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कुरुक्षेत्र जिला में 75 किस्म के

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कुरुक्षेत्र में 75 किस्म के 8 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य
- स्कूलों में छठी से बारहवीं कक्षा तक के 1 लाख 65 हजार बच्चे लगाएंगे पौधे
- 200 पंचायतों को लगाने होंगे 20 हजार पौधे, प्रत्येक आंगनवाड़ी के लिए निर्धारित किए 5 पौधे
- सरकारी कार्यालयों का टारगेट 10 पौधे
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। दो साल से औसत से कम बारिश और गिरते भू-जल स्तर का दंश झेल रहे कुरुक्षेत्र को अब पौधे लगार बचाने की योजना है। इसके लिए जिले भर में पौध रोपण अभियान चलाया जाएगा। जिले में 75 किस्म के 8 लाख पौधे रोपित किए जाएंगे। जिले के 200 गांवों की पंचायतें 20 हजार पौधे लगाएंगी तो कक्षा छठीं से बारहवीं तक के 1 लाख 65 हजार विद्यार्थी एक-एक पौधा लगाएंगे।
कुरुक्षेत्र को ग्रीन सिटी के रूप में विकसित करने की कमान डीसी डॉ. एसएस फुलिया ने संभाली है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए डीसी ने बुधवार को वन, शिक्षा व पंचायत विभाग के साथ-साथ ब्लॉक स्तर के अधिकारियों की एक संयुक्त बैठक ली। डीसी ने कहा कि पिछले दो साल से कुरुक्षेत्र में औसतन पिछले वर्षों के अपेक्षा बरसात कम हो रही और यहां का भूजलस्तर भी काफी नीचे चला गया है। इसी के चलते पौधरोपण की योजना बनाई गई है। शिक्षा विभाग ने 14 हजार 31 पौधे लगाए हैं। इनमें थानेसर ब्लॉक में 2196, पिहोवा में 1497, लाडवा व बाबैन में 6789 व शाहबाद में 3559 पौधे लगाए जा चुके हैं।
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डीसी ने कहा कि इस अभियान में प्राइवेट स्कूलों को भी शामिल किया जाएगा। जिले के 151 प्राइवेट स्कूलों के प्रतिनिधियों की बैठक सोमवार को 11 बजे पंचायत भवन के सभागार में बुलाई गई है। इसके अलावा हर गांव पेड़ की छांव अभियान के तहत जिले के 200 गांवों में 20 हजार पौधे लगाए जाएंगे। इन पौधों को पंचायत और लोग स्वयं लगाएंगे और इनकी देखभाल भी करेंगे। इसके अलावा सभी सरकारी कार्यालयों को कम से कम 10 पौधे लगाने का लक्ष्य दिया जाएगा और समाजसेवी और धार्मिक संस्थाओं के माध्यम से भी हजारों पौधे लगाने की योजना तैयार की गई है। जिले के सभी पार्कों, केयू, आयुर्वेदिक कॉलेज, एनआईडी, मथाना सेंट्रल स्कूल, पलवल राजकीय कॉलेज के साथ-साथ सभी शिक्षण संस्थानों में एक अभियान के तहत पौधे लगाए जाएंगे। बैठक में एडीसी अनिश यादव, डीडीपीओ कपिल शर्मा, जिला वन अधिकारी विरेंद्र गिल, जिला शिक्षा अधिकारी नमिता कौशिक, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी सतनाम सिंह, पीओआईसीडीएस राजबाला कटारिया सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।

एनएसएस के विद्यार्थी शनिवार को लगाएंगे हजारों पौधे
शनिवार को कुरुक्षेत्र जिले के सभी एनएसएस के विद्यार्थी एक साथ पूरे जिले में हजारों पौधे लगाएंगे। इन पौधों को लगाने की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी वन विभाग व शिक्षा विभाग के अधिकारियों को सौंपी गई है।

वन विभाग स्वयं लगाएगा 5 लाख पौधे
डीसी ने कहा कि कुरुक्षेत्र को ग्रीन सिटी बनाने में अहम भूमिका वन विभाग की होगी। इस विभाग के अधिकारी सड़कों के किनारे, पंचायत की शामलात भूमि, पार्कों सहित अन्य खाली जगहों पर इस सीजन में 5 लाख पौधे लगाएंगे। वहीं जिलेे में 1 हजार 75 आंगनबाड़ी केंद्रों में कार्यरत कर्मचारी को कम से कम 5 पौधे लगाने होंगे। इसके लिए जिला योजना अधिकारी राजबाला कटारिया को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
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11 नर्सरियों में हैं 8 लाख 79 हजार 240 पौधे
उपायुक्त डॉ. एसएस फुलिया ने कहा कि वन विभाग की जिले की 11 नर्सरियों में कुल 8 लाख 79 हजार 240 पौधे हैं। छायादार किस्म के पौधों में नीम के 36 हजार 375, बरगद के 2775, बकैण और डैंक के 18949, भैंरा के 1857, पीपल के 2815, पिलखन के 10 हजार 237, सागवान के 2280, पापरी के 8730, कदम्ब के 15 हजार 290, महुआ के 4414, मोलसिरी के 6220, काजेलिया 10 हजार 170, गुल्लर के 9274, गुमहर के 725 पौधे हैं। टिंबर किस्म के पौधों में शीशम के 1 लाख 42 हजार 247, सफेदे के 12 हजार 400, अलांटस के 9572, अर्जुन के 1 लाख 31 423, पोपलर के 50 हजार, शिरिस के 44 हजार 45, जाकरेन्दा के 2300, तून के 11 हजार 252 पौधे है। फ्यूल देने वाली किस्म में कीकर के 5600, पहाड़ी पापरी के 810, ढेक के 3439, सजावट की किस्म में अल्सटोलिनया 3565, अमलताश के 11220, गुलमोहर के 23945, कुसुम के 340, मालेशिया के 150, लैजिस्टोनिया के 10 हजार 15, चकरासियां के 21 हजार 30, मोगनी के 320, सेसा गालुका के 29 हजार 256, बोटल बुश के 7500, सेसिया शामिया 27 हजार 370, सिल्वर आक के 4615, काजुरियान के 1 हजार 10, हाल्दु के 1840, सागवान के 420, सुहांजन के 6 हजार, बुगनबेल 295, रात की रानी 384, दिन का राजा 120, गुलाब के 2634, कनेर के 1320, कचनार के 5505, गुडेल के 4300, सीता अशोक 1600, अशोक के 350, चांदनी के 3730, तुलसी के 250, मेहंदी के 650, पुटेरमजिवा के 145 पौधे शामिल है। इसके अलावा फलों में जामुन के 66 हजार 660, अमरुद के 35 हजार, अनार के 1 हजार, पपीते के 1850, अंगूर के 550, बालफटेर के 9620, नीम्बू के 1 हजार, आम के 1155, आंवला के 10 हजार 471, शहतूत के 1300, लसूड़े के 16 हजार 950, गलगल के 180, कटहल के 560, बेरी के 573, सुहांजना के 9330, इमली के 9795, आडू के 700, आलू बुखारा के 465 पौधे नर्सरियों में हैं।
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