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मां और मातृत्व पर मानुषी के संदेश को विश्व ने सराहा : रामनाथ कोविंद

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अमर उजाला ब्यूरो
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कुरुक्षेत्र।
अपने प्रवास के दौरान राष्ट्रपति हरियाणा की बेटियों के कीर्तिमान के बावजूद उनकी स्थिति को लेकर चिंतित दिखे। देश के प्रथम नागरिक का पदभार संभालने के बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद पहली बार हरियाणा की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक राजधानी कुरुक्षेत्र आए थे। इस मौके पर उन्होंने सबसे पहले अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव का उद्घाटन किया। इसके बाद केयू श्रीमद्भगवद् गीता सदन में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ किया। संगोष्ठी गीता पर आधारित थी, लेकिन राष्ट्रपति का संबोधन बेटियों पर फोकस रहा। बेटियों की पीड़ा को समझने के साथ उनकी टीस भी उभर कर आ गई। उन्होंने अपने संबोधन में साफ किया कि अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती का निमंत्रण इसलिए भी स्वीकार किया ताकि बेटियों को लेकर संदेश दे सकूं। राष्ट्रपति ने हरियाणा की बेटी सुष्मा स्वराज, कल्पना चावला, संतोष यादव, साक्षी मलिक, गीता-बबीता, विनेश फोगाट और मानुषी छिल्लर की उपलब्धियों को राज्य ही नहीं पूरे राष्ट्र के लिए गौरव की बात बताई। उन्होंने लिंगानुपात के प्रति चिंता के साथ उसमें तेजी से हो रहे सुधार की सराहना की। कहा कि हरियाणा की बेटियां आज हर क्षेत्र में आगे हैं। इसका का ताजा उदाहरण मानुषी छिल्लर है। मिस वर्ल्ड का ताज पहनने के बाद छिल्लर ने जो कहा उसे विश्वभर में सराहा गया। राष्ट्रपति ने संबोधन के दौरान एक पिता-पुत्र और उनके घोड़े की कहानी भी सुनाई।

केयू में डेढ़ घंटे के कार्यक्रम में प्रोटोकोल
केयू का श्रीमद्भगवद् गीता सदन अंतरराष्ट्रीय गोष्ठी के दौरान खचाखच भरा रहा। मंचासीन राष्ट्रपति के दो साइड में लगी कुर्सियों में से एक कुर्सी प्रोटोकोल तोड़ते हुए डेढ घंटे तक खाली रही। यह कुर्सी हरियाणा के एक उच्च अधिकारी के लिए लगाई थी।
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वीसी को नहीं मिला बोलने का अवसर
केयू में आयोजित कार्यक्रम के दौरान पहले भी राष्ट्रपति और अन्य दिग्गज हस्तियां पहुंचती रही हैं। लेकिन यह पहला मौका रहा, जब केयू कुलपति को स्वागत या अतिथियों का आभार प्रकट करने के लिए बोलने का अवसर तक नहीं मिला। हालांकि, मंच पर कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. कैलाश चंद्र शर्मा मौजूद जरूर रहे।

2003 में उपराष्ट्रपति ने थी शिरकत
गीता जयंती के पिछले 25 वर्षों में यह पहला अवसर है, जब देश के राष्ट्रपति ने इस महोत्सव में शिरकत की है। हालांकि, छह दिसंबर 2016 को तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी को पहली बार इस महोत्सव का उद्घाटन करने का अवसर बना था, लेकिन उसी दिन मुख्यमंत्री जयललिता के निधन के कारण राष्ट्रपति का प्रोग्राम रद्द हो गया। इससे पहले 2003 में एनडीए सरकार के दौरान तत्कालीन उपराष्ट्रपति भैरोसिंह शेखावत और तत्कालीन उप प्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी भी इस समारोह में शिरकत कर चुके हैं।

तीर्थ पूजन के बाद देसी गाय के दूध से दिया अर्घ्य
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ब्रह्मसरोवर के अवलोकन के दौरान प्रसन्न दिखे। यहां आचार्य बलराम गौतम, गोपाल कृष्ण गौतम, अनिल गौतम, सोमनाथ शर्मा और रुद्र गौतम कर्मकांडी ब्राह्मणों ने राष्ट्रपति को तीर्थ के जल का आचमन कराया। तिलक और मोली बांधने के बाद स्वस्तीवाचन तीर्थ पूजन कराया। इसके बाद महामहिम ने देसी दूध के गाय से अर्घ्य दिया।
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वंशावली में पुरखों का नाम देखने के लिये राष्ट्रपति में दिखी जिज्ञासा
कोली समाज के पुरोहित एवं श्री ब्राह्मण तीर्थ पुरोहित सभा के अध्यक्ष यशेंद्र शर्मा और उनके साथ पंडित बृजमोहन शर्मा ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को एक पुरानी वंशावली भी दिखाई। इस वंशालवली में कोली समाज के बुजुर्गों के तीर्थ आने का उल्लेख तो मिला, लेकिन जिज्ञासा के बावजूद वंशावली में राष्ट्रपति के पिता, दादा और परदादा का उल्लेख नहीं मिला।
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