल्य
कुरुक्षेत्र। देश की ए प्लस यूनिवर्सिटी में नेट का पेपर हो गया और उससे पहले कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से एग्जाम सेंटर के लिए प्रशासनिक मंजूरी तक नहीं ली गई। यह अप्रूवल नेट के पेपर में सेंटर सुपरिंटेंडेंट और यूनिवर्सिटी कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. एसबी मलिक को लेनी थी। मगर उन्होंने एग्जाम सेंटर बनाने के लिए केयू के वायस चांसलर और रजिस्टार से प्रशासनिक अप्रूवल ही नहीं ली थी। बगैर अप्रवूल ही 8 जुलाई को यूनिवर्सिटी कॉलेज में नेट की परीक्षा कराई गई।
बता दें कि 8 जुलाई 2018 को यूनिवर्सिटी कॉलेज के एग्जाम सेंटर में नेट के पेपर के दौरान केयू के ही दो प्रोफेसरों ने गड़बड़ी की थी। इस प्रकरण को अमर उजाला ने सिलसिलेवार उजागर किया था। अखबार में प्रकाशित खबरों में विद्यार्थियों के आरोपों के अलावा नेट के एग्जाम सेंटर में बरती गई अनियमितताओं को फोकस किया गया था। यूनिवर्सिटी कालेज के एक सीनियर प्रोफेसर एवं पूर्व प्रिंसिपल डॉ. एसपी गुप्ता ने बताया उन्होंने अमर उजाला में प्रकाशित खबरों की कटिंग केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय और सीबीएसई मुख्यालय भेज कर प्रकरण की जांच कराने की मांग की है। उनके मुताबिक सीबीएसई जल्द इस मामले की जांच शुरू करेगी। उनका कहना है कि अगर सेंटर की गहन जांच हुई तो इसमें पिछले राज भी खुलेंगे।
अब सवाल यह भी उठ रहे हैं कि यह यूनिवर्सिटी कॉलेज में बनाया गया राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा का केंद्र था या मुन्ना भाई परीक्षा सेंटर? बताया गया है कि अगर केयू से प्रशासनिक अप्रूवल होती तो परीक्षा सेंटर पर मोबाइल जैमर और अन्य व्यवस्थाएं भी होतीं। संभवत इससे बचने के लिए ही अप्रवूल नहीं ली गई। एक प्रोफेसर की मानें तो कुछ लोग पिछली तारीख में अप्रूवल लेने के लिए हाथ पैर मार रहे हैं, लेकिन निदेशक की पुष्टि के बाद इस पर विराम लग गया।
नेट के पेपर के लिए नहीं ली थी प्रशासनिक अप्रूवल : निदेशक
केयू जनसंपर्क विभाग के निदेशक डॉ. तेजेंद्र शर्मा से जब नेट के पेपर के लिए यूनिवर्सिटी कालेज में बनाए गए एग्जाम सेंटर की अप्रूवल के बारे में जानकारी ली गई तो उन्होंने केयू प्रशासन से जानकारी लेने के बाद पुष्टि की कि एग्जाम सेंटर के लिए वीसी और रजिस्ट्रार से प्रशासनिक अप्रूवल नहीं ली गई थी।
केयू नहीं, सीबीएसई करेगी जांच
नेट के पेपर में नकल का मामला उजागर होने के बाद केयू प्रशासन ने बनाई चार सदस्यीय जांच कमेटी एक सप्ताह पहले वीरवार को गठित की थी। इस कमेटी ने दो बैठकें कीं और तथ्यों को देखा। अब यह निर्णय लिया गया है कि इस मामले की जांच सीबीएसई से कराई जाए। केयू के प्रवक्ता के मुताबिक केयू प्रशासन सीबीएसई को जांच की सिफारिश भेजेगा।
जांच कमेटी पास नहीं था ये अधिकार
पता चला है कि जांच कमेटी के सामने जो तथ्य आए हैं उसके बाद चार सदस्यीय कमेटी ने इस मामले में जांच करने से हाथ पीछे खींच लिए हैं। इसका एक बड़ा कारण यह भी है कि केयू की यह जांच कमेटी ड्यूटी के दौरान मौजूद रहे सीबीएसई के ऑब्जर्वर और नकल रोकने का प्रयास करने वाले राजकीय कॉलेज के शिक्षकों को जांच में शामिल करने का अधिकार नहीं रखती।