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छात्र संघ चुनाव, केयू में 111 प्रत्याशियों के बीच होगा मुकाबला, 70 बूथों पर होगा चुनाव

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अमर उजाला ब्यूरो
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कुुरुक्षेत्र। छात्र संघ के 17 अक्तूबर को होने वाले चुनाव में केयू के 16 विभागों के 41 सीआर पदों के लिए 111 प्रत्याशियों के बीच मुकाबला होगा, जिसके लिए 70 बूथ बनाए जाएंगे। 102 सीटों पर एक-एक नामांकन होने से उनका निर्विरोध चुना तय माना जा रहा है। केयू प्रशासन द्वारा 48 विभागों में 224 सीआर पदों के लिए 213 नामांकन मंजूर किए गए। जबकि छंटनी के दौरान 375 नामांकनों में से त्रुटियों के कारण 162 नामांकनों को रद्द कर दिया गया। हालांकि केयू प्रशासन छात्र संघ चुनावों को लेकर तैयारियों में जुटा हुआ है, लेकिन कई छात्र संगठनों की ओर से अप्रत्यक्ष छात्र संघ चुनाव का विरोध जारी है। रविवार को छुट्टी के बावजूद प्रत्यक्ष छात्र संघ चुनाव समिति से जुड़े इनसो, एसएफआई, एनएसयूआई सहित अन्य छात्र संगठनों ने केयू की मुख्य पुस्तकालय में जाकर विद्यार्थियों से चुनाव में वोट न करने की अपील की। जबकि अन्य दिनों की तरह परिसर में पुलिस बल तैनात रहा। पुलिस द्वारा सुबह ही यूनिवर्सिटी परिसर में फ्लैग मार्च निकाला गया। हालांकि केयू प्रशासन ने सुरक्षा की दृष्टि से शुक्रवार को ही यूनिवर्सिटी का सेकेंड गेट बंद करवा दिया था, जिसके चलते सभी वाहन चालकों की की यूनिवर्सिटी में एंट्री सिर्फ थर्ड गेट से हो रही है। वहां भी छात्र संघ चुनाव को लेकर पुलिस व केयू सुरक्षा कर्मियों द्वारा नियमित रूप से वाहनों की जांच की जा रही है।

दूसरे दिन भी छह गाड़ियों में मिले बिंडे
छात्र संघ चुनाव के चलते जहां पुलिस व केयू के सुरक्षा कर्मी कड़ी नजर बनाए हुए है, वहीं केयू के आसपास ही गाड़ियों में बिंडे मिलने का सिलसिला जारी है। रविवार को भी केयू थर्ड गेट पर जांच के दौरान छह गाड़ियों में दर्जनों बिंडे मिले। इससे पहले शनिवार को भी पांच गाड़ियों के अलावा हॉस्टल में भी बिंडे मिले थे, जो पुलिस ने जब्त कर लिए है।
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विद्यार्थियों से कर रहे है वोट न करने की अपील : विक्रम गुर्जर
इनसो केयू चेयरपर्सन विक्रम गुर्जर ने कहा कि सरकार अप्रत्यक्ष छात्र संघ चुनाव कराना चाहती है। सरकार की मंशा सिर्फ एबीवीपी को जीत हासिल करानी है, लेकिन इनसो अप्रत्यक्ष चुनाव का विरोध करती रहेगी। केयू प्रशासन पुलिस बल तैनात कर जानबूझकर परिसर में माहौल खराब करना चाहता है। केयू परिसर पुलिस छावनी में तब्दील हो चुका है। इसके चलते विद्यार्थियों में भय का माहौल बन गया है। गर्ल्स होस्टल की करीब 40 प्रतिशत छात्रा अपने घर जा चुकी है। प्रत्येक छात्र संगठन चुनाव को शांतिपूर्ण ढंग से कराने की मांग कर रहा है। इनसो सहित कई अन्य संगठन लामबंद है जो विद्यार्थियों से मिल चुनाव में वोट न करने की अपील कर रहे है।

एबीवीपी को चुनाव में जीताने के लिए केयू प्रशासन की सपोर्ट : सुमन
एसएफआई प्रदेशाध्यक्ष सुमन गडवाल ने कहा कि अप्रत्यक्ष चुनाव में केयू प्रशासन एबीवीपी को सपोर्ट कर रहा है। केयू प्रशासन नहीं चाहता है कि कोई अन्य छात्र संगठन यूनिवर्सिटी में चुनाव लड़े। उनका आरोप है कि केयू प्रशासन ने एबीवीपी के अलावा तमाम छात्र संगठनों के सीआर के नामांकन मंजूर नहीं किए। प्रशासन ने कई छात्र संगठनों के सीआर पर चुनाव न लड़ने का दबाव बनाया। एसएफआई अप्रत्यक्ष छात्र संघ चुनाव का विरोध करती रहेंगी।

एनएसयूआई करेगी अप्रत्यक्ष चुनाव का बहिष्कार : ईशान शर्मा
एनएसयूआई जिलाध्यक्ष ईशान शर्मा ने कहा कि केयू प्रशासन ने खुद अपने सीआर का चुनाव किया है। यदि कोई अन्य छात्र संगठन का सीआर नामांकन अप्लाई करता है तो उसको दबाव बनाकर बैठा दिया जाता है। यूनिवर्सिटी परिसर में केयू प्रशासन अपनी मनमर्जी कर रहा है, लेकिन प्रत्यक्ष चुनाव छात्र समिति इसका बहिष्कार करेगी। सरकार प्रदेश में बंदुक की नोक पर चुनाव कराना चाहती है, लेकिन एनएसयूआई का छात्र हितों के लिए रोष प्रदर्शन जारी रहेगा।

चुनाव का बहिष्कार करना लोकतंत्र की हत्या : सुमित राणा
एबीवीपी केयू अध्यक्ष सुमित राणा ने कहा सरकार 22 वर्ष बाद लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों पर प्रदेश में छात्र संघ चुनाव करवा रही है, लेकिन कुछ छात्र संगठन इन छात्र संघ चुनावों का बहिष्कार कर रहे है। जो लोकतंत्र की हत्या है। छात्र नेता सरकार की नीतियों की खिलाफ रोष प्रकट करें, लेकिन जब चुनाव लड़ने का मौका मिला है तो उनको चुनाव लड़ना चाहिए।
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शिक्षकों को चुनाव की जानकारी न होने का भुगता खामियाजा : विकास बलाही
कुसा केयू अध्यक्ष विकास बलाही ने कहा कि शिक्षकों को चुनावी प्रक्रिया की जानकारी न होने का खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ा। केयू प्रशासन ने जिन शिक्षकों की नामांकन पत्रों की जांच करने के लिए ड्यूटी लगाई थी उन शिक्षकों को ही पूरी जानकारी नहीं थी। विभिन्न विभागों में बहुत सारे विद्यार्थी सीआर पद के लिए नामांकन पत्र नहीं भर सके। कुसा ने चुनाव लड़ने की ठान रखी है कि वो चुनाव लड़ेगा।
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