दिल्ली सहित हरियाणा भर में स्मॉग से कोहराम मचा हुआ है। जिसके साथ-साथ धर्मनगरी भी इसकी चपेट में आई हुई है। स्मॉग से वातावरण को प्रदूषित करने में अन्य कारणों के साथ-साथ किसानों द्वारा धान के अवशेष जलाने को भी अहम माना जा रहा है। जिसमें जिले के किसानों का भी कम योगदान नहीं रहा है और यहां के किसानों ने भी प्रशासन व सरकार के आदेशों को दरकिनार कर धड़ल्ले से फसल अवशेष जलाए है। धारा 144 लगाए जाने के बावजूद भी किसान किस स्तर पर धान के अवशेष आग के हवाले पूरा सीजन भर करते रहे, इसका अंदाजा इसी से ही लगाया जा सकता है कि कृषि एवं किसान कल्याण विभाग और पर्यावरण विभाग ने जिलेभर के धान के अवशेष जलाने वाले 207 किसानों की पहचान की है। विभाग ने इन किसानों पर 4 लाख 58 हजार रुपये का जुर्माना भी ठोका है। विभाग इसे बड़ी कार्रवाई मान रहा है। हालांकि किसानों की ही मानें तो कई अन्य भी ऐसे हैं जिन पर इन विभागों की नजरें नहीं पहुंच पाई हैं।
जिला और खंड मुख्यालय से अंतिम छोर पर स्थित गांवों के किसानों की ओर से फूंके गए अवशेषों को तो अधिकारी देख ही नहीं पाए हैं वहीं कई किसान ऐसे भी कार्रवाई के दौरान सामने आए जो जुर्माना देने को तैयार थे, लेकिन अवशेष न जलाने को लेकर सहमत नहीं हुए।
दिवाली के अगले दिन हुई आग की लपटें शांत
खेतों में अवशेषों में लगाई गई आग की लपटें लगभग पूरा सीजन भर उठती रही, जो दिवाली से अगले दिन शांत हो पाई। अधिकारियों की मानें तो जिले में दिवाली के बाद अवशेष जलाने का एक भी मामला सामने नहीं आया है। अवशेष जलाने की अधिकतर घटनाएं पीआर धान की कटाई के दौरान ही हुईं। अब बासमती धान की कटाई चलने के बावजूद किसान इसके अवशेष जलाने को तैयार नहीं हैं। जहां बासमती धान की कटाई हाथों से ही करवाई जा रही है वहीं इसकी पुराल को किसान पशुचारे के रूप में एकत्र करने में भी जुटे हैं।
हर ब्लॉक में बनाई गई थीं टीमें : डॉ कर्मचंद
कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. कर्मचंद का कहना है कि धान के अवशेष जलाने के मामले में अब शांत हो गए हैं। कृषि एवं पर्यावरण विभाग ने तत्परता से कार्रवाई करते हुए उक्त किसानों पर कार्रवाई भी की है। अभी भी किसानों को जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने माना कि जिले के थानेसर ब्लॉक में अवशेष जलाने के मामले अधिक हुए हैं, जबकि पिहोवा में गत्ता बनाने के कारखाने होने के चलते किसानों ने अवशेष कम जलाए हैं।