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तीसरे हरियाणा सृजन उत्सव की रंगारंग शुरुआत

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हरियाणा सृजन उत्सव का रंगारंग शुुभारंभ
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के आरके सदन में तीसरे हरियाणा सृजन उत्सव की रंगारंग शुरुआत हुई। देशभर से विभिन्न साहित्यकारों एवं सृजनकर्मियों ने कार्यक्रम में सहभागिता की।
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बनारस हिंदू विश्विद्यालय से सेवानिवृत्त प्रो. चौथीराम यादव ने उद्घाटन किया। उन्होंने सृजन की परंपराएं संघर्ष एवं द्वंद्व विषय पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि कबीर, बाबा फरीद, बुल्लेशाह, मीरा एवं रैदास सहित अनेकों कवियों को जनपक्षीय सृजन के लिए कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। न्याय के पक्ष में सच की आवाज उठाने वाले मीरा एवं पल्टू साहब जैसे कई रचनाकारों को जान तक गंवानी पड़ी। सच कहने वाली गौरी लंकेश एवं रामचंद्र छत्रपति जैसों के नाम भी शामिल हैं। इसी परंपरा में डा. भीमराव आंबेडकर भी शामिल हैं। मार्टिन लूथर किंग एवं नेल्सन मंडेला ने भी आगे बढ़ने में काफी संघर्ष किया। महात्मा बुद्ध, ज्योतिबा फुले, पेरियार, भगत सिंह एवं मध्यकाल के सूफी संतों ने प्रतिरोध की परंपरा को आगे बढ़ाने का काम किया। सिख गुरुओं ने लंगर की परंपरा को प्रतिरोध का तरीका बनाया तथा जात-पात को अपनी तरह से खत्म करने की कोशिश की। रचनाकारों को तय करना होगा कि वे शास्त्रधर्मी एवं लोकधर्मी जीवन में से किसके पक्ष में खड़े हैं। वर्तमान रचनाकारों के लिए अपनी पक्षधरता तय करना सबसे बड़ी चुनौति है। प्रो. टीआर कुंडू ने कहा कि आम आदमी वर्तमान की कई समस्याओं से घिरा हुआ है। रचनाकार आम आदमी को संघर्ष में अकेला नहीं होने देता और अपनी रचनाओं के जरिए उनकी समस्याओं को रखता है। डा. सुभाष सैनी ने कहा कि हरियाणा को कन्या भ्रूण हत्याओं, खाप पंचायतों के लिए जाना जाता है। हरियाणा की सृजनशीलता को प्राय: अनदेखा कर दिया जाता है। उत्सव संयोजक डा. सुभाष सैनी ने दो दिन चलने वाले उत्सव के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि लगातार तीन साल से किए जा रहे हरियाणा सृजन उत्सव प्रदेश की साहित्यिक परंपराओं और विचारशीलता को मंच प्रदान कर रहा है। परमानंद शास्त्री ने भी संबोधित किया। दूसरे सत्र में युवा सृजन: संवेदना, संकल्प और संकट विषय पर परिसंवाद किया गया। अमित मनोज ने सत्र का संयोजन किया और नाटककार कुलदीप कुणाल, दिल्ली से आई कथाकार प्रज्ञा रोहिणी, गाजियाबाद से उपन्यासकार एमएम चंद्रा, संदीप मील, नीलोत्पल ने युवा सृजन के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी आरआर फुलिया, आलोक श्रीवासब्तव तथा सुरेंद्रपाल सिंह सहित बड़ी संख्या में दर्शक मौजूद रहे।
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