जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हुई आगजनी, लूटपाट और हत्याओं के विरोध में अब 35 बिरादरी ने सड़क पर उतर आई है। वीरवार को डीसी ऑफिस में प्रदर्शन करने पहुंचे इन लोगों ने जाट समुदाय का सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक रूप से बहिष्कार करने की बात कही है। प्रदर्शनकारियों ने डीसी सीजी रजनीकांतन को ज्ञापन सौंपकर लूटपाट, बलवे और हत्या करने वालों को गिरफ्तार करने की मांग की है। साथ ही आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई न होने पर आंदोलन करने की धमकी दी है। 36 बिरादरी के लोगों ने यहां पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा के खिलाफ भी जमकर नारेबाजी की। वीरवार को 35 बिरादरी एकता मंच के बैनर तले सुबह ही सेक्टर 10 में भारी संख्या में लोग एकत्रित हुए, जहां राजेंद्र सिंह के संयोजन में एक बैठक का आयोजन किया गया। बैठक के बाद सभी लोग जुलुस निकालते हुए जिला सचिवालय पहुंचे। लोगों ने नारेबाजी करते हुए जमकर प्रदर्शन किया।
उपायुक्त कार्यालय पर इस प्रदर्शन में शामिल लोगों को विभिन्न बिरादरियों के लोगों ने संबोधित किया। जिसके बाद मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के नाम उपायुक्त को एक ज्ञापन सौंपा।
जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि आरक्षण आंदोलन की आड़ में उपद्रवियों ने गांवों से लेकर कस्बे व शहरों में जमकर उत्पात मचाया और पूरे प्रकरण में गैर जाट लोगों को निशाना बनाया गया। भारी संख्या में लोगों के घर, प्रतिष्ठान जलाए गए तो कई लोगों की जान भी चली गई। आंदोलन के दौरान उपद्रवियों के निशाने पर आए लोग वीरवार को डीसी ऑफिस परिसर में जमा हुए। यहां पर इन लोगों ने जमकर नारेबाजी की और हिंसा करने वालों और कराने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि जल्द ही आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं की गई तो वे बड़ा आंदोलन करेंगे।
इस अवसर पर गुज्जर सभा के प्रधान राम रत्न कटारिया, यादव सभा के प्रदेश महासचिव हवा सिंह, राम कुमार रंबा, जीता राम सैन, श्याम लाल जांगड़ा, कृष्ण चंद यादव, जयनारायण कौशिक, अनिल कुमार, प्रदीप सिंह, प्रेम चंद सहित भारी संख्या में लोग मौजूद रहे।
नेताओं और मंत्रियों पर साधा निशाना राजेंद्र सिंह ने आरोप लगाए कि सरकार की ढील और एक समुदाय विशेष के मंत्रियों और विपक्षी नेताओं की शह पर यह साजिश रची गई। लोगों ने मांग की है कि इन सभी की भूमिकाओं और आगजनी की घटनाओं की न्यायिक जांच कराई जाए। लोगों ने भाजपा के दो केंद्रीय मंत्रियों और प्रदेश सरकार के दो मंत्रियों को भी बर्खास्त करने की भी मांग की है। लोगों ने पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा के खिलाफ भी जमकर नाराजगी जाहिर की और नारे लगाए। पुलिस की कार्यशैली पर उठाए सवाल प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि पूरे प्रकरण में प्रशासन, पुलिस अधिकारी व कर्मचारी मूकदर्शक बने रहे, जिससे उपद्रव मचा रहे लोगों का उत्साह बढ़ा। 35 बिरादरी एकता मंच के संयोजक ने इस मौके पर कहा कि बैठक में बहिष्कार का निर्णय लिया गया है। सभी लोग अब सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक तौर पर जाट समुदाय के प्रतिनिधियों का बहिष्कार करेंगे।
ये रही मुख्य मांगे1. उपद्रवियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए2. उपद्रवियों के खिलाफ दर्ज मामले वापस न लिए जाएं3. उपद्रवियों के लिए घोषित 10 लाख की मुआवजा राशि न दी जाए4. जिन लोगों के घर व प्रतिष्ठान जलाए गए उन्हें शीघ्र मुआवजा दिया जाए5. उपद्रवियों की पहचान कर उनसे मुआवजा राशि वसूल की जाए6. लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए7. उपद्रव मेें मारे गए निर्दोष लोगों के परिजनों को 50 लाख मुआवजा व नौकरी दी जाए8. आरक्षण में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुसार नियमों का पालन किया जाए9. भविष्य में इस प्रकार के उपद्रवों पर रोक लगाने के लिए सख्त कदम उठाए जाए