कुरुक्षेत्र। महाकाल अष्टमी पर हवन में आहुति डालते स्वामी शक्तिदेव । व अन्य । विज्ञप्ति
कुरुक्षेत्र। महाकाल अष्टमी के पावन पर्व पर जय ओंकार आश्रम स्थित श्री शक्ति दुर्वासेश्वर महादेव के चरणों में 251 कुंडीय ओंकार महायज्ञ का आयोजन हुआ। जय ओंकार अंतरराष्ट्रीय सेवाश्रम संघ एवं विश्व के एकमात्र भगवान श्री ब्रह्मा मंदिर में हुए यज्ञ में हरियाणा, पंजाब, दिल्ली सहित विभिन्न प्रदेशों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया।
यज्ञ में विद्वान ब्राह्मणों ने मां दुर्गा के विभिन्न रूपों और ओंकार भगवान के 1008 मंत्रों के उच्चारण के साथ यज्ञ में आहुतियां डलवाई। महायज्ञ में ज्वाला ज्योति संघ के अध्यक्ष स्वामी संदीप ओंकार ने प्रज्ज्वलित की। वहीं यज्ञ की पूर्णाहुति संघ के संस्थापक स्वामी शक्तिदेव और स्वामी संतोष ओंकार ने की।
श्रद्धालुओं ने महादेव के चरणों में नतमस्तक होकर यज्ञ कुंडों पर बैठकर आहुतियां डालीं और मंगल की कामना की। भजन मंडली ने कीर्तन किया, जिसमें श्रद्धालु उत्साह से झूमे।
स्वामी शक्तिदेव ने श्रद्धालुओं को प्रेरित करते हुए कहा कि जो भी इंसान गुरुदेव की कृपा से महाकाल के चरणों में नतमस्तक होकर हाजिरी लगाता है, उसे जीवन में हर तरह की खुशी प्राप्त होती है। महाकाल अष्टमी के दिन महादेव के चरणों में हाजिरी लगाने से जीवन में कभी अकाल कष्ट नहीं आता और उस जीव का वंश निरंतर चलता रहता है।
501 कन्याओं का हुआ सामूहिक पूजन
ओंकार यज्ञ के बाद भंडारे का भी आयोजन हुआ। इससे पहले मां के स्वरूपों में विद्यमान 501 कन्याओं का सामूहिक पूजन भी किया गया। संघ संचालक पंडित शिवनारायण दीक्षित ने कहा कि गुरुदेव जी के सानिध्य में भारत के प्रत्येक क्षेत्र में ओंकार महायज्ञ का आयोजन किया जाता है। उसी श्रृंखला के अंतर्गत गुरुदेव जी के जन्मोत्सव पर 251 कुंडीय ओंकार महायज्ञ हुआ।
कुरुक्षेत्र। महाकाल अष्टमी पर हवन में आहुति डालते स्वामी शक्तिदेव । व अन्य । विज्ञप्ति