फोटो नंबर-35
नगर परिषद की बेशकीमती जमीन प्रकरण
- एडीसी की जांच रिपोर्ट में जमीन की नगर परिषद मालिक, दुकानदार बोला हम
- पुराने दस्तावेज लेकर मीडिया के समक्ष पहुंचे अजय कुमार ने बताया हकदार
- इनेलो तीन दिन पहले कर चुकी है विधानसभा में मामला उठाने का ऐलान
- एडीसी कर चुके हैं नप के अधिकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई की सिफारिश
- अजय ने लगाया थानेसर नगर परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष पर गंभीर आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। थानेसर नगर परिषद की बेशकीमती जमीन प्रकरण में नया मोड़ आ गया है। एडीसी की जांच रिपोर्ट में जिस भूमि को थानेसर नगर परिषद की बताया गया था, उस भूमि के एक हिस्से को पुराने दस्तावेज प्रस्तुत कर एक अजय पुत्र ईश्वर चंद ने खुद को हकदार बताया है।
कुरुक्षेत्र वासी अजय ने बताया कि इसमें से 100 गज जमीन, जिसमें से 10-15 गज में खोखा भी शामिल है, इसका बाकायदा 1965 से संपत्ति कर भी भरा जा रहा है। जब इस जमीन को लेकर विवाद उठना शुरू हुआ तो 2011 में उन्होंने और 2014 में नगर पालिका ने तहसीलदार से जमीन की पैमाइश करवाई थी। तहसीलदार की दोनों रिपोर्ट में बताया गया है कि यह जमीन लाल डोरे के अंदर है। इस कारण जो जमीन पर काबिज है, वही जमीन का मालिक है। वहीं उन्होंने बताया कि जब कमेटी का गठन ही 1867 में हुआ था तो 1849 की जमीन को कैसे कमेटी की जमीन कहना उचित है। अजय ने बताया कि जमीन विवाद को देखते हुए एसडीएम नरेंद्र पाल मलिक ने 2 फरवरी 2017 को जमीन का मालिक उन्हें बताकर नगरपालिका के कर्मचारी, अधिकारी के विरुद्ध कार्यवाही के लिए लिखा था। वहीं डीसी सुमेधा कटारिया ने 27 फरवरी 2017 को जांच रिपोर्ट उनके के हक में लिखकर नगर परिषद के खिलाफ कार्यवाही करने के आदेश जारी कर दिए थे। और तो और, स्थानीय नगर निकाय के निदेशक ने 27 अप्रैल 2017 को नगर परिषद के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के आदेश जारी कर दिए थे। उन्होंने बताया कि सभी अधिकारियों ने ईश्वर चंद के हक में फैसला सुनाया था और कहा था कि कच्चा घेर की जमीन के नक्शे 30 जनवरी 1985 में पास हुए थे, जबकि कच्चे घेर के अन्य मालिकों के नक्शे 1996 के बाद ही पास करवाए गए हैं। उन्होंने बताया कि कच्चा घेर के विवादित 100 गज के खोखे की जमीन की कीमत 40 से 50 लाख से ज्यादा नही है, जबकि 100 गज के विवादित खोखे की कीमत 100 करोड़ रुपये बताया जा रहा है। लेकिन सबसे बड़ा सबूत यह है कि यह जमीन 25 लाख रुपये के मुचलके पर बैंक में आज भी गिरवी रखी हुई है । शिकायतकर्ता अजय पुत्र ईश्वर चंद ने नगरपरिषद के उपप्रधान जयनारायण शर्मा पर आरोप लगाए हैं कि उन्होंने रणबीर सिंह व तत्कालीन नगर परिषद के अधिकारियों से मिलकर हाउस टैक्स असेसमेंट रजिस्टर वार्ड-12 वर्ष 1991-92 सीरियल नंबर 48ए पर बिना किसी सबूतों दस्तावेजों व बिना किसी अधिकारियों के आदेशों के अपने नाम का इंद्राज कर लिया, ताकि मेरी परिवारिक जमीन हड़प सके। उन्होंने नगर परिषद पर फर्जी दस्तावेज का प्रयोग करके गुमराह करने का आरोप लगाया है। उसका कहना है कि खोखे वाली जमीन रजिस्टरी की हुई जमीन से बाहर है।
दोनों ओर से हो चुकी है सीएम विंडो पर शिकायत
अजय ने इस फर्जी कागजात की शिकायत सीएम विंडो पर की, जिसमें कार्यकारी अधिकारी नगर परिषद ने 6 अक्तूबर 2017 को जमीन से संबंधित दस्तावेज मांगने के लिए नोटिस जारी किया तो पूर्व उपप्रधान दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। इसका रिकॉर्ड कार्यकारी अधिकारी ने शपथ पत्र 10 फरवरी 2018 को लोकायुक्त न्यायालय में दिया, जिसमें यह साफ लिखा हुआ था कि इस व्यक्ति ने फर्जी काम किया है। उन्होंने बताया कि नगर परिषद के ईओ द्वारा फर्जी इंद्राज को रद्द कर दिया गया। वहीं यह मामला पिछने 26 साल से कोर्ट में लंबित है। इस मामले में उपयुक्त कार्रवाई को लेकर जिला उपायुक्त को कानूनी कार्यवाही की मांग की है। बता दें कि उक्त भूमि को बचाने के लिए बनाई गई संघर्ष समिति भी सीएम विंडो पर शिकायत कर चुकी है।
रिकार्ड और नक्शे हक में है तो क्यों नहीं किया निर्माण
थानेसर नगर परिषद की बेशकीमती भूमि को बचाने के लिए गठित की गई कच्चा घेर बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक एवं तीन बार पार्षद रह चुके नरेंद्र शर्मा निंदी का कहना है कि प्रेसवार्ता में मीडिया को गुमराह करने का प्रयास किया गया है। वास्तविकता यह है कि जो दस्तावेज अजय पुत्र ईश्वर चंद मीडिया को दिखा रहे हैं, अगर उनमें कुछ दम होता तो पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट उनके पक्ष में ही फैसला देती, न कि थानेसर नगर परिषद को उक्त भूमि का मालिक मानती।
संघर्ष समिति के संयोजक नरेंद्र शर्मा ने उठाए सवाल
- भूमि का मालिकाना हक था और नक्शे पास थे तो अब तक निर्माण क्यों नहीं हुआ, वहां खोखे क्यों है ?
- कोर्ट का फैसला और एसडीएम के बाद एडीसी की रिपोर्ट इस भूमि को नगर परिषद की बताती है
- सितंबर 2013 में तत्कालीन डीसी के निर्देश पर एसडीएम ने जांच में उक्त भूमि को नगर परिषद की माना था
- अब 8 अगस्त 2018 में की गई जांच में मौजूदा आईएएस अधिकारी ने जमीन को नगर परिषद की माना है
- ये प्रभावशाली लोगों से मिलीभगत कर बेशकीमती सरकारी भूमि को खुर्दबुर्द करने का प्रयास है
- इस मामले की जांच सीबीआई से कराई जाए तो कई अधिकारी-कर्मचारी और लोग बेनकाब होंगे
- जिस खोखे का जिक्र अजय ने किया है, उसके पीछे उनके मालिकाना हक वाली पक्की दुकान है
- इस दुकान के आगे का हिस्सा नगर परिषद के मालिकाना हक का है, जहां उनका खोखा है
- परिषद की जमीन पर अपनी पक्की दुकान के आगे रखे खोखे पर मालिकाना हक जताना गलत है