सोमवती अमावस्या पर सरोवरों में लगाई श्रद्धा की डुबकी
-ब्रह्मसरोवर, सन्निहित और सरस्वती तीर्थ पर उमड़ा श्रद्धालुओं का हुजूम
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र-पिहोवा।
कुशोत्पाटिनी सोमवती अमावस्या पर धर्मनगरी में श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा। श्रद्धालु ब्रह्मसरोवर, सन्निहित सरोवर और सरस्वती तीर्थ पर पितरों की मुक्ति के लिए पिंडदान कराया और स्नान किया। हालांकि कुरुक्षेत्र के प्रमुख चौराहों पर और तीर्थ पर पुलिस बल तैनात किया गया था, लेकिन भीड़ के चलते ट्रैफिक सिस्टम प्रभावित रहा। कुरुक्षेत्र विश्वकर्मा चौक, अंबेडकर चौक, मीरी पीरी चौक, ताऊ देवीलाल चौक, महाराणा प्रताप चौक पर दोपहर तक जाम के हालात रहे।
रविवार देर शाम से विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु यहां पहुंचना शुरू हो गए थे, लेकिन सोमवार को काफी तादाद में श्रद्धालु तीर्थ पर पहुंचे। सूर्यादय से पूर्व ही तीर्थ पर यात्रियों का तांता लगना शुरू हो गया था। सरोवर में स्नानादि कर श्रद्धालुओं ने अपने पितरों के मोक्ष के लिए पूजा-पाठ कर पिंडदान किया और पुरोहितों से अपनी वंशावली की जानकारी प्राप्त की। उधर, भगवान कार्तिकेय के मंदिर में अभिषेक के लिए श्रद्धालुओं की लाइनें लगी रहीं। पिंडी रूप में स्थापित भगवान कार्तिकेय पर गति, कर्म, क्रिया, पितर पिंड कार्य से निवृत्त होने के बाद साक्ष्य के रूप तेल चढ़ाया जाता है। इसी प्रकार प्रेत पीपल पर जल चढ़ाने व सूत बांधने के लिए भी श्रद्धालुओं को संघर्ष करना पड़ा।
तीर्थ पुरोहित आशीष चक्रपाणी ने बताया कि सनातन धर्म में सोमवती अमावस का बहुत महत्व है। इस दिन अपने दिवंगत परिजन के निमित्त पिंडदान, गति व नारायण बलि जैसे धार्मिक कार्य करने का महत्व बिहार के गयाजी से भी अधिक माना जाता है। सरस्वती तीर्थ पर अन्न से बने पिंडों को मृतक जीव का स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है और तत्पश्चात उन पिंडों का जल में तर्पण किया जाता है। उन्होंने बताया कि वैसे तो पूरे साल श्रद्धालु पिंडदान करवाने के लिए यहां आते हैं, लेकिन सोमवती अमावस पर यहां अधिक तादाद में यात्री आते हैं। यह अमावस पवित्र नदियों में स्नान करने, दान तथा पितृ कर्म के लिए श्रेष्ठ है। तीर्थ पुरोहित एवं इतिहासकार विनोद पंचौली ने बताया कि कुशोत्पाटिनी अमावस पर उखाड़ कर रखी गई कुश पूरे वर्ष काम आएगी।
अव्यवस्था रही हावी
अमावस के चलते शहर में पूरे दिन जाम लगा रहा। मेन चौक पर पुलिस प्रशासन ने यातायात को कुछ नियंत्रित किया, लेकिन मेन बाजार में जाम लगने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि मेन बाजार में पार्किंग की व्यवस्था है। लेकिन यात्रियों को इस पार्किंग के बारे में जानकारी ना होने के चलते बाजार से गुजरना पड़ता है। इससे बाजार में जाम लग जाता है। लोगों ने बताया कि पालिका ने भले ही मेन बाजार में पार्किंग स्थल बना दिया है, लेकिन इसके बारे में किसी को पता नहीं है और ना ही पालिका की ओर से यहां कोई बोर्ड लगाया गया है।
फोटो नंबर 10 से 20 और 31, 35 से 38
स्नान के लिए संघर्ष करती दिखीं महिलाएं
-ब्रह्मसरोवर की रेलिंग पार कर बाल्टियों के साथ गहरे हिस्से में लटके दिखे श्रद्धालु
राजेश शांडिल्य
कुरुक्षेत्र।
धर्मनगरी में उमड़े आस्था के सैलाब को अव्यवस्था का सामना करना पड़ा। जान जोखिम में डाल कर महिलाएं और अन्य श्रद्धालु ब्रह्मसरोवर की रेलिंग पार कर पवित्र स्नान के लिए 15 फुट गहरे सरोवर की ओर बाल्टियां लेकर लटके नजर आए।
ब्रह्मसरोवर पर सोमवार को करीब एक लाख से अधिक संख्या में श्रद्धालु स्नान के लिए पहुंचे थे। जाहिर है कि ब्रह्मसरोवर के दोनों हिस्से स्वच्छ जल प्रोजेक्ट के चलते लगभग खाली किये जा चुके हैं। सरोवर के घाट करीब 8 महीने से सूखे हैं। गनीमत ये रही कि सोमवती अमावस्या पर एक एक घाट पर पानी का प्रबंध किया गया था, लेकिन यहां एक समय में ज्यादा से ज्यादा 10 लोग नहा सकते थे, इसकी वजह से घाट पर भारी भीड़ रही। हालात यह रहे कि कई बुजुर्ग महिलाओं को स्नान के लिए यहां संघर्ष करते देखा गया। उन्हें इधर उधर जाकर बाल्टियों से पानी जुटा कर स्नान करना पड़ा। केडीबी के एक अधिकारी का दावा है कि उन्होंने ब्रह्मसरोवर के सभी घाटों मोटरों का प्रबंध किया था, ताकि पाइप लाइन के जरिये श्रद्धालु स्नान कर सके, लेकिन ये मोटरें स्नान के समय बंद रही और श्रद्धालुओं को ब्रह्मसरोवर की रेलिंग पार कर लटक कर गहरे हिस्से से बाल्टियों के साथ पानी खींचना पड़ा। श्रद्धालुओं के अलावा घाट पर बैठे पंडों ने भी इन हालात को शर्मनाक करार दिया। पंडों का कहना था कि उन्होंने ऐेसे हालात यहां पहले कभी नहीं देखे।
10 मानित और एक मानद सचिव, फिर भी ये हालात
कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड (केडीबी) के कुल 10 सदस्य नामित हैं, इनमें कुरुक्षेत्र शहर से सात, जबकि कैथल, करनाल और जींद से 1-1 सदस्य हैं। यहां बता दें कि पिछले करीब पांच दशक के इतिहास में यह पहली बार है, जब केडीबी में इतनी बड़ी संख्या में सदस्य मनोनीत किए गए हैं। इतना ही नहीं यह भी मौजूदा सरकार में ही पहली बार हुआ है,जब केडीबी को 10 सदस्यों के अलावा एक मानद सचिव का पद भी सृजित किया गया है। कांग्रेस के कार्यवाहक जिलाध्यक्ष विशाल सिंगला ने सवाल उठाया कि इसके बावजूद अगर यात्रियों को ऐसे हालात से जूझना पड़े तो इतना बड़ा अमला किस काम का ?
सदस्य बोले मानद सचिव बताएंगे, उनका मोबाइल बंद मिला
केडीबी के कुछ प्रमुख सदस्यों से बात की गई तो उन्होंने ज्यादा कुछ कहने की बजाये चुप्पी साध ली। उन्होंने सिर्फ इतना ही कहा कि इसके बारे में मानद सचिव अशोक सुखीजा ही बता सकते हैं। वहीं जब मानद सचिव अशोक सुखीजा से बात की गई तो उनका मोबाइल बंद मिला। कई बार फोन लगाने के बावजूद सुखीजा से संपर्क नहीं हुआ। बता दें कि पिछले दिनों 14 अगस्त के दौरान केडीबी के मानद सचिव अशोक सुखीजा जब केडीबी स्थित अपने दफ्तर पहुंचे थे तो सोशल मीडिया में उनके 41 दिन बाद दफ्तर आने की फोटो वायरल हुई थी।
संपदा अधिकारी बोले पांच मोटरें लगाई, सीईओ ने कहा दो
केडीबी के संपदा अधिकारी राजीव शर्मा ने बताया कि ब्रह्मसरोवर के पांच प्रमुख घाटों पर मोटरें लगाई गई थीं, ताकि यात्रियों को घाटों पर पाइप लाइन के जरिये स्नान के लिये पानी मुहैया कराया जा सके। उन्होंने बताया कि आज आधे दिन से ज्यादा बिजली गुल रही। इसकी वजह से मोटरों के जरिये पानी की सप्लाई नहीं हो सकी। वहीं जब सवाल किया गया कि बिजली गुल रहने की स्थिति में भारी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं के लिए जनरेटर की वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई, लेकिन उन्होंने इसका कोई जवाब नहीं दिया। यहां चौंकाने वाली बात ये भी है कि जहां केडीबी के संपदा अधिकारी पांच मोटरें लगाने की बात कर रहे थे,वहीं पिहोवा की एसडीओ और केडीबी की चीफ एग्जीक्यूटिव आफिसर ने बताया कि ब्रह्मसरोवर पर पानी के लिए दो मोटरें लगाई गई थीं।
भविष्य में ऐसी परेशानी नहीं होगी : सीईओ
केडीबी की सीईओ पूजा चांवरिया के अनुसार ब्रह्मसरोवर में चलते पानी के इंतजाम के लिए ज्योतिसर से ब्रह्मसरोवर तक पाइप लाइन बिछाई जा रही है। इसके चलते ब्रह्मसरोवर को खाली किया गया, लेकिन सोमवती अमावस्या और मुख्य अवसरों पर श्रद्धालुओं के स्नान के लिए घाटों पर पानी की व्यवस्था केडीबी द्वारा की जाती है। इस बार सोमवती अवमास्या पर भी स्नान के लिए दो मोटरें लगाई गई थीं, ताकि घाटों पर स्नान के लिए पाइप के जरिये पानी मुहैया कराया जा सके। इसके अलावा दो कुंड भरे गये थे। उन्होंने बताया कि अगर किसी कारण से मोटरें बंद रही हैं तो इसकी वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए थी,अगर ऐसा नहीं किया गया था तो इसके लिए जिम्मेदार कर्मचारियों पर कार्रवाई होगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि भविष्य में श्रद्धालुओं को ऐसी परेशानी नहीं होगी, इसका ध्यान रखा जाएगा।