अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
आप यदि कुरुक्षेत्र के रण में महाभारत युद्ध के लिए उतरे कौरव-पांडवों की सेना के बीच भगवान श्रीकृष्ण के वेश में खुद को देखना चाहते हैं तो यह सपना इंटरनेशनल गीता जयंती फेस्टीवल-2017 में पूरा हो सकता है। यहां आप महाभारत के मनचाहे योद्धाओं का रूप अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी ऑगमेंटेड रियलटी, यानी संवर्धित वास्तविकता के माध्यम से साकार कर सकते हैं। हरियाणा सरकार ने इस फेस्ट को कई मायनों में खास बनाने की योजना तैयार की है। इनमें थ्री-डी प्रदर्शनी, ब्रह्मसरोवर में तैरती हुई स्टेज पर लाइट एंड साउंड शो और छह जगहों पर लगाए जाने वाली ऑगमेंटेड रियलटी शामिल है। इसमें थ्री-डी प्रदर्शनी 50 फुट चौड़ी एक गुफा में होगी।
गीता जयंती के दौरान यह गुफा ब्रह्मसरोवर के मध्य पुरुषोत्तमपुरा बाग में बनवाने का प्रस्ताव तैयार किया है। इसमें आधुनिक तकनीक से गीता रहस्य और पुरानी चीजों को समझने का मौका मिलेगा। तीसरी खासियत लाइट एंड साउंड शो के रूप में ब्रह्मसरोवर में तैरती स्टेज पर दिखेगी। पंद्रह फुट से भी गहरे ब्रह्मसरोवर के बीच तैरती स्टेज पर कलाकार लाइट एंड साउंड शो पेश करेंगे। यह तीनों ही अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव हर आयु वर्ग, विशेषकर बच्चों और युवाओं के लिए खास आकर्षण का केंद्र बनाने के लिए जोड़े गए हैं। अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव के आयोजक मंडल तीनों विषयों पर मुहर लगा चुका है। अब तैयारी उन एजेंसियों के आने की है, जो इन तीनों विषयों में खास और रोचक थीम तैयार कर सकें। इसके लिए कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की साइट पर टेंडर डाले गए हैं। गीता जयंती के इस टेंपरेरी वर्क पर करीब ढाई करोड़ रुपये तक खर्च होने का अनुमान है।
ये है ऑगुमेंटेड रियलटी, यानी संवर्धित वास्तविकता
यह एक ऐसी प्रौद्योगिकी है, जो वास्तविक दुनिया की सूचना को कंप्यूटर द्वारा तैयार की जाने वाली छवियों और सामग्री के साथ मिलाती है। इसके द्वारा किसी कंप्यूटर स्क्रीन और मोबाइल फोन ब्राउजर पर भी मिलाकर प्रस्तुत की जाती है। इससे उपयोगकर्ता को एक सहभागी अनुभव प्राप्त होता है। ऑगुमेंटेड रियलिटी वर्चुअल रियलिटी का ही दूसरा रूप है। इस तकनीक में आपके आसपास के वातावरण से मेल खाता हुआ कंप्यूटर द्वारा तैयार किया माहौल दिखाई देता हैं। इसके माध्यम से आसपास के वातावरण के साथ आभासी दुनिया का मेल करते हुए एक वर्चुअल सीन बनाया जाता है। यह देखने में एकदम वास्तविक लगता है। आप वास्तविक दुनिया और आभासी दुनिया के बीच फर्क नहीं बता सकते। वर्तमान में ऑगुमेंटेड रियलिटी का प्रयोग डिजिटल गेम के अलावा सैन्य प्रशिक्षण, शिक्षा, चिकित्सा और इंजीनियरिंग के क्षेत्रों में हो रहा है।
इस तकनीक से असंभव भी दिखेगा संभव
अंदाजा लगाइए कि जब आपके सामने भगवान श्रीकृष्ण विराट रूप में खड़े हों, या कुरुक्षेत्र के रण में आप महाभारत युद्ध में योद्धा की तरह खड़े हों। ऐसी अनेक संभावनाएं, जिनका आज के युग या आपके आसपास के वातावरण से नाता न हो, वह यदि सजीव हो जाएग तो कैसा अनुभव होगा। लेकिन, इस तकनीक यानी ऑगमेंटेड रियलिटी से यह असंभव भी संभव दिखेगा। इस तकनीक को करीब से देखने के साथ इसके अनुभवों को अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव-2017 में साझा करने के लिए महज चंद दिन रह गए हैं। खास के अलावा आमजन भी इस तकनीक को बेहद करीब से अनुभव कर सकेंगे।