कुरुक्षेत्र। श्रीमद्भगवदगीता निष्काम कर्म, योग और सदाचार का उपदेश देकर व्यक्ति को नैतिक और सफल जीवन जीने की प्रेरणा देती है। यह व्यक्ति को मन की शांति, कर्तव्यों का बोध और आत्मविश्वास देती है। यह जीवन की विपरीत परिस्थितियों का सामना करने, सुख-दुख में समभाव रखने और आध्यात्मिक ज्ञान के माध्यम से मानसिक विकारों से मुक्ति पाने का मार्ग दिखाती है। यह विचार मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने अंतरराष्ट्रीय श्रीमदभगवदगीता जयंती समारोह के उपलक्ष्य में मातृभूमि सेवा मिशन की ओर से आयोजित 18 दिवसीय विश्व मंगल महायज्ञ के शुभारंभ अवसर पर गीता जन्मस्थली ज्योतिसर में व्यक्त किए।
विश्व मंगल महायज्ञ का शुभारंभ ज्योतिसर तीर्थ पूजन, गीता ग्रंथ पूजन एवं शंख के उद्घोष से हुआ। विश्व मंगल महायज्ञ में वैदिक ब्रह्मचारियों ने आचार्य नरेश कौशिक के मार्गदर्शन में सस्वर गीता के श्लोकों का उच्चारण करते हुए लोकमंगल के निमित्त आहुति डाली। ज्योतिसर वासी सरोज गोलन बतौर मुख्य यज्ञमान उपस्थित रहीं। डॉ. मिश्र ने कहा कि श्रीमदभगवदगीता मनुष्य को जीवन जीने के लिए कर्मयोग, भक्तियोग और ज्ञानयोग जैसे मार्ग लोकमंगल प्रस्तुत करती है जिससे व्यक्ति जीवन में सही चुनाव कर सके। गीता का संदेश केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि समस्त मानव जाति के कल्याण के लिए भी है। विश्व मंगल महायज्ञ में गुरु हरकिशन पब्लिक स्कूल संगरूर, पंजाब के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने भी आहुति प्रदान की। कार्यक्रम का समापन शांतिपाठ से हुआ।