सांसद की घोषणा को 23 माह बीते, नहीं हुआ कृष्णा सर्किट से सन्निहित का विकास
कुरुक्षेत्र।
साढ़े 10 करोड़ से सौंदर्यकरण और विकास तो दूर सन्निहित तीर्थ में स्नान,आचमन और तर्पण के लिये स्वच्छ जल का प्रबंध तक नहीं हो सका। हालांकि कुरुक्षेत्र के सांसद राज कुमार सैनी ने 19 जनवरी 2016 को लघु सचिवालय के कांफ्रैंस हाल में जिला प्रशासन और कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के अधिकारियों की मौजूदगी में धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र के विकास का खाका रखा था। पूरे 23 महीनें पहले उन्होंने सन्निहित सरोवर के सौंदर्यकरण और विकास पर साढ़े 10 करोड़ खर्च करने और शुद्ध जल के लिये वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की घोषणा भी की थी। यह कार्य भारत सरकार द्वारा कृष्णा सर्किट के तहत दिये जाने वाले अनुदान से होने थे। कृष्णा सर्किट के लिये तय किये गये अनुदान में से 100 करोड़ की पहली किश्त भारत सरकार नवंबर 2016 में जारी कर चुकी है,मगर सन्निहित सरोवर का अब तक ना तो सौंदर्यकरण हुआ और ना ही,इस पवित्र सरोवर में स्वच्छ जल का बंदोबस्त। सोमवती अमावस जैसे खास मौके पर आज आलम यह रहा कि इस सरोवर में का पानी काला होने के कारण अधिकांश श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाने में गुरेज की। यहां बता दें कि एक दशक पहले कांग्रेस सरकार में कुरुक्षेत्र के दो पौराणिक तीर्थो पर जलशुद्धिकरण के लिये करीब दो करोड़ रुपये खर्च किये गये थे,लेकिन मौजूदा हालत यह कि सन्निहित सरोवर और पिहोवा के सरस्वती तीर्थ के यह दोनों संयंत्र सफेद हाथी बन चुके हैं। आज आलम ये है कि उक्त भारी भरकम अनुदान खर्च होने बावजूद तीर्थ यात्री दूषित जल में धार्मिक पंरपरा निभाने को विवश हैं। सोमवती अमावस के अहम मौके पर हजारों श्रद्धालु और तीर्थ पुरोहित खासे आहत दिखे। बता दें कि सोमवती अमावस के अवसर पर कुरुक्षेत्र के सन्निहित सरोवर,ब्रह्मसरोवर और पिहोवा के सरस्वती तीर्थ पर स्नान और तर्पण का विशेष महत्व है। इस दौरान पवित्र सन्निहित सरोवर के पानी का रंग जहां काला दिखा,वहीं लेवलिंग के चलते पिहोवा का सरस्वती तीर्थ खाली दिखा। सरस्वती तीर्थ के एक घाट पर अस्थाई तौर पर एक छोटा सा जल कुंड तैयार किया गया था,जिसमें इक्का-दुक्का श्रद्धालुओं ने ही डुबकी लगाई,जबकि अन्य ने पंच स्नान से ही काम चलाया। यह हालात तब है,जबकि कुरुक्षेत्र के तीर्था का महिमामंडन करते समय इसे विश्वमानचित्र पर लाने का दावा सरकार और अधिकारी बार बार करते हैं। यहां बता दें कि सोमवती अमावस्या पर कुरुक्षेत्र पिहोवा में पंजाब,हिमाचल और देश के दूसरे हिस्सों से श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। इनमें वीवीआईपी भी शामिल होते हैं। सोमवार को भी इस अवसर पर एक वरिष्ठ न्यायाधीश प्राचीन सन्निहित सरोवर पर पूजा अर्चना के लिये पहुंची थीं,लेकिन पानी का काला रंग देखकर उनकी भावना भी आहत हुई। यहां पहुंचे कुछ श्रद्धालुओं का तो यह कहना था कि इस जल में स्नान से कई तरह के चर्मरो़ग होना लामिजी है। इन्होंने दुख जताया कि प्रशासन को यह हालात क्यों दिखाई नहीं देते। गौरतलब है कि कांग्रेस के शासनकाल में करीब एक पहले सन्निहित तीर्थ पर जलशुद्धिकरण संयत्र लगाया गया था,जबकि एक खास तरह का जलशुद्धि संयंत्र पिहोवा के सरस्वती तीर्थ पर भी कांग्रेस की सरकार में करीब 70 लाख रुपये की लागत से लगाया गया था। पिछले काफी समय से उक्त दोनों सिस्टम निष्क्रिय हाल में हैं।
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केडीबी के संपदाधिकारी बोले जन स्वास्थ्य विभाग ने लगाया था सिस्टम
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कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के संपदा प्रबंधक राजीव शर्मा ने बताया कि सन्निहित सरोवर में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट करीब एक दशक पहले जन स्वास्थ्य विभाग ने लगाया था। यह प्लांट कितने का लगा, इसकी जानकारी नहीं है। दरअसल, अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में उजागर हुए गड़बडझाले के बाद केडीबी स्टाफ किसी भी प्रकार की जानकारी देने की बयाये चुप्पी साधे हुए है। यहां तक की किसी भी प्रकार की जानकारी देने के नाम केडीबी के अधिकारी आरटीआई के जरिये ही सूचना देने की बात कह रहे हैं। केडीबी के एक अधिकारी का यह तक कहना है कि उन्हें उच्चाधिकारियों ने किसी भी प्रकार की सूचना देने से इंकार किया है।
पिछले साल ठीक कराया था,अब चोरी हो चुका सामान-एक्सईएन
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जन स्वास्थ्य विभाग के एक्सईएन अशोक खंडूजा ने बताया कि करीब एक दशक पहले उनके विभाग द्वारा सन्निहित सरोवर में बै क्ट्रिया और काई इत्यादि को खत्म करने के लिये वाटर ब्लोर सिस्टम लगवाया था। शुरु से इसके रखरखाव का जिम्मा कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के कंधों पर था। पिछले वर्ष उनके विभाग को इसके खराब होने की जानकारी मिली थी और गीता जयंती से पहले इसे ठीक भी कराया गया था,लेकिन अब उन्हें बताया गया है कि उक्त सिस्टम के पंप चेंबर,खिड़की और मोटरें चोरी हो चुकी हैं।
जल शुद्धिकरण यंत्र हुआ ठप्प
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सरस्वती तीर्थ पर तीर्थ के जल को शुद्ध करने वाला जल शुद्धिकरण यंत्र ठप्प हो चुका है। फिलहाल तीर्थ में जल नहीं है और तीर्थ में निरंतर जल प्रवाह की दशा में यह यंत्र अनुपयोगी हो सिद्ध होगा। करीब 80 रुपये की लागत से इस जल शुद्धिकरण यंत्र का उद्धाटन 18 मार्च 2012 तत्कालीन वित्त एंव सिंचाई मंत्री हरमोहिंद्र सिंह चट्ठा ने किया था। इसके बाद वर्ष 2014 में तीर्थ में निरंतर जल प्रवाह की परियोजना की नींव रखी गई थी। अब प्रशासन दावा कर रहा है कि सरस्वती महोत्सव से पहले तीर्थ में निरंतर जल बहता रहेगा।
तीर्थ पुरोहित बोले,आस्था और स्वास्थ्य दोनों से खिलवाड़
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श्रीब्राह्मण एवं तीर्थ पुरोहित सभा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष पंडित पवन शास्त्री, सन्निहित तीर्थ सूर्यनारायण मंदिर के पुजारी अच्चू स्वामी व शिव कुमार ने सन्निहित सरोवर का पानी दिखाते हुए सवाल उठाया कि प्रशासन और कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड यह बताये कि इस काले रंग के दूषित पानी में स्नान और आचमन कैसे होगा ? इन दोनों तीर्थ पुरोहितों ने कहा कि कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड श्रद्धालुओं की आस्था के अलावा उनके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है। इन्होंने केडीबी से मांग की सन्निहित सरोवर में मुख्य अवसरों से पहले स्वच्छ जल का प्रबंध होना चाहिये,ताकि देश-दु निया से यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की आस्था पर चोट न लगे।
साढ़े 10 करोड़ से होने थे यह कार्य
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19 जनवरी 2016 को सांसद राजकुमार सैनी ने सन्निहित सरोवर पर कृष्णा सर्किट के अनुदान से साढ़े 10 करोड़ खर्च कर इस राशि से पिंडदान के लिये अलग स्थान,सरोवर का जल शुद्ध रखने के लिये वाटर ट्रीटमेंट प्लांट,लैंड स्केपिंग,भव्य साइनेज बोर्ड और सरोवर के चारों और घाटों का दुबारा निर्माण कराने की योजना को जल्द अमलीजामा पहनाने की रुपरेखा तैयार की थी,लेकिन कृष्णा सर्किट के अनुदान से अब तक कोई काम सन्निहित सरोवर पर नहीं हुआ।
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100 करोड़ रुपये से हुये अब तक यह काम
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भारत सरकार कृष्णा सर्किट के तहत 500 करोड़ रुपये का अनुदान देगी,इसकी पहली किश्त एक साल पहले 100 करोड़ के अनुदान के रुप में मिल मिल चुकी है। इस राशि में से अब तक थीम पार्क में दो टायलेट ब्लाक,ब्रह्मसरोवर पर चार टायलेट ब्लाक,लाईटिंग और ब्रह्मसरोवर की पार्किंग ही बन सकी है,यानी जो अनुदान दिया गया,उसका भी 70 प्रतिशत से ज्यादा अनुदान अभी खर्च तक नहीं हुआ और अगली किश्त तभी मिलेगी,जब तक पिछली किश्त खर्च नहीं होगी।