कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र 48 कोस के अंतर्गत आने वाले तीर्थों की महत्ता भले ही अलग-अलग हो लेकिन इनका स्वरूप अब एक समान ही दिखाई देगा। इन तीर्थों का जीर्णोद्धार एक ही डिजाइन से होगा। इसके लिए कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड ने विशेष विकास मैप तैयार किया है। यह विकास मैप न केवल तीर्थ समितियों को भेजा गया है बल्कि पहले के चल रहे विकास कार्यों पर ब्रेक लगाते हुए इसी डिजाइन के अनुसार कार्य किए जाने लगे हैं।
विकास मैप तैयार किए जाने से पहले केडीबी ने सभी तीर्थों का सर्वे कराया है। इसमें कई कार्य अनावश्यक व खामियां भरे मिले और अनेक नए कार्य कराए जाने की जरूरत भी सामने आई है। इसी विकास मैप व सर्वे के अनुसार सन्निहित सरोवर सहित 55 तीर्थों पर नए डिजाइन के अनुसार कार्य भी शुरू किए जा चुके हैं। केडीबी व तीर्थ समितियों और संबंधित क्षेत्र के लोगों के सहयोग से कराए जाने वाले इन कार्यों के पूरा होने के बाद तीर्थ स्थल खास स्वरूप में दिखाई देने लगेंगे।
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इस तरह से एक समान दिखाई देंगे तीर्थ
तैयार किए गए विकास मैप के अनुसार हर तीर्थ का मुख्य द्वार, महिमा पट्ट, कथा स्थल, घाट, आरती स्थल, स्टोन पिचिंग, हाई मास्क लाइट, बैंच, कुंड परिक्रमा और रंगाई-पुताई एक जैसी होगी। महिमा पट्ट तीर्थ स्थल के बाहरी ओर होगा, जहां जाने वाले श्रद्धालु उसे पढ़ व समझ सकेंगे। इस पट्ट का भी विशेष डिजाइन तैयार किया गया है।
मनमर्जी से कराए जाते रहे कार्य
तीर्थों पर समितियों व अन्य एजेंसियों की ओर से मनमर्जी से विकास कार्य करवाए जाते रहे हैं। सर्वे में सामने आया है कि कई जगह महिमा पट्ट ही इस तरह से बना दिए गए, जिन्हें श्रद्धालु पढ़ भी नहीं सकते। इसी तरह कई जगह अनावश्यक निर्माण भी सामने आए हैं।
तीर्थों का गौरव बढ़ाने का प्रयास : उपेंद्र
मानद सचिव उपेंद्र सिंघल ने कहा कि केडीबी व प्रदेश सरकार का प्रयास तीर्थों का गौरव बढ़ाने का है। इसी दिशा में यह कदम उठाया गया है। इससे तीर्थों के विकास कार्य तेजी से होंगे और पारदर्शिता भी बढ़ेगी। तीर्थ समितियों के जरिये ही यह विकास कार्य कराए जाने हैं। नए विकास मैप के अनुसार जब सभी विकास कार्य पूरे हो जाएंगे तो तीर्थों का खास स्वरूप दिखाई देने लगेगा और विशेष पहचान भी बनेगी।