कुरुक्षेत्र। विश्वविद्यालय परिसर में तैयार किया जा रहा हरियाणवी पैवेलियन। संवाद
कुरुक्षेत्र। हरियाणवी संस्कृति के महाकुंभ के रूप में पहचान बना चुका कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय का रत्नावली महोत्सव न केवल प्रदेश की लोक कला एवं संस्कृति को संरक्षित कर रहा है बल्कि विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं में मनोरंजन के साथ-साथ प्रबंधन के गुर सिखने का भी बड़ा मंच बन चुका है।
रत्नावली महोत्सव में विश्वविद्यालय प्रशासन ने विद्यार्थियों को धरातल पर प्रबंधन सीखने का बड़ा मौका दिया है और छात्र-छात्राओं के इस दल को प्रशासन ने टीम रत्नावली नाम दिया है। टीम में स्नातक से लेकर पीएचडी तक की विभिन्न विषयों में पढ़ाई कर रहे करीब 200 छात्र-छात्राओं को शामिल किया गया है। हालांकि प्रशासन ने समन्वय के लिए विभागीय शिक्षकों को भी जिम्मेदारी सौंपी है लेकिन ये छात्र स्टेज प्रबंधन से लेकर हर स्तर पर कार्य में जुटे हैं।
50 विद्यार्थी नहीं बन पाए टीम रत्नावली का हिस्सा
रत्नावली महोत्सव से सीधे तौर पर जुड़ने के लिए छात्र-छात्राओं में जबरदस्त उत्साह भी बनने लगा है। टीम रत्नावली तैयार करने के लिए बकायदा प्रशासन की ओर से आवेदन लिए जाते हैं। इस बार भी बड़े स्तर पर आवेदन किए लेकिन चयन प्रक्रिया में करीब 50 छात्र-छात्राएं टीम का हिस्सा नहीं बन पाए। अब करीब 200 छात्र-छात्राएं इस टीम में काम कर रहे हैं। उन्हें शिक्षक हर कदम पर मार्गदर्शन दे रहे हैं। इसके साथ ही विश्वविद्यालय के एनसीसी व एनएसएस के स्वयंसेवकों को भी महोत्सव से जोड़ा गया है।
सभी छह मंचों पर निभाएंगे भूमिका
युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग के निदेशक डॉ. विवेक चावला का कहना है कि 34 विधाओं के लिए छह मंच सजाए गए हैं। इन सभी मंचों पर सफल आयोजन के लिए टीम रत्नावली में शामिल छात्र-छात्राएं अहम भूमिका निभाएंगे। दो से तीन स्वयंसेवक हर मंच पर रहेंगे। उनका कहना है कि इन छात्र-छात्राओं की टीम ही महोत्सव का आधार स्तंभ बन चुकी है। इन्हें मंच अनुसार ही छह श्रेणियों में बांटा गया है।
कुरुक्षेत्र। विश्वविद्यालय परिसर में तैयार किया जा रहा हरियाणवी पैवेलियन। संवाद