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..... यहां न मिल रहा मान सम्मान और न हो रहा कोई काम

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कुरुक्षेत्र। ... साहब यहां न मान सम्मान मिल रहा है और न ही कोई काम हो रहा है। हम जनता के बीच जा रहे हैं तो लोग काम पूछ रहे है। लापरवाही से काम लंबित पड़े हैं बल्कि बजट भी लैप्स हो रहा है। ऐसे में सरकार की छवि खराब हो रही है। यह दर्द जिला पार्षदों का है, जो बुधवार को जिला परिषद की पंचायत भवन में हुई बैठक में उस समय छलक उठा जब चेयरमैन गुरदयाल सैनी ने उनसे किसी प्रकार की समस्या पूछी।
सुरेंद्र माजरी, सुकरम, रीना सैनी, जयबीर सैनी सहित अधिकतर पार्षदों ने एक सुर में बैठक में ही मौजूद विशेष रूप से पंचायत विभाग के अधिकतर अधिकारियों पर ये सवाल उठाए तो अध्यक्षता कर रहे चेयरमैन गुरदयाल सुनहेड़ी भी भड़क उठे और न केवल बीडीपीओ स्तर के इन अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई तो कहा कि यह तो गदर मचाया हुआ है, किसी भी पार्षद को कोई अधिकारी हल्के में न लें। किसी अधिकारी को भ्रम है तो वह चुनाव लड़कर देख लें। मुख्यमंत्री जिला परिषद को ऊपर उठाने के लिए भरसक प्रयास कर रहे है, लेकिन अधिकारी उन्हें दबाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में ऐसे अधिकारी के खिलाफ शिकायत मिलते ही कार्रवाई की जाएगी। करीब डेढ़ घंटा तक चली इस बैठक में अधिकारियों को कई बार निशाने पर लिया गया।
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आदेशों व अनुमति के बावजूद भी बस क्यू शैल्टर, आंगनबाड़ी केंद्र निर्माण कार्य लंबित रहने पर कभी एडीसी तो कभी चेयरमैन ने उन्हें निशाने पर लिया। हालांकि कई अधिकारियों ने सफाई भी दी, लेकिन उन्हें संतुष्ट नहीं कर पाए। इस पर एडीसी ने उन्हें चेेतावनी देते हुए कड़े निर्देश दिए कि अगले दो दिनों में लंबित पड़े काम शुरू कर रिपोर्ट उन्हें देनी होगी, इसमें लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा। बता दें कि बैठक में तीन माह पहले हुई परिषद की बैठक की कार्रवाई की समीक्षा की गई, जिसमें खुलासा हुआ कि उस समय करीब साढ़े तीन करोड़ की लागत से आंगनबाड़ी केंद्रों के साथ-साथ 17 बस क्यू शैल्टर जिप की ओर से बनाए जाने थे, जिनमें से अभी तक दो ही बन पाए तो वहीं आंगनबाड़ी केंद्र भी करीब आधा दर्जन ही बन पाए हैं।


एमपी एमएलए कहते हैं तो आधी रात को पहुंच जाते हैं अधिकारी, हमें सूचना तक नहीं देेते
पार्षदों ने आरोप लगाते हुए कहा कि बीडीपीओ सहित अन्य अधिकारी एमपी , एमएलए के कहते ही आधी रात को भी पहुंच जाते हैं, लेकिन उन्हें गंभीरता से नहीं लिया जाता। यहां तक कि अधिकारी गांव के सरपंच से मिलकर बैठकें कर लेते हैं और उन्हें सूचना तक नहीं दी जाती। किसी भी कार्य को लेकर भी उनसे कोई बातचीत तक नहीं की जाती। एस्टीमेट भी एक-एक सप्ताह तक पड़े रहते है, जिन्हें कार्यालय तक नहीं पहुंचाया जाता, जिससे काम नहीं हो पाते। यहीं कारण कि करीब तीन माह पहले हुई हाउस की बैठक में दिए निर्देशों की भी पालना नहीं की गई। आज तक करीब साढ़े तीन करोड़ के कार्यों में से अधिकतर शुरू तक नहीं किए जा सके। उन्हें सरकार की ओर से शुरू किए जाने वाले बीपीएल, आवास योजना सर्वे से लेकर अन्य योजानाओं की भी जानकारी नहीं दी जाती।


आचार संहिता को देख मचा हड़कंप
आगामी चुनावों के चलते मार्च माह में संभावित आचार संहिता की संभावना से अधिकारियों से लेकर पार्षदों में भी हड़कंप सा मच गया है। जिला भर में पार्षदों द्वारा करीब साढ़े तीन करोड़ के आंगनबाड़ी केंद्र व बस क्यू शैल्टर के अधिकतर कार्य शुरू तक नहीं किए जा सके, जिसके चलते बुधवार को बैठक में एडीसी भी अधिकारियों की लापरवाही पर हैरान रह गए तो उन्होंने कड़े निर्देश दिए कि अगले दो दिन में ये सभी कार्य हर हालत में शुरू किए जाएं। उन्होंने एसीआर तक में कार्रवाई को लेकर बात की तो अधिकारी बगलें झांकने लगे।


नहीं पहुंचा बिजली निगम के पांच एक्सईएन, जारी किए कारण बताओ नोटिस
बैठक में बिजली निगम के इस्माईलाबाद के ही एक्सईन पहुंचे जबकि थानेसर, पिहोवा, पिपली, लाडवा व शाहबाद के एक्सईएन नहीं पहुंचे। उनकी जगह आए अधिकारी भी इस पर कोई जवाब नहीं दे पाए तो जिप चेयरमैन ने तत्काल ही कारण बताओ नोटिस जारी किए।
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दी गई कड़ी चेतावनी, फिर भी लापरवाही रही तो होगी कार्रवाई : चेयरमैन
जिप चेयरमैन गुरदयाल सुनहेड़ी ने बैठक के बाद बातचीत में बताया कि अधिकारियों में न आपसी तालमेल है और न ही विकास कार्य कराने में रुचि दिखा रहे हैं। तीन माह से कार्य लंबित पड़े हैं, जिसके चलते कड़ी चेतावनी दी है और अब तय समय में कार्य नहीं हुए तो उनके खिलाफ अवश्य ही कार्रवाई की जाएगी।
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