शाहाबाद। कांग्रेसी नेता और कार्यकर्ता भूपेंद्र सिंह हुड्डा को अगला मुख्यमंत्री होने तो वहीं हुड्डा भी खुद को किसान हितैषी होने का दावा कर रहे हैं, लेकिन असल में हुड्डा को यह भी नहीं पता होगा कि खेत में बीज की बुआई दाय हाथ से होती हैं या बाएं हाथ से। इन बापू-बेटे ने मिलकर हरियाणा के किसानों की जमीनों को मुनाफाखोरों व गांधी परिवार के रिश्तेदारों के पास बेचने का कार्य किया है, जिसका नतीजा वे आज भुगत रहे हैं। यह आरोप राज्यमंत्री कृष्ण बेदी ने लगाए।
वे रविवार को शिव मंदिर धर्मशाला में एक सभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने 24 जून को शुगर मिल परिसर में होने वाली रैली में बढ़चढ़ कर भाग लेने का भी आह्वान किया। उन्होंने बताया कि इस सरकार में नौकरियां पारदर्शिता के आधार पर मिलेंगी और उनके विभाग में 150 पदों पर भर्ती निकलने जा रही हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्रवासियों की मांग पर यहां के गांव चम्मू कलां में सरकारी महिला कॉलेज शुरू करने की प्रक्रिया चल रही है और जिसके लिए जमीन की भी पहचान कर ली गई है। उन्होंने कार्यकत्र्ताओं से आह्वान किया कि रैली के दिन सभी समय पर पहुंचे ताकि क्षेत्रवासियों के साथ मिलकर क्षेत्र के लिए बड़े प्रोजेक्ट की मांग की जा सके। उन्होंने रैली के लिए कार्यकर्त्ताओं की ड्यूटियां भी लगा दी गई है। इस अवसर पर नगरपालिका प्रधान बलदेव राज चावला, रविन्द्र सांगवान ठोल, गौरव बेदी, सरपंच विक्रम अटवान, राव रणजीत सिंह, बलदेव राज सेठी, देव राज चराया, कर्ण राज सिंह तूर, पवन छाबड़ा, सिमरण झरौली, रिंकू सरपंच, प्रधान मलकीत सिंह, सुरेंद्र शर्मा, मुलख राज गुंबर, अरुण कंसल, गोपाल राणा, रिंकू चहल, सुरेंद्र माजरी सहित बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्त्ता मौजूद रहे।
गुरनाम चढूनी कर रहे कांग्रेस की राजनीति
कृष्ण बेदी ने कहा कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर किसान हितैषी है और प्रदेश सरकार किसानों की 100 प्रतिशत फसल खरीदेगी। लेकिन गुरनाम सिंह चढूनी कांग्रेस की राजनीति कर रहे हैं। क्योंकि वह सूरजमुखी की फसल के लिए भूपेंद्र हुड्डा और दीपेंद्र हुड्डा से मिल रहे हैं जिन्होंने पिछले दस सालों में किसानों की कभी बात नहीं सुनी थी। उन्होंने साफ कहा कि गुरनाम चढूनी फसल के मामले को लेकर एक बार भी उनके पास नहीं आए और न ही कोई चर्चा की। वह फसल के लिए किसानों से तो बात कर सकते हैं लेकिन कांग्रेस के एजेंटों से नहीं। उन्होंने कहा कि जब केंद्र ने शाहाबाद में सूरजमुखी की रिपोर्ट मांगी तो अधिकारियों ने बताया कि यहां सूरजमुखी नहीं है क्योंकि कोई भी किसान समर्थन मूल्य पर अपनी फसल बेचने नहीं आया।