श्रम कानून में संशोधन के विरोध में निकाला जुलूस
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। प्रदेश सरकार द्वारा श्रम कानून में किए संशोधन के विरोध में मंगलवार को प्रदेशभर के निर्माण कार्य मजदूर सड़कों पर उतरे और जमकर प्रदर्शन किया। स्थानयी नए बस अड्डे से लेेकर जिला सचिवालय तक जुलूस निकालने के बाद डीसी कार्यालय पर दो घंटे तक धरना दिया। इस दौरान सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इसके बाद मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया। निर्माण कार्य मजदूर मिस्त्री यूनियन के बैनर तले सुबह ही हजारों की निर्माण कार्य श्रमिक नए बस अड्डे के समीप पार्क में एकत्रित हुए और बैठक की। इसके बाद वे डीसी कार्यालय पर पहुंचे और धरना दिया। प्रदर्शनकारी श्रमिकों को संबोधित करते हुए
यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष कामरेड करनैल सिंह ने कहा कि मजदूर वर्ग ने आज तक जितने भी अधिकार प्राप्त किए हैं वह एक लंबे संघर्ष के बाद मिले हैं । इसके लिए मजदूरों ने कई तरह की मुसीबतों का सामना किया है। उन्होंने कहा कि जब सरकारों को मौकै मिलता है तो पूंजीपतियों के हित में मजदूरों के अधिकारों में कटौती करती रहती हैं। केंद्र व प्रदेश में जब से भाजपा की सरकार बनी है तब से मजदूरों के अधिकारों में कटौती करने की गति और देज हो गई है। उन्होंने कहा कि हरियाणा बीओसीडब्ल्यू वेलफेयर बोर्ड का गठन भी मजदूरों द्वारा किए गए संघर्ष का परिणाम है । इस बोर्ड के तहत निर्माणकार्य श्रमिकों को पंजीकरण करवाने के बाद कुछ कल्याणकारी स्कीम का लाभ मिलता है। बोर्ड से मिलने वाले लाभों को समाप्त करने की प्रक्रिया को जानबूझकर इतना जटिल बना दिया गया है कि इसका नाम मात्र लाभ मजदूरों को मिलता है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने 27 अप्रैल को हरियाणा भवन एवं अन्य सन्ननिर्माण कर्मकार (नियोजन तथा सेवा शर्तें विनियमन) अनियम 2005 के नियम 28 में उपनियम 3 खंड 3 में पूरी तरह पक्षपातपूर्ण व श्रमिक विरोधी संशोधन किया है। अब उक्त विषय से संबंधित सभी पंजीकृत श्रमिक यूनियन की बजाय मात्र 7 ट्रेड यूनियनों से संबद्ध ट्रेड यूनियनों को ही श्रमिकों की वेरिफिकेशन करने का अधिकार होगा। यह फरमान भारतीय संविधान के तहत मिले यूनियन बनाने और मनपसंद यूनियन का सदस्य बनने के मौलिक अधिकार पर हमला है। जब सभी यूनियन एक ही कानून भारतीय ट्रेड यूनियन एक्ट 1926 के प्रावधानों के अनुसार पंजीकृत हैं तो मात्र 7 यूनियनों को ही श्रमिकों की वेरिफिकेशन का अधिकार देना तथा अन्य सभी पंजीकृत यूनियनों से अधिकार छीनना पूरी तरह पक्षपातपूर्ण है । उन्होंने सरकार से मांग की कि इस श्रमिक विरोधी संशोधन को तुरंत रद्द किया जाए और सभी पंजीकृत यूनियनों द्वारा श्रमिकों की वेरिफिकेशन करने का अधिकार बहाल किया जाए, अन्यथा सरकार के इस तानाशाहीपूर्ण फरमान के खिलाफ यूनियन आंदोलन तेज करेगी ।
यूनियन के महासचिव सुरेश कुमार, यूनियन के राज्य उपप्रधान पाल सिंह, जन संघर्ष मंच हरियाणा की महासचिव कामरेड सुदेेश कुमारी, नरेश कुमार, ईश्वर गुहणा, रामपाल, चांदीराम, रामचंद्र, देवीदयाल आदि ने भी संबोधित किया।