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शिक्षा के मंदिरों में बचपन से खिलवाड़

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न पुस्तकें न प्रश्नपत्र फिर भी देनी होंगी परीक्षाएं
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- शिक्षा सत्र 40 फीसदी बीता, नहीं पहुंची पहली, चौथी व पांचवीं कक्षा की पुस्तकें
सेवा सिंह
कुरुक्षेत्र। प्रदेश सरकार से लेकर शिक्षा विभाग के अधिकारी भी सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के दावे कर रहे हैं लेकिन धरातल पर यह दावे हवाई ही साबित हो रहे हैं। यहां तक कि प्राथमिक स्कूलों में पढ़ाई के नाम पर मासूमों से खिलवाड़ ही किया जा रहा है। बच्चों के पास आज तक न पुस्तकें पहुंच पाई हैं और न ही निकट समय में इनके पहुंचने की संभावना दिखाई दे रही है। इसके बावजूद अब विभाग ने बच्चों की परीक्षा लेने की तैयारी भी कर ली है, लेकिन इसके लिए भी विभाग के पास प्रश्न पत्र प्रकाशित करवाए जाने की व्यवस्था नहीं है और इनका जिम्मा अब शिक्षकों पर ही डाल दिया गया है। ऐसे में इन स्कूलों के शिक्षक भी पसोपेश में दिखाई देने लगे हैं।
बता दें कि शिक्षा विभाग की ओर से पहली कक्षा से लेकर आठवीं तक सभी पुस्तकें सरकारी स्कूलों में पढ़ाई कर रहे बच्चों केे निशुल्क दी जाती है, लेकिन हर वर्ष की तरह इस बार भी प्राथमिक स्कूलों के बच्चों को वर्तमान शिक्षा सत्र करीब 40 फीसदी बीत जाने पर भी पुस्तकों का इंतजार करना पड़ रहा है। अभी तक विभाग महज कक्षा दो व तीन के लिए ही पुस्तकें उपलब्ध करवा पाया है जबकि कक्षा पहली, चौथी व पांचवीं के बच्चों को आज भी पुस्तकों के लिए शिक्षकों के चेहरे निहारने को मजबूर होना पड़ रहा है।
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बिना पढ़ाए व प्रश्न पत्रों के लेनी होगी परीक्षा
विभाग ने अब स्कूली बच्चों की 24 जुलाई से परीक्षा लेने की तैयारी की है, लेकिन यह परीक्षाएं बच्चों को पुस्तकें न मिलने के चलते बिना पढ़ाई किए ही देनी होंगी। यहां तक कि विभाग इन बच्चों के लिए प्रश्न पत्र भी प्रकाशित नहीं करवा पा रहा है और अब प्रश्नपत्रों की व्यवस्था का जिम्मा भी शिक्षकों पर ही डाल दिया गया है। यह प्रश्न पत्र किस बजट से प्रकाशित होंगे, यह भी विभाग जवाब देने की स्थिति में नहीं है जबकि इन स्कूल मुखियाओं को भेजे निर्देशों में स्पष्ट कर दिया है कि वे अपने स्तर पर ही यह व्यवस्था करें। ऐसे में अब शिक्षकों को अपनी जेब ढीली कर ही प्रश्न पत्र प्रकाशित करवाने होंगे।
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स्कूलों में करवाया जा रहा बच्चों का टाइम पास
प्राथमिक स्कूलों में विभिन्न कक्षाओं के बच्चों को पुस्तकें भले ही न मिली हो, लेकिन उनका टाइम पास करवाने के लिए विभाग की ओर से कैच अप व शनिवार को बैग फ्री डे पर एक्टिविटी करवाई जा रही है। यहां तक कि विभाग की ओर से शिक्षकों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि वे परीक्षा भी इन गतिविधियों के आधार पर ले लें।

दूसरी और तीसरी कक्षा की पुस्तकें भी दो माह बाद मिलीं
विभाग महज दूसरी और तीसरी कक्षा की पुस्तकें बच्चों को उपलब्ध करवाकर वाहवाही लूटने में लगा है, लेकिन ये पुस्तकें भी सत्र शुरू होने के करीब 2 माह बाद मिल पाई थीं। वह भी पिछली कक्षा के बच्चों की संख्या के अनुसार ही अगली कक्षा के बच्चों के लिए भेजी गई। इसके चलते इन कक्षाओं के कई बच्चे आज भी विभाग की ओर से दी जाने वाली पुस्तकों की बाट जोह रहे हैं। शिक्षकों की मानें तो अब उनसे बच्चे भी पूछने लगे है कि उन्हें पुस्तकें कब तक मिलेंगी।
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नीतियां हैं नहीं, अध्यापकों को ठहराया जाता है दोषी : चौहान
प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष विनोद चौहान का कहना है कि विभाग के पास अपने स्कूलों में बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के लिए कारगर नीति ही नहीं है। न समय पर बच्चों को पुस्तकें दी जा रही हैं तो न ही शिक्षकों को उन्हें पढ़ाने का समय दिया जा रहा है। बिना पुस्तक पढ़े ही अब बच्चों को परीक्षा देनी होगी जबकि ऐसे समय भी शिक्षकों की ड्यूटियां जनसर्वे व अन्य कार्यों में लगाई जा रही है। जब परिणाम बेहतर नहीं होता तो पूरा दोष शिक्षकों पर थोप दिया जाता है।
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पुस्तकें मंगवाने के लिए किए जा रहे प्रयास : कौशिक
खंड शिक्षा अधिकारी विनोद कौशिक का कहना है कि पहली, चौथी व पांचवीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए पुस्तकें मंगवाने के भरसक प्रयास किए जा रहे हैं। तब तक शिक्षकों को बच्चों से पुरानी किताबों से पढ़ाए जाने को कहा गया है। व्यवस्था दुरुस्त बनाए जाने के लिए विभाग गंभीरता से कार्य कर रहा है।
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