कुरुक्षेत्र। किसानों को मंडियों में फसल बिकने के बाद भी सरकार की ओर से तय समय के अनुसार भुगतान नहीं किया जा रहा। इससे किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
भारतीय किसान यूनियन ने खाद् एवं आपूर्ति निदेशक को पत्र लिखा है। इसमें यूनियन प्रधान गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि किसानों की फसल बिकने के 48 से 72 घंटे के भीतर भुगतान उनके खातों में कर दिया जाएगा लेकिन जमीनी स्तर पर यह व्यवस्था पूरी तरह विफल है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में मंडियों में तब तक भुगतान जारी नहीं किया जाता, जब तक फसल का उठान नहीं हो जाता और आउटगोइंग गेट पास जारी नहीं होता। खरीद प्रणाली (सॉफ्टवेयर) में इस प्रकार की व्यवस्था होने के कारण यदि उठान में आढ़ती, अधिकारियों या ट्रांसपोर्टर की लापरवाही से देरी होती है, तो उसका सीधा नुकसान किसानों को झेलना पड़ता है।
वहीं यूनियन प्रवक्ता राकेश कुमार बैंस ने कहा कि कई मामलों में किसानों को 15 से 20 दिनों तक अपनी मेहनत की कमाई के लिए इंतजार करना पड़ता है, जोकि न केवल अन्यायपूर्ण है बल्कि किसानों के साथ गंभीर भेदभाव भी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि फसल के उठान में देरी के लिए किसान किसी भी प्रकार से जिम्मेदार नहीं होता, फिर भी उसे ही आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि सरकार तुरंत खरीद नीति में संशोधन करे और यह सुनिश्चित करे कि जैसे ही किसान की फसल बिके और जे-फॉर्म तैयार हो, उसी समय से निर्धारित 48-72 घंटे के भीतर भुगतान सीधे किसान के खाते में डाला जाए, चाहे उठान हुआ हो या नहीं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो किसान संगठन आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की होगी।