अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
मंत्रोच्चारण और शंखनाद के बीच राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कुरुक्षेत्र के अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव का आगाज किया। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने केयू के श्रीमद्भगवद् गीता सदन में आयोजित ‘डिजिटल युग में स्व अन्वेषण: श्रीमद्गीता दर्शन’ विषय पर अंतरराष्ट्रीय गोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। गोष्ठी से पहले राष्ट्रपति ब्रह्मसरोवर पहुंचे। वहां तीर्थ के पवित्र जल का आचमन कर पवित्र ग्रंथ गीता का पूजन किया। इसके साथ ही उन्होंने विधिवत रूप से 25 नवंबर से 30 नवंबर तक चलने वाले अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव का शुभारंभ किया।
शनिवार को ब्रह्मूसरोवर के पुरुषोतमपुरा बाग में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का हरियाणवी परंपरागत वाद्य यंत्रों के बीच हरियाणा के राज्यपाल प्रोफेसर कप्तान सिंह सोलंकी, हिमाचल के राज्यपाल आचार्य डॉ. देवव्रत, मुख्यमंत्री मनोहर लाल, गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद ने स्वागत किया। इसके पश्चात राष्ट्रपति ने ब्रह्मसरोवर के पवित्र जल का आचमन कर पूजा की। पवित्र ग्रंथ गीता पर पुष्प अर्पित कर पूजन किया। राष्ट्रपति ने गीता पूजन के बाद 200 विद्यार्थियों और विद्वानों के साथ गीता यज्ञ में पूर्णाहुति दे कर अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव का शुभारंभ किया। इसके बाद राष्ट्रपति ने श्रीकृष्णा सर्किट के तहत विकसित की जाने वाली गीता स्थली ज्योतिसर के मॉडल का अवलोकन किया। इस दौरान उपायुक्त सुमेधा कटारिया ने ज्योतिसर के मॉडल के बारे में जानकारी दी। इसके बाद राष्ट्रपति ने सरस्वती नदी के मॉडल का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने सरस्वती नदी के विकास की जानकारी राष्ट्रपति को दी। इसके बाद उन्होंने सरस्वती पर किए गए शोध कार्यों और इतिहास पर लगी प्रदर्शनी का अवलोकन किया। सबसे अंत में राष्ट्रपति ने कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के सदस्यों और अधिकारियों के साथ एक ग्रुप स्मृति फोटो कराया।
इस अवसर पर हरियाणा के शिक्षा एवं पर्यटन मंत्री रामबिलास शर्मा, नगर निकाय मंत्री कविता जैन, परिवहन मंत्री कृष्ण पंवार, सांसद रामकुमार कश्यप, थानेसर विधायक सुभाष सुधा, लाडवा विधायक डॉ. पवन सैनी, सूचना, जन संपर्क एवं भाषा विभाग के निदेशक समीर पाल सरो, केडीबी के सदस्य सचिव एवं राज्यपाल के सचिव अमित अग्रवाल, उपायुक्त सुमेधा कटारिया, केडीबी के मानद सचिव अशोक सुखीजा, भाजपा के जिलाध्यक्ष धर्मवीर मिर्जापुर, नगर परिषद की अध्यक्षा उमा सुधा, आरएसएस के विभाग कार्यवाहक डॉ. प्रीतम सिंह आदि उपस्थित थे।
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राष्ट्रपति ने किया शिलान्यास
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने गीता ज्ञान संस्थानम के अंतर्गत बनने वाले अंतरराष्ट्रीय भगवद् गीता शोध केंद्र और संदर्भ ग्रंथालय का शिलान्यास किया। शनिवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद गीता ज्ञान संस्थानम के अंतर्गत बनने वाले अंतरराष्ट्रीय भगवद गीता शोध केंद्र एवं संदर्भ ग्रंथालय का शिलान्यास करने के लिए परिसर में पहुंचे तो वहां काव्या और पारनिका ने तिलक लगाकर उनका अभिनंदन किया। इसके बाद राष्ट्रपति ने करीब 40 करोड़ रुपये से बनने वाले गीता शोध केंद्र और संदर्भ ग्रंथालय का का शिलान्यास किया। इस दौरान हरियाणा के राज्यपाल प्रोफेसर कप्तान सिंह सोलंकी, हिमाचल के राज्यपाल आचार्य डॉ. देवव्रत, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल, गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद, गुजरात से आए आचार्य सभा के राष्ट्रीय महासचिव परमात्मानंद, प्रसिद्ध कथावाचक संजीव कृष्ण शास्त्री मौजूद रहे। इस दौरान राष्ट्रपति को बताया गया कि गीता ज्ञान संस्थानम में विश्व भर में गीता पर हुए शोध को संकलित किया जाएगा। इस संस्थान में गीता पर शोध करने वाले शोधार्थियों को संबंधित सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। गीता ज्ञान संस्थानम की परियोजना पर लगभग 100 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
डिजिटल युग की युवा पीढ़ी तनाव,असुरक्षा और बढ़ रही हैं दुविधाएं-कोविंद
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि मटीरियलिज्म और प्रतिस्पर्धा से घिरी, डिजिटल युग की युवा पीढ़ी में तनाव, असुरक्षा और दुविधाएं बढ़ रही हैं। ऐसे में गीता उनके लिए आध्यात्मिक औषधि सिद्ध होगी। शनिवार को वह कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के श्रीमद्भगवद् गीता सदन में आयोजित अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव कार्यक्रम में अंतर्राष्ट्रीय विचार गोष्ठी को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि गीता का संदेश देश और काल से ऊपर है। प्राचीन काल के कृषि पर आधारित समाज से लेकर परवर्ती काल में वाणिज्य और उद्योग पर आधारित समाज तक और उसके भी बाद की नॉलेज सोसायटी तक गीता की प्रासंगिकता हर युग में रही है। साथ ही आगे भी बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि आधुनिक युग में, पश्चिम में अमेरिका से लेकर पूर्व में जापान तक, योग की लोकप्रियता योगशास्त्र गीता की अंतरराष्ट्रीय और युगातीत प्रासंगिकता को रेखांकित करती है। आज के डिजिटल युग में गीता के संदेश को पूरे विश्व में प्रसारित करना और भी आसान हो गया है। पूरी मानवता के लिए योगशास्त्र गीता अत्यंत उपयोगी है। विश्व समुदाय 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने का निर्णय इसलिए कर पाया कि योग पूरी मानवता के कल्याण के लिए है। गीता पूरे विश्व के लिए आध्यात्मिक दीप स्तंभ है। अध्यात्म भारत की आत्मा है, जो पूरे विश्व के लिए भारत का उपहार है। गीता भारतीय अध्यात्म का सबसे लोकप्रिय और प्रसिद्ध ग्रंथ है। राष्ट्रपति ने कहा कि महाभारत के सबसे महत्वपूर्ण खंड को महाकवि वेदव्यास ने स्त्रीलिंग का चयन कर श्रीमद् भगवद्गीता कहा। इतने महान शब्द-शिल्पी ने स्त्रीलिंग का चयन संभवत: मातृ-शक्ति की गरिमा को मान्यता देने की नीयत से ही किया होगा। इसे आज महिला सशक्तीकरण कहते हैं। इसी सोच के अनुरूप हरियाणा सरकार ने राज्य में स्त्री शक्ति को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं। वर्ष 2011 में हरियाणा में एक लड़कों की तुलना में 830 लड़कियां हुआ करती थीं। जनवरी 2015 में बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान की शुरुआत के बाद अब लड़कियों का यह अनुपात बढ़कर 937 हो गया है। इससे पूर्व गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद, अमेरिका से आए सतपाल सिंह, अमेरिका के वैदिक अध्ययन संस्थान के डेविड फ्राले ने गीता पर अपने विचार प्रकट किए।
गीता है जीवन और मन का सार : सीएम
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि गीता जीवन और मन का सार है। 21 वीं सदी में गीता डिजिटल युग की है। ऑनलाइन व्यवस्था परिवर्तन के माध्यम से गीता का संदेश हम विश्व में पहुंचा सकते हैं और हरियाणा में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने की हरियाणा सरकार ने आईटी के माध्यम से पहल की है। आज राजनीतिज्ञों के लिए भी राजनीतिक गीता लिखी जाने की आवश्यकता है। इसे उनके अनुरोध पर महामंडलेश्वर गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने पूरा किया है। आज अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव पर इस राजनीतिक गीता का विमोचन किया जा रहा है। इसे सभी राजनेताओं को पढ़ना चाहिए।
इनकी रही उपस्थिति
इस मौके हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल, हरियाणा के शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा, जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री डॉ. बनवारी लाल, परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार, सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा विभाग की मंत्री कविता जैन, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्यमंत्री कृष्ण कुमार बेदी, विधायक सुभाष सुधा, बखशीश सिंह विर्क, स्वामी परमानंद महाराज, हरियाणा के मुख्य सचिव डीएस ढेसी, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति केसी शर्मा, पंजाब एवं हरियाणा के उच्च न्यायालय के न्यायाधीश राजेश बिंदल आदि उपस्थित थे।