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ब्लू व्हेल गेम, अभिभावकों की उड़ाई नींद

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फोटो 23 से 27
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जान बचाने के लिए ‘जिगर के टुकड़े’ नजर
ब्लू व्हेल गेम ने अभिभावकों की उड़ाई नींद, बच्चों की हरकतों से लेकर स्मार्ट फोन पर भी रखने लगे कड़ी निगाहें
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। साइकोपैथिक गेम ब्लू व्हेल किशोरों से लेकर युवाओं के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। इससे अभिभावकों की नींद उड़ गई है। बढ़ते मामले के बाद अब अभिभावक भी चौकन्ना नजर आने लगे हैं। हालांकि अधिकतर अभिभावकों को इस गेम के बारे में पूरी जानकारी नहीं है, लेकिन उन्हें मीडिया के साथ-साथ आसपास के माहौल से यह जरूर पता चल चुका है कि यह गेम जानलेवा साबित हो रहा है। यही कारण है कि अधिकतर अभिभावक अपने बच्चों को स्मार्ट फोन देने से ही आनाकानी करने लगे हैं तो वहीं फोन देने पर उसकी जांच करने से भी गुरेज नहीं कर रहे। अब अभिभावक अपने बच्चों को इस गेम से दूर रहने की खुलकर सलाह भी देने लगे हैं तो अधिकतर ने बच्चों के शिक्षकों तक को भी बच्चों पर नजरें रखने और उनसे इस गेम से दूर रहने के कड़े निर्देश देने की अपील भी करने लगे हैं।
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यह गेम बेहद खतरनाक है। इसकी वजह से कई हादसे हो चुके हैं। ऐसे में बच्चे इस गेम से दूर रहे तो इसके लिए उन्हें स्मार्ट फोन से दूर रखने में ही भलाई है। लैपटॉप आदि का इस्तेमाल करने के दौरान भी बच्चों पर नजर रखनी चाहिए। इस गेम ने उनकी चिंता बढ़ा दी है।
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-अमित पराशर, रेलवे अधिकारी
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जबसे इस गेम के बारे में मुझे जानकारी मिली है तो बच्चों का ध्यान इससे दूर रखने के लिए उनके साथ अधिक वक्त बिताने लगा हूं। बच्चों को ऐसे गेम से दूर रहने के लिए हर समय समझाया जाता है तो उनके मोबाइल फोन की जांच करने में भी कोई हिचक नहीं मान रहे है।
- दीपक कुमार, अधिवक्ता
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मेरा प्रयास होता है कि वे बच्चों को अकेला न छोडूं। यह गेम एकांत में रहने वाले बच्चों पर अधिक प्रभाव छोड़ता है। बच्चों को व्यस्त रखने व अपने साथ दोस्ताना माहौल बनाने से ऐसे गेम के प्रति बच्चों की रुचि कम हो जाती है। बच्चों को पढ़ाई के अलावा घरेलू व खेलकूद गतिविधियों में भी व्यस्त रखने का वे प्रयास करता हूं।
- रामगोपाल, अभिभावक

यह गेम जानलेवा है। इस पर कड़ाई से व तत्काल पूर्ण पाबंदी लगाई जानी चाहिए। बच्चे माता-पिता से दूर रहकर इस गेम के जाल में अधिक फंसते हैं, सरकार को इस पर रोक लगाने के लिए शुरूआत में ही कदम उठाने चाहिए थे। मैं घर से लेकर स्कूल में भी बच्चों पर निगरानी रखता हूं। मेरा मानना है कि बच्चों को स्थायी रूप से फोन नहीं देना चाहिए और बच्चे के फोन रखने पर उसकी समय-समय पर जांच भी करनी चाहिए।
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- डॉ. राजेश कुुमार, अभिभावक

बच्चों को गेम से दूर रखने में अध्यापक बड़ा रोल निभा सकते हैं। बच्चे अध्यापकों की बातों का जल्द अनुसरण करते हैं और सुबह प्रार्थना सभा से लेकर कक्षाओं में भी ऐसे गेम व दूसरी बुराइयों से दूर रहने को लेकर नैतिक रूप से जानकारी देनी चाहिए। जब से इस गेम के चलते हो रहे हादसों की जानकारी मिली है तो माता-पिता की चिंता भी बढ़ गई है।
- मनोज कुमार, अभिभावक
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